CIA डायरेक्टर रैटक्लिफ क्यों गए थे मॉस्को? डोनल्ड ट्रंप ने सब कुछ कर दिया क्लियर
CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ की मॉस्को की अचानक और बेहद गोपनीय यात्रा ने अमेरिकी-रूसी संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रूसी खुफिया प्रमुख सर्गेई नारीश्किन ने पुष्टि की है कि रैटक्लिफ ने मॉस्को में उनसे मुलाकात की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस यात्रा को “semi-routine” बताया और कहा कि इसका मकसद रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में दावा है कि रैटक्लिफ ने रूस को NATO पर हमला न करने की चेतावनी भी दी थी। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की अमेरिकी कोशिशें मुश्किलों में हैं और रूस तथा पश्चिम के बीच तनाव बरकरार है।
रैटक्लिफ ने मंगलवार को मॉस्को का दौरा किया और रूसी खुफिया अधिकारियों से बातचीत की। रूस की विदेशी खुफिया सेवा SVR के प्रमुख सर्गेई नारीश्किन ने गुरुवार को पुष्टि की कि दोनों के बीच एक “working-level meeting” हुई थी। हालांकि, बातचीत में क्या चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
ट्रंप ने बताया 'सेमी-रूटीन' दौरा
रैटक्लिफ की यात्रा को लेकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं बताया।
ट्रंप ने कहा कि यह एक “very semi-routine” यात्रा थी और संकेत दिया कि इससे आगे चलकर कुछ सकारात्मक परिणाम निकल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने यह भी कहा कि रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा में NATO या ईरान से जुड़े मुद्दे शामिल नहीं थे।
फिर मॉस्को जाने की जरूरत क्यों पड़ी?
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि CIA डायरेक्टर की ऐसी यात्रा सामान्य राजनयिक दौरे जैसी नहीं होती। रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा अघोषित थी और वह अमेरिकी सरकारी विमान से रूस पहुंचे थे।
क्रेमलिन ने पुष्टि की कि रैटक्लिफ ने रूसी खुफिया अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी मुलाकात नहीं हुई। हालांकि, पुतिन को बातचीत के नतीजे की जानकारी दी गई थी।
क्या रूस को NATO पर हमले की चेतावनी दी गई?
यही इस यात्रा का सबसे बड़ा और संवेदनशील पहलू है।
Wall Street Journal और CBS News की रिपोर्टों के मुताबिक, रैटक्लिफ ने रूसी अधिकारियों को चेतावनी दी कि रूस को किसी भी NATO सदस्य देश पर हमला नहीं करना चाहिए।
रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया समुदाय को आशंका है कि रूस NATO की एकजुटता को परखने के लिए सीमित सैन्य कार्रवाई, साइबर हमले या किसी छोटे स्तर की घुसपैठ जैसे कदम उठा सकता है।
हालांकि, इस दावे को अमेरिकी सरकार, CIA या रूसी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है। Reuters ने भी इसे अमेरिकी मीडिया में सामने आए दावे के तौर पर रिपोर्ट किया है।
क्या ईरान का मुद्दा भी उठा?
एक और रिपोर्ट के मुताबिक, रैटक्लिफ ने मॉस्को में ईरान से जुड़े मुद्दे पर भी बातचीत की।
CBS ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उन्होंने ईरान को लेकर संभावित अतिरिक्त अमेरिकी प्रतिबंधों की बात भी उठाई। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि यात्रा NATO या ईरान से संबंधित नहीं थी।
इसलिए इस हिस्से को फिलहाल सूत्रों पर आधारित जानकारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा इतनी खास क्यों?
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसी CIA डायरेक्टर की 2021 के बाद मॉस्को की पहली ज्ञात यात्रा है।
नवंबर 2021 में तत्कालीन CIA डायरेक्टर विलियम बर्न्स ने मॉस्को का दौरा किया था। उस समय उन्होंने रूसी नेतृत्व को यूक्रेन पर संभावित आक्रमण को लेकर अमेरिकी खुफिया जानकारी और चेतावनी दी थी। कुछ महीने बाद फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने का हमला शुरू कर दिया था।
इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ने रैटक्लिफ के मौजूदा दौरे को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है।
पुतिन से मुलाकात क्यों नहीं हुई?
