'वोटर लिस्ट में बदलावों की पूरी जानकारी चाहिए', EC-SIR विवाद के बीच कांग्रेस ने रखी 5 मांगें
EC के SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची में हुए बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करने समेत पांच मांगें रखी हैं। कांग्रेस ने हटाए गए मतदाताओं को अपील का अवसर देने और गंभीर गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की है।
लेखक
Vinay Mishra
EC-SIR विवाद के बीच कांग्रेस की पांच मांगें
नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद लगातार जारी है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि वोटर लिस्ट में क्या बदलाव किए गए हैं और किन लोगों के नाम हटाए गए हैं।
खड़गे ने आरोप लगाया कि SIR और मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों से अलग रुख रखते हुए कहा है कि SIR से जुड़े उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग के आदेशों को कानूनी आधार प्राप्त है।
कांग्रेस की पांच प्रमुख मांगें क्या हैं?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CWC की बैठक में पार्टी की ओर से पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं।
1. वोटर लिस्ट में हुए बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक हो
कांग्रेस चाहती है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर किए गए बदलावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। पार्टी ने विशेष रूप से उन मतदाताओं की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है, जिनके नाम सूची से हटाए गए हैं।
2. हटाए गए मतदाताओं को अपील का पूरा अवसर मिले
कांग्रेस की दूसरी मांग है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी दी जाए और उन्हें अपनी आपत्ति दर्ज कराने तथा अपील करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
3. राजनीतिक दलों को जरूरी चुनावी डेटा समय पर मिले
कांग्रेस ने राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित जरूरी डेटा आसान फॉर्मेट में और समय पर उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि दल भी सूची में बदलावों की जांच कर सकें।
4. गंभीर गड़बड़ियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो
पार्टी ने कथित गंभीर अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और इसके लिए समय-सीमा तय करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
5. चुनावी डेटा और फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो
कांग्रेस की पांचवीं मांग चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और चुनावी डेटा को अधिक पारदर्शी बनाने से जुड़ी है। खड़गे ने कहा कि मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है और चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास कायम रहे।
Form 6 को लेकर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि SIR के दौरान फॉर्म से जुड़ी अतिरिक्त प्रक्रियाएं युवा मतदाताओं के पंजीकरण को प्रभावित कर सकती हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित Form 6 में जो अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई है, वह विशेष रूप से SIR प्रक्रिया के लिए है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे मान्यता दी है। नियमित अवधि में वैधानिक नियमों के तहत निर्धारित Form 6 का इस्तेमाल जारी रहेगा।
SIR की प्रक्रिया को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब रिपोर्टों में सामने आया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 और चुनावी डेटा से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने बाद में स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने छूटे हुए मतदाताओं की मदद के लिए BLO द्वारा घर-घर जाकर दस्तावेज जुटाने और ऑनलाइन सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी है।
कांग्रेस का चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने का संकेत
CWC बैठक में खड़गे ने कहा कि कांग्रेस मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को आगे भी उठाएगी। पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची में बदलावों से जुड़े सवालों पर अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत चल रही है और मतदाताओं के दावे-आपत्तियों के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में विवाद का केंद्र अब मतदाता सूची में बदलावों की पारदर्शिता, डेटा तक पहुंच और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया बना हुआ है।
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