क्या आपके पास मौजूद 20 रुपये के सिक्के असली हैं? हरियाणा से यूपी तक फैले नकली सिक्कों के नेटवर्क का पुलिस ने किया खुलासा
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में चलाने वाले कथित बहु-राज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर छह भारी मशीनें, 6,400 नकली सिक्के और बड़ी संख्या में अन्य उपकरण बरामद किए हैं। जांच के अनुसार, गिरोह हरियाणा के सोनीपत में स्क्रूड्राइवर बनाने की आड़ में करीब 10 महीने से कथित तौर पर नकली सिक्के तैयार कर रहा था। आरोपियों ने 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में चलाने का दावा किया है, हालांकि पुलिस ने अभी इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है।
लेखक
Jyoti Mukherjee

लखनऊ: देश में नकली मुद्रा के कारोबार को लेकर एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में चलाने वाले कथित बहु-राज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह भारी मशीनें, 6,400 नकली 20 रुपये के सिक्के और सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह हरियाणा के सोनीपत जिले में पिछले करीब 10 महीनों से सक्रिय था। वहां नकली सिक्के बनाने की गतिविधियों को छिपाने के लिए स्क्रूड्राइवर निर्माण का कारोबार दिखाया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जब कार्रवाई का डर हुआ, तो उन्होंने अपनी यूनिट बंद कर दी और मशीनों को हरियाणा से उत्तर प्रदेश ले जाने की कोशिश की। इसी दौरान सहारनपुर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
स्क्रूड्राइवर बनाने की आड़ में चल रही थी नकली सिक्कों की यूनिट
जांच के अनुसार, गिरोह ने सोनीपत में एक ऐसी इकाई स्थापित की थी, जहां बाहर से देखने पर स्क्रूड्राइवर बनाने का काम होता दिखाई देता था। लेकिन पुलिस का आरोप है कि इस कारोबार की आड़ में 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए जा रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, यह गतिविधि करीब 10 महीने से चल रही थी। गिरोह के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर मशीनें लगाकर काम करते थे और जब भी उन्हें पुलिस कार्रवाई की आशंका होती, वे अपना ठिकाना बदल लेते थे।
बताया गया कि गिरोह के एक सहयोगी की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद बाकी सदस्यों को भी सोनीपत की यूनिट पर छापेमारी का डर सताने लगा। इसके बाद उन्होंने वहां की गतिविधियां बंद कर दीं और मशीनों को उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित करने की योजना बनाई।
13 सितंबर को सहारनपुर पुलिस ने की कार्रवाई
इस मामले का खुलासा 13 सितंबर को हुआ, जब सहारनपुर पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली। सूचना के अनुसार, कुछ लोग तितरौन इलाके में लगभग 500 वर्ग फुट जगह तलाश रहे थे। वे वहां छह भारी मशीनें लगाने की योजना बना रहे थे और दावा कर रहे थे कि उनका उद्देश्य औजारों का निर्माण करना है।
मुखबिर ने इन लोगों की गतिविधियों को संदिग्ध बताया था। इसके बाद पुलिस ने इलाके में निगरानी बढ़ाई और तीन लोगों को रोककर पूछताछ की।
पुलिस ने जिन आरोपियों को शुरुआती कार्रवाई में पकड़ा, उनमें 62 वर्षीय उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू और मुजफ्फरनगर निवासी कुलदीप शामिल थे। हिमांशु और कुलदीप की उम्र लगभग 30 वर्ष बताई गई है।
दो अन्य आरोपी भी अलग-अलग वाहनों से पकड़े गए
तीनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को उनके दो अन्य साथियों के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन, जो बिहार के मधुबनी का निवासी है, और अनुराग पाल उर्फ लंकेश, जो उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर से है, पास के एक चौराहे पर अलग-अलग चारपहिया वाहनों में मौजूद थे।
पुलिस टीम ने तुरंत वहां पहुंचकर दोनों को भी हिरासत में ले लिया। उनके वाहनों से भारी मशीनें बरामद की गईं। तलाशी के दौरान पुलिस को 6,400 नकली 20 रुपये के सिक्के मिले, जिनकी कुल अंकित कीमत 1.28 लाख रुपये बताई गई है।
इसके अलावा बड़ी संख्या में अधबने सिक्के भी बरामद किए गए, जिनका अनुमानित मूल्य करीब 5 लाख रुपये बताया गया है। इस कार्रवाई में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के चलाने का दावा
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि उन्होंने बाजार में 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के चलाए हैं। हालांकि, जांच एजेंसी ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
इस आंकड़े का पैमाना समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि 70 करोड़ रुपये की राशि 20 रुपये के 3.5 करोड़ सिक्कों के बराबर होती है। यदि आरोपियों का दावा सही साबित होता है, तो यह नकली सिक्कों के कारोबार का बहुत बड़ा मामला हो सकता है।
फिलहाल पुलिस बरामद सिक्कों, मशीनों और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का पता लगाने में जुटी है। 70 करोड़ रुपये से अधिक के सिक्के बाजार में पहुंचने के दावे को अभी जांच के आधार पर सत्यापित किया जाना बाकी है।
दिल्ली, हरियाणा और कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच
