ओडिशा की सख्ती के बावजूद आंध्र प्रदेश में वोट डालने पहुंचे 800 से ज्यादा लोग, जानिए क्या है कोटिया विवाद
ओडिशा सरकार की कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कोटिया विवादित क्षेत्र के 800 से अधिक मतदाता गुरुवार को आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान करने पहुंचे। इनमें से कई मतदाताओं ने आशंका जताई कि यदि वे आंध्र प्रदेश के चुनाव में हिस्सा नहीं लेते, तो उनका नाम वहां की कल्याणकारी योजनाओं से हटाया जा सकता है। इस क्षेत्र को लेकर दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक तनाव जारी है।
लेखक
Jyoti Mukherjee

ओडिशा की सख्ती के बावजूद आंध्र प्रदेश में वोट डालने पहुंचे 800 से ज्यादा लोग, जानिए क्या है कोटिया विवाद
भुवनेश्वर, 5 नवंबर 2026: ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से विवाद का विषय बने कोटिया क्षेत्र में गुरुवार को स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान एक बार फिर दोनों राज्यों के बीच तनाव देखने को मिला। ओडिशा सरकार की कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद 800 से अधिक मतदाता सीमा पार कर आंध्र प्रदेश पहुंचे और वहां ग्रामीण निकाय चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
ओडिशा सरकार ने आंध्र प्रदेश के अधिकारियों को विवादित क्षेत्र में मतदान केंद्र स्थापित करने से रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का आंध्र प्रदेश में मतदान करना इस सीमा विवाद को फिर चर्चा में ले आया है।
800 से अधिक मतदाताओं ने आंध्र प्रदेश में किया मतदान
रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा सरकार की निगरानी के बावजूद कोटिया क्षेत्र के 800 से ज्यादा मतदाता गुरुवार को सीमा पार करके आंध्र प्रदेश पहुंचे।
इन लोगों ने पड़ोसी राज्य में आयोजित ग्रामीण निकाय चुनावों में मतदान किया। यह चुनाव मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (MPTC) और जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (ZPTC) के लिए आयोजित किए गए थे।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट हुआ कि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और निगरानी बढ़ाए जाने के बावजूद मतदान में हिस्सा लेने वाले लोगों को पूरी तरह रोका नहीं जा सका।
कल्याणकारी योजनाओं से नाम हटने की आशंका
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात मतदाताओं की ओर से बताई गई वजह है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मतदान करने पहुंचे अधिकांश लोगों ने कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के चुनाव में इसलिए हिस्सा लिया क्योंकि उन्हें डर था कि ऐसा नहीं करने पर वहां के अधिकारी उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से बाहर कर सकते हैं।
इस आशंका के कारण कई लोगों ने सीमा पार करके मतदान प्रक्रिया में भाग लिया।
यह स्थिति दिखाती है कि कोटिया जैसे विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकार और सरकारी योजनाओं से जुड़े सवाल स्थानीय निवासियों के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, मतदाताओं की इस आशंका के आधार पर किसी सरकारी योजना से नाम हटाए जाने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है।
ओडिशा सरकार ने की थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
आंध्र प्रदेश के अधिकारियों को कोटिया क्षेत्र में प्रवेश करने और वहां मतदान केंद्र स्थापित करने से रोकने के लिए ओडिशा सरकार ने व्यापक इंतजाम किए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने 15 से अधिक प्लाटून पुलिस बल तैनात किए थे। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों और कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को भी क्षेत्र में भेजा गया था।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आंध्र प्रदेश के अधिकारी विवादित क्षेत्र में प्रवेश करके स्थानीय निकाय चुनाव आयोजित न कर सकें।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाताओं के आंध्र प्रदेश पहुंचने से प्रशासन की कोशिशों के परिणाम को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
कोटिया में क्यों बढ़ा दोनों राज्यों के बीच तनाव?
कोटिया क्षेत्र ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित एक विवादित इलाका है। इस क्षेत्र को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से प्रशासनिक और राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब आंध्र प्रदेश सरकार ने कोटिया में मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (MPTC) और जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (ZPTC) के चुनाव कराने की तारीखों की घोषणा की।
इसके बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच क्षेत्र में प्रवेश, प्रशासनिक अधिकार और चुनावी गतिविधियों को लेकर टकराव की स्थिति बनी।
ओडिशा सरकार ने आंध्र प्रदेश की चुनावी गतिविधियों का विरोध करते हुए क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा बढ़ा दी थी।
स्थानीय लोगों के सामने प्रशासनिक दुविधा
कोटिया का मामला केवल दो राज्यों के बीच सीमा विवाद तक सीमित नहीं है। यहां रहने वाले लोगों के सामने सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक पहचान और स्थानीय चुनावों से जुड़े कई सवाल भी हैं।
मतदाताओं की ओर से बताई गई कल्याणकारी योजनाओं से नाम हटने की आशंका इस बात को सामने लाती है कि सीमा विवाद का असर स्थानीय निवासियों के रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ सकता है।
एक तरफ ओडिशा सरकार क्षेत्र में अपनी प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ स्थानीय मतदाता आंध्र प्रदेश की चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने पहुंचे।
कोटिया विवाद पर आगे भी बनी रहेगी नजर
गुरुवार का मतदान घटनाक्रम ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया क्षेत्र को लेकर जारी विवाद का एक नया अध्याय है।
ओडिशा सरकार ने 15 से अधिक प्लाटून पुलिस बल, वरिष्ठ अधिकारियों और कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की तैनाती की थी। इसके बावजूद 800 से अधिक लोगों का आंध्र प्रदेश में मतदान करना इस मुद्दे की जटिलता को सामने लाता है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में दोनों राज्यों के बीच विवाद के समाधान या आगे की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
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