कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, PM मोदी और गौतम अडानी पर बने वीडियो के प्रसार पर 31 जनवरी तक रोक
कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री के प्रकाशन, अपलोड और साझा करने पर 31 जनवरी 2027 तक रोक लगा दी है। यह आदेश अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से दायर मानहानि याचिका पर आया। अदालत ने एक्स, यूट्यूब और इंस्टाग्राम समेत संबंधित प्लेटफॉर्मों को याचिका में सूचीबद्ध URL पर उपलब्ध वीडियो और उसके समान संस्करणों तक पहुंच हटाने या निष्क्रिय करने का निर्देश दिया। अडानी समूह के वकील ने अदालत में प्रतिष्ठा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 का अभिन्न हिस्सा बताया।
लेखक
Jyoti Mukherjee

PM मोदी और गौतम अडानी पर बनी डॉक्यूमेंट्री के प्रसार पर रोक, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश 31 जनवरी तक लागू
कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री के प्रकाशन, अपलोडिंग और शेयरिंग पर 31 जनवरी 2027 तक रोक लगा दी है। सोमवार को अदालत की अवकाशकालीन पीठ ने अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने और मानहानि के लिए हर्जाने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति आर्यक दत्त ने संबंधित पक्षों को वीडियो या उसके किसी क्लिप, अंश अथवा उससे काफी हद तक मिलते-जुलते संस्करण को किसी भी माध्यम या प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित करने, दोबारा प्रकाशित करने, अपलोड करने या साझा करने से रोक दिया। इस आदेश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के मालिकों और संचालकों को भी शामिल किया गया है।
किन प्लेटफॉर्मों को दिया गया निर्देश?
अदालत के आदेश में एक्स, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के मालिकों और संचालकों के साथ उनके एजेंटों तथा उनकी ओर से काम करने वाले संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया है।
अदालत ने कहा कि याचिका में सूचीबद्ध प्रत्येक URL पर उपलब्ध वीडियो को हटाया जाए या उस तक पहुंच निष्क्रिय की जाए। इसके अलावा, वीडियो तक पहुंच उपलब्ध कराने वाली गतिविधियों, जैसे रीपोस्ट, कोट पोस्ट और शेयर को भी संबंधित URL के संदर्भ में निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया है।
इस आदेश का उद्देश्य संबंधित वीडियो के ऑनलाइन प्रसार को रोकना है। आदेश में केवल मूल वीडियो ही नहीं, बल्कि उसके क्लिप, अंश और उससे काफी हद तक समान पुनरुत्पादन को भी शामिल किया गया है।
अडानी एंटरप्राइजेज ने क्यों दायर की याचिका?
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने कथित मानहानि के आधार पर हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में टेक उद्यमी सबीर भाटिया और अन्य पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने के साथ मानहानि के लिए हर्जाना देने की मांग भी रखी।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि संबंधित सामग्री से प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में डॉक्यूमेंट्री की पूरी सामग्री या उसमें किए गए विशिष्ट दावों का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए वीडियो में मौजूद कथित सामग्री के बारे में कोई अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
प्रतिष्ठा का अधिकार और संविधान का अनुच्छेद 21
सुनवाई के दौरान अडानी समूह की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि प्रतिष्ठा का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का अभिन्न हिस्सा है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से संबंधित है।
इस दलील के माध्यम से याचिकाकर्ता पक्ष ने प्रतिष्ठा की सुरक्षा को कानूनी मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया। अदालत ने मामले में वीडियो के प्रकाशन और प्रसार पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। इस आदेश को याचिका में लगाए गए आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगी रोक
हाई कोर्ट का आदेश 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान संबंधित पक्षों को वीडियो और उसके समान संस्करणों के प्रकाशन, अपलोडिंग तथा शेयरिंग से दूर रहने का निर्देश दिया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को याचिका में सूचीबद्ध URL पर सामग्री की उपलब्धता रोकने के लिए कहा गया है।
मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और अंतिम निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि रोक के बाद अदालत क्या निर्देश देती है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में इस विवाद के अंतिम निपटारे या मानहानि के दावे पर अंतिम फैसले की जानकारी नहीं दी गई है।
ऑनलाइन सामग्री और मानहानि से जुड़ा मामला
यह मामला ऑनलाइन वीडियो, प्रतिष्ठा के अधिकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की भूमिका से जुड़े कानूनी सवालों को सामने लाता है। डिजिटल माध्यमों पर वीडियो तेजी से साझा हो सकते हैं, इसलिए अदालत के आदेश में मूल वीडियो के साथ उसके क्लिप, समान संस्करण और सूचीबद्ध URL पर उपलब्ध शेयरिंग गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
फिलहाल कलकत्ता हाई कोर्ट ने संबंधित डॉक्यूमेंट्री के प्रसार पर 31 जनवरी 2027 तक रोक लगाई है। मामले में लगाए गए आरोपों और याचिकाकर्ता की दलीलों पर अंतिम निष्कर्ष आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाएगा.
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