पुलिस का आरोप है कि यह गिरोह केवल हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। इसकी गतिविधियों के संबंध में दिल्ली, पंजाब, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों के नाम सामने आए हैं।
जांच में यह भी पता चला कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में मशीनें लगाते थे। पुलिस के मुताबिक, जब उन्हें किसी स्थान पर कार्रवाई की आशंका होती थी, तो वे वहां से मशीनें हटाकर दूसरी जगह चले जाते थे।
पुलिस का मानना है कि इस व्यवस्था के जरिए गिरोह अपनी गतिविधियों को लंबे समय तक जारी रखने की कोशिश कर रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि किन-किन स्थानों पर ऐसी इकाइयां स्थापित की गई थीं और नकली सिक्कों को बाजार में पहुंचाने के लिए कौन-सा नेटवर्क इस्तेमाल किया जाता था।
मुख्य आरोपी का पहले भी सामने आ चुका है नाम
जांच अधिकारी और थाना प्रभारी राजीव कुमार कौशिक के अनुसार, उपकार लूथरा इस कथित गिरोह का प्रमुख व्यक्ति था। पुलिस की जांच में सामने आया कि उसे पहले भी दिल्ली पुलिस ने नकली सिक्के बनाने के मामले में गिरफ्तार किया था।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, उपकार पहले सुनार के रूप में काम कर चुका था। इसी काम के दौरान उसने धातुओं और सिक्कों से जुड़े कुछ तकनीकी कौशल हासिल किए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने इन्हीं कौशलों का इस्तेमाल नकली सिक्के तैयार करने की प्रक्रिया को विकसित करने में किया।
पुलिस का कहना है कि उपकार की मुलाकात हिमांशु से तिहाड़ जेल में हुई थी। बाद में दोनों ने मिलकर कथित नेटवर्क तैयार किया। गिरोह के कुछ अन्य सदस्य भी अलग-अलग जेलों में मुलाकात के बाद इस नेटवर्क से जुड़े थे।
कैसे तैयार किए जा रहे थे नकली 20 रुपये के सिक्के?
पुलिस के अनुसार, आरोपी नकली सिक्के तैयार करने के लिए छह भारी मशीनों, विशेष डाई और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि सिक्कों के निर्माण से जुड़े कुछ शुरुआती हिस्से दिल्ली की एक इकाई से प्राप्त किए जाते थे। इसके बाद नकली सिक्कों के डिजाइन से संबंधित डाई भी दूसरी इकाई से मंगाई जाती थीं।
पुलिस के मुताबिक, मशीनों की मदद से इन हिस्सों को आकार और बाहरी रूप दिया जाता था, ताकि तैयार सिक्के देखने में असली सिक्कों जैसे लगें। इसके बाद उनकी सतह और बनावट को बेहतर दिखाने के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
इस मामले में पुलिस ने 39 बिना निशान वाली और 20 निशान लगी डाई भी बरामद की हैं। इसके अलावा डाई पॉलिश करने की मशीन, ग्राइंडिंग स्टोन, ब्रश, फाइल, हथौड़े और अन्य औजार भी जब्त किए गए हैं।
एक दिन में 10 से 12 हजार सिक्के बनाने का दावा
पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपियों ने दावा किया कि उनकी मशीनों की मदद से प्रतिदिन लगभग 10,000 से 12,000 नकली सिक्के तैयार किए जा सकते थे। उन्होंने प्रत्येक सिक्के की निर्माण लागत लगभग 5 से 6 रुपये बताई।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि बरामदगी के समय मशीनें चल नहीं रही थीं। इसलिए प्रतिदिन इतनी बड़ी संख्या में सिक्के बनाने की क्षमता के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में मशीनों और औजारों को अपने कब्जे में लिया। बरामद उपकरणों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उनका इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और उनसे कितने सिक्के तैयार किए गए होंगे।
नकली नोटों के साथ नकली सिक्कों पर भी बढ़ी चिंता
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश में नकली बैंक नोटों की बरामदगी के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में 2,17,396 नकली बैंक नोटों का पता चला था, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 2,29,746 हो गई।
ये आंकड़े नकली बैंक नोटों से संबंधित हैं, नकली सिक्कों से नहीं। लेकिन सहारनपुर में सामने आया मामला यह दिखाता है कि नकली मुद्रा का कारोबार केवल नोटों तक सीमित नहीं है और सिक्कों के जरिए भी ऐसे अपराध किए जा सकते हैं।
भारत में सिक्कों का निर्माण भारतीय रिजर्व बैंक सीधे नहीं करता। सिक्के केंद्र सरकार द्वारा कॉइनेज एक्ट, 2011 के तहत सरकारी टकसालों में ढाले जाते हैं। देश में मुंबई, कोलकाता, नोएडा और हैदराबाद स्थित सरकारी इकाइयों में सिक्कों का निर्माण होता है, जबकि इन्हें प्रचलन में लाने की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक की होती है।
नकली मुद्रा बनाने पर हो सकती है उम्रकैद
भारतीय कानून के तहत नकली मुद्रा का निर्माण गंभीर अपराध है। रिपोर्ट के अनुसार, नकली मुद्रा तैयार करने के अपराध में अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
फिलहाल सहारनपुर पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों तथा अलग-अलग राज्यों में संचालित इकाइयों की जानकारी जुटा रही है। बरामद 6,400 सिक्कों, अधबने सिक्कों और मशीनों की जांच के साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में पहुंचाने का दावा कितना सही है।
इस मामले में आगे की जांच से ही कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क, नकली सिक्कों के प्रसार और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
Keep reading
More in अपराध

