IAS पूजा सिंघल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मनी लॉन्ड्रिंग केस में ट्रायल रहेगा जारी
झारखंड कैडर की IAS अधिकारी पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि, सरकारी मंजूरी से जुड़े कानूनी सवाल को उचित चरण पर अन्य साक्ष्यों के साथ तय करने के लिए खुला रखा गया है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: झारखंड कैडर की IAS अधिकारी पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि मामले में कानूनी कार्यवाही फिलहाल जारी रहेगी।
पूजा सिंघल ने झारखंड हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया गया था, जिसके जरिए वह रांची की PMLA अदालत के 19 जुलाई 2022 के संज्ञान आदेश को रद्द कराने की मांग कर रही थीं। यह मामला कथित मनरेगा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि मामले में अपराध का संज्ञान काफी पहले ही लिया जा चुका है।
पूजा सिंघल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि तत्कालीन सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए CrPC की धारा 197 के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। उनका तर्क था कि कथित अपराध के समय पूजा सिंघल आधिकारिक हैसियत में काम कर रही थीं।
कोर्ट ने मंजूरी के सवाल पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस आधार पर कार्यवाही रोकने से इनकार किया। न्यायमूर्ति बागची ने सुनवाई के दौरान बरामदगी से जुड़े 19 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का उल्लेख किया।
पीठ ने कहा कि सरकारी मंजूरी का सवाल कानून और तथ्यों दोनों से जुड़ा है। अदालत ने इस मुद्दे को कार्यवाही के उचित चरण पर अन्य साक्ष्यों के साथ तय करने के लिए खुला रखा।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा आदेश को पूजा सिंघल के खिलाफ आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत ने केवल उनकी ओर से मांगी गई तत्काल राहत नहीं दी है और मंजूरी से जुड़ा कानूनी प्रश्न आगे विचार के लिए खुला रखा है।
क्या है पूजा सिंघल से जुड़ा मामला?
पूजा सिंघल 2000 बैच की झारखंड कैडर की IAS अधिकारी हैं। ED ने उन्हें मई 2022 में गिरफ्तार किया था। जांच कथित तौर पर खूंटी में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन से जुड़े करीब ₹18 करोड़ के कथित घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है।
ED की जांच के दौरान पूजा सिंघल से जुड़े मामले में उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकाने से करीब ₹19.76 करोड़ नकद बरामद होने की बात सामने आई थी। एजेंसी ने इस रकम को कथित अपराध से अर्जित आय से जोड़कर जांच की थी। ये एजेंसी के आरोप और जांच का हिस्सा हैं; इन्हें अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया जाना नहीं माना जा सकता।
पहले झारखंड हाई कोर्ट में भी मिली थी चुनौती
पूजा सिंघल ने 2024 में झारखंड हाई कोर्ट का रुख करते हुए PMLA अदालत के संज्ञान आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि व्यक्तिगत रूप से किए गए कथित अवैध कृत्यों के मामलों में CrPC की धारा 197 के तहत पूर्व मंजूरी आवश्यक नहीं मानी जा सकती। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
जमानत का क्या है स्टेटस?
पूजा सिंघल को लंबे समय तक जेल में रहने के बाद जमानत मिल चुकी है। उनकी जमानत का अर्थ मामले में बरी होना नहीं है और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी है।
2025 में झारखंड सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया था और बाद में उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग में सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ट्रायल कोर्ट के संज्ञान आदेश को रद्द नहीं किया है। इसलिए पूजा सिंघल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कार्यवाही जारी रहेगी।
वहीं, सरकारी मंजूरी से जुड़ा सवाल अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे उचित चरण पर अन्य साक्ष्यों के साथ तय करने के लिए खुला रखा है। आगे की कार्यवाही में अदालत इसी कानूनी मुद्दे के साथ मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों पर भी विचार कर सकती है।
महत्वपूर्ण: पूजा सिंघल के खिलाफ लगे मनी लॉन्ड्रिंग और कथित घोटाले से जुड़े आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश आरोपों पर दोषसिद्धि नहीं है।
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