टूटी हड्डियों के साथ 7,000 फीट की चढ़ाई, ईरान में 50 घंटे तक छिपा रहा अमेरिकी एयरमैन; ऐसे हुआ खतरनाक रेस्क्यू
ईरान में अमेरिकी F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमान गिराए जाने के बाद एक अमेरिकी एयरमैन ने करीब 50 घंटे तक दुश्मन के इलाके में छिपकर अपनी जान बचाई। विमान से बाहर निकलते समय उसे गंभीर चोटें आई थीं, जिनमें पीठ, हाथ और कंधे की हड्डियां टूटना शामिल था। इसके बावजूद वह पहाड़ी इलाके में आगे बढ़ता रहा और एक समय करीब 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी तक पहुंच गया। अमेरिकी सेना ने सीआईए और विशेष बलों की मदद से एक बेहद जोखिम भरे अभियान में उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
लेखक
Vinay Mishra
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ईरान में अमेरिकी एयरमैन की रोंगटे खड़े कर देने वाली सर्वाइवल कहानी
ईरान के पहाड़ी और दुर्गम इलाके में एक अमेरिकी सैन्यकर्मी ने जिस तरह लगभग दो दिन तक अपनी जान बचाई, वह किसी युद्ध फिल्म की कहानी से कम नहीं है। अमेरिकी F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमान को निशाना बनाए जाने के बाद विमान में सवार दो सैन्यकर्मियों ने इजेक्शन के जरिए बाहर निकलने की कोशिश की। इनमें से एक को कुछ ही घंटों में बचा लिया गया, लेकिन दूसरा एयरमैन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद लापता हो गया।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, यह एयरमैन करीब 50 घंटे तक ईरान के अंदर छिपा रहा। ईरानी सुरक्षा बल उसकी तलाश कर रहे थे और उसके पकड़े जाने का खतरा लगातार बना हुआ था। घायल हालत में भी उसने अपने सैन्य सर्वाइवल प्रशिक्षण का इस्तेमाल किया और पहाड़ों, चट्टानों तथा प्राकृतिक दरारों को छिपने के लिए इस्तेमाल किया।
F-15E Strike Eagle को कैसे बनाया गया निशाना?
रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2026 में अमेरिकी वायुसेना का F-15E Strike Eagle विमान ईरान में एक सैन्य अभियान के दौरान निशाना बनाया गया। विमान पर कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से हमला किए जाने की बात सामने आई है।
विमान में दो सैन्यकर्मी मौजूद थे। दोनों ने विमान से बाहर निकलने के लिए इजेक्शन किया। विमान के मुख्य पायलट को लगभग छह से सात घंटे के भीतर एक जोखिम भरे दिन के अभियान में सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि, विमान में मौजूद दूसरे सदस्य—जिसे अमेरिकी सैन्य शब्दावली में Weapons Systems Officer कहा जाता है—का तत्काल पता नहीं चल पाया।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कई रिपोर्टों में उसे आम भाषा में ‘पायलट’ कहा गया है, लेकिन उपलब्ध विवरण के अनुसार वह विमान का मुख्य चालक नहीं, बल्कि हथियार और मिशन सिस्टम संभालने वाला अधिकारी था।
पैराशूट में आई खराबी, तेज रफ्तार से जमीन की ओर गिरा
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, विमान से बाहर निकलते समय स्थिति बेहद भयावह थी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसके पैराशूट में समस्या आ गई थी और वह बहुत तेज गति से जमीन की ओर गिरा। इस दौरान उसे गंभीर चोटें आईं।
उसकी पीठ, हाथ और कंधे में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद वह होश में रहा और जमीन पर पहुंचने के बाद अपनी स्थिति को समझने की कोशिश की। उसे यह भी पता था कि अगर वह खुले इलाके में रहा तो ईरानी सुरक्षा बलों या स्थानीय खोजी दलों की नजर में आ सकता है।
इस स्थिति में उसने तत्काल मदद का इंतजार करने के बजाय खुद को छिपाने और लगातार अपनी जगह बदलने का फैसला किया।
7,000 फीट ऊंची पहाड़ी तक पहुंचा
