EAC-PM ने संसदीय समिति के सामने उठाया बार-बार चुनाव कराने की आर्थिक लागत का मुद्दा
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्यों ने संयुक्त संसदीय समिति को बताया कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों की लागत केवल मतदान कराने के खर्च तक सीमित नहीं रहती। उनके अनुसार, बार-बार चुनाव होने से निजी निवेश भी प्रभावित हो सकता है।
लेखक
Jyoti Mukherjee

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अर्थशास्त्रियों ने शुक्रवार को एक साथ चुनाव कराने से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के सामने अलग-अलग समय पर चुनाव कराने की आर्थिक लागत का मुद्दा उठाया। सूत्रों के अनुसार, परिषद के सदस्यों ने समिति को बताया कि बार-बार होने वाले चुनावों का खर्च केवल चुनाव आयोजित कराने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर निजी निवेश पर भी पड़ सकता है।
EAC-PM के सदस्यों के मुताबिक, देश में मौजूदा व्यवस्था के तहत अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। इस तरह लगातार चुनावी गतिविधियां जारी रहने से आर्थिक गतिविधियों और निजी क्षेत्र के निवेश संबंधी फैसलों पर प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना था कि बार-बार चुनाव होने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने में बाधा आ सकती है।
इस विषय पर चर्चा के लिए संयुक्त संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. महेंद्र देव, परिषद की सदस्य डॉ. शमिका रवि और अंशकालिक सदस्य प्रोफेसर पामी दुआ से मुलाकात की। बैठक में चुनावों की मौजूदा व्यवस्था और एक साथ चुनाव कराने से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद पी. पी. चौधरी कर रहे हैं। समिति एक साथ चुनाव कराने से संबंधित विधेयकों की जांच कर रही है। इस प्रक्रिया के तहत अलग-अलग विशेषज्ञों और संस्थानों के प्रतिनिधियों से सुझाव और विचार लिए जा रहे हैं।
समिति ने इसी दिन विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के अध्यक्ष एस. गुरुमूर्ति से भी मुलाकात की। बैठक में उनके विचार भी सुने गए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस मुलाकात के दौरान दिए गए सुझावों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
EAC-PM के सदस्यों की ओर से उठाया गया मुख्य मुद्दा यह था कि चुनावों के बार-बार होने से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव केवल प्रत्यक्ष चुनावी खर्च से नहीं आंका जाना चाहिए। उनके अनुसार, निजी निवेश पर पड़ने वाला संभावित असर भी इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संयुक्त संसदीय समिति इन विधेयकों की जांच के दौरान विभिन्न पक्षों के विचारों पर विचार कर रही है।
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