काजीरंगा के भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत रद्द की
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित लग्जरी होटल परियोजना का विरोध करने वाले भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि असम सरकार ने पुराने आपराधिक मामलों के आधार पर हिरासत का आदेश दिया और यह विचार नहीं किया कि सामान्य कानूनों के तहत कार्रवाई पर्याप्त थी या नहीं। 115 दिनों से अधिक समय बाद डोले की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
लेखक
Jyoti Mukherjee

काजीरंगा के भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत रद्द की
असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित लग्जरी होटल परियोजना का विरोध करने वाले भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को गुवाहाटी हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उनकी हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद 115 दिनों से अधिक समय से हिरासत में रह रहे डोले की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना और न्यायमूर्ति सुस्मिता फुकन खौंड की पीठ ने अपने फैसले में असम सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि हिरासत का आदेश देने वाले अधिकारियों ने इस बात पर पर्याप्त विचार नहीं किया कि डोले की गतिविधियों से निपटने के लिए देश के सामान्य कानून पर्याप्त थे या नहीं।
पुराने आपराधिक मामलों के आधार पर हिरासत पर सवाल
हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने डोले के खिलाफ 13 आपराधिक मामलों का हवाला देकर हिरासत का आदेश जारी किया था। हालांकि, इन 13 मामलों में से नौ में उन्हें पहले ही बरी किया जा चुका था।
अदालत के अनुसार, केवल तीन कार्यवाही लंबित थीं और उनमें से एक मामले में साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही थी।
पीठ ने कहा कि पुराने मामलों, जिनमें आरोपी को बरी किया जा चुका हो या आरोपों से मुक्त किया गया हो, के आधार पर निवारक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि उपलब्ध तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों ने सामान्य कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय डोले को हिरासत में रखने का शॉर्टकट अपनाया।
विदेशी यात्राओं को हिरासत का पर्याप्त आधार नहीं माना
हिरासत के आदेश में प्रणब डोले की विदेश यात्राओं का भी उल्लेख किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार उनकी विदेश यात्राओं से जुड़ी किसी कथित भारत-विरोधी गतिविधि का विवरण देने में विफल रही।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बार-बार विदेश यात्रा करना अपने आप में किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखने का आधार नहीं हो सकता। प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के देश की यात्रा करने का मौलिक अधिकार है।
पीठ ने यह भी कहा कि विदेशी यात्राओं और कथित विदेशी मुद्रा प्राप्तियों को राज्य की सुरक्षा, अखंडता या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताने के समर्थन में पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई।
सड़क जाम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के आरोप भी अस्पष्ट
राज्य सरकार ने डोले पर सड़क जाम करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप भी लगाए थे।
हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि इन आरोपों के समर्थन में आवश्यक विवरण और ठोस तथ्य उपलब्ध नहीं कराए गए थे। अदालत ने कहा कि आरोप अस्पष्ट थे और उनमें जरूरी जानकारी का अभाव था।
डोले की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु बोर्थाकुर के अनुसार, हिरासत से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराना भी अदालत के फैसले का एक महत्वपूर्ण आधार था।
जुलाई में गिरफ्तारी और फिर NSA के तहत हिरासत
प्रणब डोले 40 वर्ष के हैं और ग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स कमेटी के संयोजक हैं। वह लंबे समय से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित लग्जरी होटल परियोजना के संभावित प्रभाव और स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों के विस्थापन को लेकर आवाज उठाते रहे हैं।
12 जुलाई 2026 को गोलाघाट पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके बाद 29 जुलाई को स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।
हालांकि, इसके अगले दिन असम सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उन्हें हिरासत में ले लिया। सरकार ने उस समय उनकी गतिविधियों को सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा के लिए प्रतिकूल बताया था।
जमानत आदेश में भी पुलिस के आरोपों पर उठे थे सवाल
इससे पहले गोलाघाट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने जमानत देते समय कहा था कि वीडियो फुटेज से प्रदर्शनकारियों द्वारा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर सीधे हमले की पुष्टि नहीं होती।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों के बावजूद जांच अधिकारी ने किसी घातक हथियार को बरामद नहीं किया था।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद रिहाई का रास्ता साफ
गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा NSA के तहत हिरासत का आदेश रद्द किए जाने के बाद प्रणब डोले की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
यह फैसला निवारक हिरासत की प्रक्रिया, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है। काजीरंगा के आसपास विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के भूमि अधिकारों को लेकर जारी बहस के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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