ईरान की चेतावनी, नए प्रतिबंध लगे तो होर्मुज से एक बूंद तेल नहीं निकलने देंगे
अमेरिका की ओर से ईरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी के बीच तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा है कि अगर अमेरिका का आर्थिक दबाव जारी रहता है तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के निर्यात को पूरी तरह रोक सकता है। इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से वैश्विक तेल और LNG की बड़ी मात्रा गुजरती रही है।
लेखक
Vinay Mishra
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब आर्थिक मोर्चे से निकलकर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है। अमेरिका द्वारा तेहरान पर नए और कड़े प्रतिबंधों की घोषणा के बाद ईरान ने पलटवार की धमकी दी है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर वॉशिंगटन का आर्थिक दबाव बढ़ा तो होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का निर्यात पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
ईरान की यह धमकी ऐसे समय आई है जब होर्मुज में पहले ही जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित है। ईरान ने 45 टैंकरों को कथित तौर पर अपने नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में ब्लैकलिस्ट भी किया है और उनके साथ कार्गो ट्रांसफर करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
नए अमेरिकी प्रतिबंधों से भड़का ईरान
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान की घोषणा की। अमेरिका का लक्ष्य तेहरान के राजस्व स्रोतों को कमजोर करना और उसके आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। नई कार्रवाई में करीब 60 ईरान से जुड़े व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी दबाव के जवाब में ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह केवल कूटनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहेगा। ईरानी अधिकारियों ने उन देशों के खिलाफ भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है जो अमेरिकी प्रतिबंधों में सहयोग करेंगे।
'होर्मुज से एक बूंद तेल नहीं निकलेगा'
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका आर्थिक युद्ध जारी रखता है तो ईरान होर्मुज और फारस की खाड़ी के रास्ते तेल के निर्यात को रोकने की क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है। Reuters के अनुसार, रेजाई ने सभी तेल निर्यात रोकने की धमकी दी है।
यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले इस संकरे समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल और LNG व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था।
पहले से ही लगभग ठप है जहाजों की आवाजाही
होर्मुज में स्थिति पहले ही सामान्य नहीं है। हाल के महीनों में हमलों, प्रतिबंधों और ईरानी नियमों के कारण समुद्री यातायात में भारी गिरावट आई है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग ठहराव की स्थिति तक पहुंच गई थी। इससे तेल की आपूर्ति, शिपिंग लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है।
ईरान ने हाल ही में 45 टैंकरों को ब्लैकलिस्ट करते हुए चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर जुर्माना, हिरासत या उनके कार्गो को जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
अमेरिका का 'इकोनॉमिक D-Day'
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंधों को बेहद कठोर कार्रवाई के तौर पर पेश किया है। बेसेंट ने इसे ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े वित्तीय अभियानों में से एक बताया है।
अमेरिका की कोशिश ईरान के तेल कारोबार, वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को और ज्यादा मुश्किल बनाने की है। इसके तहत उन देशों और कंपनियों पर भी सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी गई है जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं।
चीन पर भी नजर
इस पूरे विवाद में चीन की भूमिका बेहद अहम है। चीन लंबे समय से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीनी स्वतंत्र रिफाइनर ईरान से तेल खरीदते रहे हैं।
अमेरिकी सेकेंडरी प्रतिबंधों की धमकी से अब चीन के ईरान के साथ तेल कारोबार पर भी दबाव बढ़ सकता है। बीजिंग ने हालांकि अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया है और कहा है कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
होर्मुज बंद हुआ तो दुनिया पर क्या असर?
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की स्थिति में सबसे बड़ा खतरा वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ेगा।
इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है—
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
एशियाई देशों के लिए ऊर्जा आयात महंगा हो सकता है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
LNG की आपूर्ति प्रभावित होने से गैस की कीमत बढ़ सकती है।
समुद्री बीमा और शिपिंग लागत बढ़ सकती है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
हालांकि बाजार की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि रुकावट कितनी लंबी और कितनी व्यापक होती है।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में फारस की खाड़ी में लंबे समय तक तनाव रहने पर भारतीय रिफाइनरियों और तेल आयातकों की लागत प्रभावित हो सकती है।
अगर होर्मुज से तेल की आवाजाही लंबे समय तक बाधित होती है तो वैश्विक बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत और महंगाई पर पड़ सकता है।
हालांकि भारत समेत कई देश ऐसी स्थिति में वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों और रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ईरान पहले भी होर्मुज को लेकर दे चुका है चेतावनी
यह पहली बार नहीं है जब तेहरान ने होर्मुज को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है। अगस्त में भी ईरान ने कहा था कि जब तक अमेरिका कुछ प्रमुख शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य को खोलने की स्थिति नहीं बनेगी।
ईरान की मांगों में अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी समाप्त करना, जमे हुए ईरानी assets को रिलीज करना और सैन्य कार्रवाई रोकना शामिल है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक दबाव और जवाबी कार्रवाई का यह सिलसिला कितना आगे जाता है।
अगर दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटते हैं तो होर्मुज में तनाव कम हो सकता है। लेकिन यदि अमेरिका प्रतिबंधों को और कड़ा करता है और ईरान अपनी धमकी को अमल में लाता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा।
होर्मुज में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
एक नजर में पूरा मामला
मुद्दाजानकारीविवादअमेरिका-ईरान आर्थिक टकरावअमेरिकी कदमनए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधईरान की प्रतिक्रियाजवाबी कार्रवाई की धमकीमुख्य धमकीहोर्मुज से तेल निर्यात रोकने की चेतावनीरणनीतिक मार्गStrait of Hormuzवैश्विक महत्वयुद्ध से पहले करीब 1/5 वैश्विक तेल और LNG व्यापार का मार्गटैंकरों पर कार्रवाई45 जहाज ब्लैकलिस्टभारत पर संभावित असरतेल कीमत, आयात बिल और महंगाई पर दबाव
निष्कर्ष: अमेरिका के नए प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। तेहरान की धमकी है कि आर्थिक दबाव बढ़ने पर वह तेल के निर्यात को रोक सकता है। होर्मुज पहले ही तनाव और कम समुद्री यातायात से जूझ रहा है। अगर यहां से तेल की आवाजाही पूरी तरह रुकती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका लग सकता है और भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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