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि रैटक्लिफ और पुतिन की मुलाकात नहीं हुई। बातचीत मुख्य रूप से दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों के बीच हुई।
पेस्कोव ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे खुफिया संपर्क बेहद तनावपूर्ण दौर में भी जारी रह सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह कहने से इनकार किया कि बैठक से अमेरिका-रूस संबंधों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव आने वाला है।
यूक्रेन को भी दी गई थी जानकारी?
रिपोर्टों के मुताबिक, रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को भी इसकी जानकारी दी थी और कथित तौर पर प्रतिनिधिमंडल के मॉस्को में रहने के दौरान कुछ इलाकों पर हमले सीमित रखने को कहा गया था।
यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वॉशिंगटन इस तरह के संवेदनशील खुफिया संपर्क को किसी सैन्य टकराव से प्रभावित नहीं होने देना चाहता था।
ट्रंप बनाम अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट
मुद्दाट्रंप/आधिकारिक पक्षमीडिया रिपोर्टयात्रा का स्वरूप“Semi-routine”बेहद असामान्य और गोपनीयरूस से बातचीतयुद्ध खत्म करने की कोशिशों से जुड़ीसुरक्षा और NATO पर भी चर्चाNATO पर चेतावनीट्रंप ने इससे इनकार कियाWSJ/CBS ने चेतावनी की बात कहीईरानट्रंप ने इसे नकाराCBS ने ईरान चर्चा की रिपोर्ट दीपुतिन से मुलाकातनहीं हुईपुतिन को बैठक की जानकारी दी गईरूसी अधिकारीSVR प्रमुख से बैठक की पुष्टिबातचीत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं
क्या यह रूस-यूक्रेन शांति वार्ता का संकेत है?
संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका लगातार रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश कर रहा है और खुफिया चैनल इस तरह की संवेदनशील बातचीत के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रैटक्लिफ की यात्रा से कोई बड़ी शांति पहल शुरू हो गई है। खुद क्रेमलिन ने भी इस यात्रा के बाद अमेरिका-रूस संबंधों में तत्काल सुधार की उम्मीद को लेकर सावधानी बरती है।
आखिर क्या है रैटक्लिफ के मॉस्को जाने की 'असली वजह'?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी को दो हिस्सों में देखना सबसे सही होगा।
आधिकारिक तौर पर: ट्रंप ने इसे एक सामान्य/अर्ध-सामान्य खुफिया संपर्क बताया है और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के अमेरिकी प्रयासों की ओर इशारा किया है। रूसी पक्ष ने भी खुफिया अधिकारियों के बीच बैठक की पुष्टि की है।
सूत्रों के मुताबिक: अमेरिकी मीडिया का दावा है कि रैटक्लिफ ने रूस को NATO सदस्य पर हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी और ईरान से जुड़े मुद्दे भी उठाए। लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल इसे रूस के साथ एक बेहद संवेदनशील खुफिया संपर्क कहना ज्यादा सटीक होगा, न कि किसी घोषित शांति समझौते या बड़े कूटनीतिक सौदे का संकेत।
निष्कर्ष
CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ का अचानक मॉस्को पहुंचना निश्चित रूप से सामान्य घटना नहीं है। रूसी विदेशी खुफिया प्रमुख सर्गेई नारीश्किन ने बैठक की पुष्टि की है, जबकि ट्रंप ने दौरे को “semi-routine” बताते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की कोशिशों से जोड़ा है।
दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में NATO को लेकर चेतावनी और ईरान से जुड़ी बातचीत का दावा सामने आया है। लेकिन जब तक वॉशिंगटन या मॉस्को इसकी पुष्टि नहीं करते, इन दावों को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इतना जरूर साफ है कि अमेरिका और रूस के बीच सार्वजनिक कूटनीति से अलग खुफिया चैनल अभी भी सक्रिय हैं—और रैटक्लिफ की यह यात्रा इसी संपर्क की अहम कड़ी है।
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