अपराध
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में नया मोड़, आरोपी ने खुद को बताया नाबालिग
अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार एक आरोपी ने अदालत में खुद को नाबालिग बताया है। उसके वकीलों द्वारा दाखिल दस्त…

अपराध
बिहार के शेरपुर में पुलिस मुठभेड़ में तीन वांछित अपराधियों की मौत, पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाने का किया दावा
बिहार के पटना जिले के शेरपुर गांव में शुक्रवार को पुलिस मुठभेड़ में तीन वांछित लोगों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, तीनों एक व्यक्ति की हत्य…

अपराध
राजस्थान में देह व्यापार के गिरोह से छह नाबालिग लड़कियां बचाई गईं, परिवार के सदस्य समेत पांच गिरफ्तार
राजस्थान के झालावाड़ जिले में कथित देह व्यापार के गिरोह से छह नाबालिग लड़कियों को बचाया गया है। पुलिस ने इस मामले में परिवार के सदस्यों और र…

अपराध
कोच्चि में डॉक्टर को फ्लैट पर बुलाकर लूटने का आरोप, दो मलयालम अभिनेता गिरफ्तार; डॉक्टर पर भी दुष्कर्म का मामला दर्ज
केरल के कोच्चि में एक 41 वर्षीय डॉक्टर की शिकायत पर मलयालम फिल्म उद्योग के दो अभिनेताओं और एक ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि डॉ…

अपराध
महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर CBI की गिरफ्त में, अब अन्य बड़े आरोपियों पर नजर
महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में कथित सरगना सौरभ चंद्राकर को CBI ने आठ दिनों की हिरासत में लिया है। उसे पूछताछ के लिए नई दिल्ली स्थित एजेंसी मु…

अपराध
तेलंगाना में 1.5 एकड़ जमीन के विवाद में महिला की हत्या, ससुराल पक्ष पर सिर काटने का आरोप; पीछे छूटीं दो बेटियां
तेलंगाना के महबूबनगर जिले में 28 वर्षीय के. सुनीता की कथित तौर पर उसके ससुराल वालों ने धारदार हथियारों से हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, हत्य…