घायल होने के बावजूद अमेरिकी एयरमैन ने ईरान के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में आगे बढ़ना जारी रखा। रिपोर्टों के अनुसार, वह एक चट्टानी दरार में छिपा और बाद में करीब 7,000 फीट यानी लगभग 2,100 मीटर की ऊंचाई वाली पहाड़ी की रिजलाइन तक पहुंच गया।
इस ऊंचाई पर पहुंचने के पीछे दो प्रमुख कारण बताए गए हैं:
दुश्मन की नजर से बचने के लिए ऊंचे और कठिन इलाके का इस्तेमाल करना।
आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बेहतर दृश्यता हासिल करना।
पहाड़ी क्षेत्र उसके लिए एक साथ सुरक्षा और खतरा दोनों बन गया था। चट्टानों और दरारों ने उसे छिपने में मदद की, लेकिन गंभीर चोटों के साथ इतनी ऊंचाई तक पहुंचना बेहद कठिन था।
सिर्फ सीमित सामान और सर्वाइवल ट्रेनिंग का सहारा
रिपोर्टों के मुताबिक, एयरमैन के पास सीमित संसाधन थे। उसके पास एक पिस्तौल, कम्युनिकेशन डिवाइस और ट्रैकिंग बीकन होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन उपकरणों का इस्तेमाल कब और किस सीमा तक किया जा सका, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका सैन्य प्रशिक्षण था। अमेरिकी सेना में सैनिकों को SERE यानी Survival, Evasion, Resistance and Escape जैसी परिस्थितियों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सैनिकों को दुश्मन के इलाके में फंसने की स्थिति में जीवित रहने, छिपने, पीछा करने वालों से बचने और सुरक्षित संपर्क स्थापित करने में सक्षम बनाना है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एयरमैन ने इसी प्रशिक्षण के तहत:
खुले और आसानी से दिखाई देने वाले स्थानों से बचने की कोशिश की।
प्राकृतिक चट्टानों और दरारों में छिपकर समय बिताया।
जरूरत के अनुसार अपनी स्थिति बदली।
ऊंचे इलाके का इस्तेमाल निगरानी और सुरक्षा के लिए किया।
बचाव दल के पहुंचने तक खुद को दुश्मन की नजर से दूर रखा।
ईरानी बल लगातार कर रहे थे तलाश
इस घटना के बाद ईरानी सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों की मदद से अमेरिकी एयरमैन की तलाश शुरू हो गई थी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसे पकड़ने के लिए इनाम की घोषणा भी की गई थी।
इससे खतरा और बढ़ गया था, क्योंकि सैन्यकर्मी केवल सरकारी बलों से ही नहीं, बल्कि स्थानीय खोजी समूहों से भी बच रहा था। वह घायल था, उसके पास सीमित सामान था और उसे यह भी निश्चित रूप से पता नहीं था कि अमेरिकी सेना उसकी सही लोकेशन तक पहुंच पाई है या नहीं।
अमेरिकी सेना की ओर से बड़े पैमाने पर निगरानी अभियान चलाया गया। ड्रोन, निगरानी विमान और अन्य सैन्य संसाधनों के जरिए इलाके की छानबीन की गई। लेकिन पहाड़ी भूगोल, संचार की सीमाएं और ईरानी बलों की गतिविधियों के कारण अभियान आसान नहीं था।
सीआईए की मदद से पता चली लोकेशन
रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने भी इस रेस्क्यू अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी ने ईरानी पक्ष को भ्रमित करने के लिए एक रणनीतिक अभियान चलाया, ताकि अमेरिकी सैन्य दलों को एयरमैन की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और बचाव की तैयारी करने का समय मिल सके।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, एयरमैन की लोकेशन का पता लगाना अभियान का सबसे कठिन हिस्सा था। वह लगातार अपनी जगह बदल रहा था और पहाड़ी इलाके में छिपा हुआ था। उसकी स्थिति की पुष्टि होने के बाद विशेष बलों को उसे निकालने की योजना तैयार करनी पड़ी।
90 से ज्यादा सैनिकों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
इस एयरमैन को बचाने के लिए अमेरिका ने बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चलाया। रिपोर्टों के मुताबिक, ऑपरेशन में 90 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक और कई सैन्य विमान शामिल थे।
इस अभियान में हेलीकॉप्टर, निगरानी विमान, ड्रोन और विशेष बलों का इस्तेमाल किया गया। रेस्क्यू टीम को न केवल घायल एयरमैन तक पहुंचना था, बल्कि ईरानी सुरक्षा बलों से बचते हुए पूरे दल को वापस भी लाना था।
ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी विमानों पर गोलीबारी और तकनीकी परेशानियों जैसी चुनौतियां भी सामने आईं। कुछ परिवहन विमानों में तकनीकी खराबी आने के कारण बचाव दल की वापसी योजना को बदलना पड़ा। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि संवेदनशील सैन्य उपकरणों को दुश्मन के हाथ लगने से बचाने के लिए कुछ विमानों को नष्ट करना पड़ा।
अंधेरे की आड़ में निकाला गया घायल एयरमैन
अमेरिकी सेना ने आखिरकार घायल एयरमैन को ईरान के पहाड़ी इलाके से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह अभियान दिन के बजाय अंधेरे की आड़ में चलाया गया, ताकि दुश्मन की नजर से बचने की संभावना बढ़ सके।
रेस्क्यू के दौरान विशेष बलों को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी। घायल सैन्यकर्मी की स्थिति, पहाड़ी भूगोल और ईरानी बलों की मौजूदगी को देखते हुए छोटी-सी गलती भी पूरे अभियान को विफल कर सकती थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने इस मिशन को हाल के सबसे जोखिम भरे सैन्य बचाव अभियानों में से एक बताया। इस ऑपरेशन का उद्देश्य केवल एक सैनिक को बचाना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि अमेरिकी सेना अपने कर्मियों को दुश्मन के इलाके में पीछे नहीं छोड़ती।
50 घंटे की जद्दोजहद के बाद मिली सुरक्षित वापसी
लगभग 50 घंटे तक घायल हालत में ईरान के अंदर छिपे रहने के बाद एयरमैन को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उसने इस दौरान दर्द, भूख, थकान, डर और लगातार पकड़े जाने के खतरे का सामना किया।
उसकी कहानी में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं:
गंभीर चोटों के बावजूद मानसिक नियंत्रण बनाए रखना।
सैन्य सर्वाइवल ट्रेनिंग का सही समय पर इस्तेमाल करना।
अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों का व्यापक समन्वित रेस्क्यू अभियान।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि आधुनिक युद्ध में किसी सैन्यकर्मी को बचाना केवल हेलीकॉप्टर भेजने तक सीमित नहीं होता। इसमें खुफिया जानकारी, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, हवाई सुरक्षा, विशेष बलों की रणनीति और जमीन की भौगोलिक समझ—सभी की भूमिका होती है।
युद्ध क्षेत्र में ‘किसी को पीछे न छोड़ने’ की नीति
अमेरिकी सेना लंबे समय से अपने सैन्यकर्मियों को सुरक्षित वापस लाने की नीति पर जोर देती रही है। ईरान में चलाया गया यह अभियान इसी नीति का एक उदाहरण बताया जा रहा है।
हालांकि, ऐसे ऑपरेशन बेहद महंगे और जोखिम भरे होते हैं। इसमें शामिल सैनिकों को दुश्मन के इलाके में प्रवेश करना पड़ता है, जबकि उनके पास स्थानीय समर्थन या सुरक्षित रास्ते की गारंटी नहीं होती। इसके बावजूद किसी घायल या लापता सैन्यकर्मी को वापस लाने के लिए बड़े स्तर पर संसाधन लगाए जाते हैं।
निष्कर्ष
ईरान में अमेरिकी F-15E Strike Eagle विमान गिराए जाने के बाद एक घायल अमेरिकी एयरमैन का करीब 50 घंटे तक जीवित रहना और 7,000 फीट ऊंचे पहाड़ी इलाके में छिपे रहना बेहद असाधारण घटना है। टूटी हड्डियों, सीमित संसाधनों और दुश्मन की तलाश के बीच उसने अपने प्रशिक्षण और धैर्य के दम पर खुद को बचाए रखा।
इसके बाद अमेरिकी सेना, खुफिया एजेंसियों और विशेष बलों ने एक जटिल अभियान चलाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला। यह घटना सैन्य सर्वाइवल ट्रेनिंग, मानसिक मजबूती और आधुनिक रेस्क्यू ऑपरेशन की कठिनाइयों को सामने लाती है।
महत्वपूर्ण नोट: इस घटना से जुड़े कई विवरण अमेरिकी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। अभियान की पूरी तकनीकी जानकारी और कुछ परिचालन विवरण सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
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