36 घंटे नहीं, अब सिर्फ 3 घंटे में हटाना होगा AI से बना फर्जी फोटो-वीडियो, डीपफेक पर सरकार के नए नियम
केंद्र सरकार ने AI से तैयार किए गए फर्जी फोटो, वीडियो और डीपफेक कंटेंट पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी कर ली है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट की सूचना मिलने के बाद 36 घंटे के बजाय सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना पड़ सकता है। इस कदम का उद्देश्य गलत सूचना, साइबर अपराध और डिजिटल दुष्प्रचार पर लगाम लगाना है।
लेखक
Vinay Mishra
AI और डीपफेक पर सरकार की सख्ती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक फोटो और वीडियो का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी कर रही है।
प्रस्तावित बदलावों के अनुसार, यदि किसी प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार किया गया फर्जी फोटो, वीडियो या अन्य डीपफेक कंटेंट होने की शिकायत मिलती है, तो उसे 36 घंटे के बजाय सिर्फ 3 घंटे के भीतर हटाना पड़ सकता है।
क्या हैं नए प्रस्तावित नियम?
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों, सर्च इंजन और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक और AI-जनित भ्रामक सामग्री के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
नए नियमों के तहत संभावित प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं—
शिकायत मिलने के बाद 3 घंटे के भीतर डीपफेक कंटेंट हटाना।
AI से तैयार कंटेंट की तेजी से पहचान और मॉडरेशन की व्यवस्था करना।
फर्जी फोटो और वीडियो के प्रसार को रोकने के लिए मजबूत तकनीकी उपाय अपनाना।
नियमों का पालन न करने पर कंपनियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
हाल के वर्षों में डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर नेताओं, फिल्मी हस्तियों और आम लोगों के नकली वीडियो और तस्वीरें वायरल करने के कई मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कंटेंट से न केवल लोगों की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि चुनाव, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि AI तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग सुनिश्चित करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए नियमों को अपडेट करना आवश्यक है।
टेक कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
यदि नए नियम लागू होते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और AI आधारित पहचान तकनीकों को और मजबूत करना होगा। कंपनियों को शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए अतिरिक्त संसाधन भी लगाने पड़ सकते हैं।
अभी प्रस्तावित हैं नए नियम
फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई है। नियमों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन्हें कब से लागू किया जाएगा और किन-किन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ये अनिवार्य होंगे।
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