मोबाइल और स्क्रीन टाइम से बढ़ रही आंखों की बीमारी, हेल्थ एक्सपर्ट्स की चेतावनी वायरल
देशभर में मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल अब लोगों की आंखों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में दर्द, सूखापन, धुंधलापन और कमजोर नजर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चों से लेकर ऑफिस कर्मचारियों तक, हर उम्र के लोग डिजिटल आई स्ट्रेन की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों ने समय रहते सावधानी बरतने की सलाह दी है।
लेखक
Vinay Mishra

मोबाइल और स्क्रीन टाइम से बढ़ रही आंखों की बीमारी, हेल्थ एक्सपर्ट्स की चेतावनी वायरल
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन लोगों की जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक लोग घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं। लेकिन अब यही आदत लोगों की आंखों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। देशभर के हेल्थ एक्सपर्ट्स और आंखों के डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों की गंभीर बीमारियों को तेजी से बढ़ा रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट का लगातार इस्तेमाल “डिजिटल आई स्ट्रेन” नाम की समस्या को जन्म दे रहा है। इसके कारण आंखों में जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखना, आंखों का सूखना और कम उम्र में चश्मा लगने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
डिजिटल स्क्रीन बना आंखों का नया दुश्मन
पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम और सोशल मीडिया की बढ़ती लत ने लोगों का स्क्रीन टाइम कई गुना बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जहां लोग दिन में 1 से 2 घंटे स्क्रीन देखते थे, वहीं अब औसतन 7 से 10 घंटे तक मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिता रहे हैं।
सबसे चिंता की बात यह है कि छोटे बच्चे भी कम उम्र में मोबाइल की लत का शिकार हो रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों में आंखों की कमजोरी और चश्मे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
डॉक्टरों ने बताई सबसे बड़ी वजह
आंखों के विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों पर सबसे ज्यादा असर डालती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और आंखें जल्दी थकने लगती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार प्रमुख समस्याएं:
आंखों में सूखापन
लगातार पानी आना
धुंधला दिखाई देना
सिरदर्द और माइग्रेन
नींद की समस्या
आंखों में जलन और लालपन
बच्चों में नजर कमजोर होना
विशेषज्ञों का कहना है कि रात में अंधेरे में मोबाइल चलाने की आदत स्थिति को और गंभीर बना रही है।
बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों की आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं। लंबे समय तक मोबाइल गेम्स, वीडियो और सोशल मीडिया देखने से उनकी आंखों की रोशनी पर असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों ने दी यह चेतावनी:
5 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें
ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान हर 20 मिनट में ब्रेक जरूरी
बच्चों के लिए आउटडोर एक्टिविटी बढ़ाना जरूरी
सोने से पहले मोबाइल इस्तेमाल बिल्कुल न करें
डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में बढ़ता स्क्रीन टाइम भविष्य में गंभीर आंखों की बीमारी का कारण बन सकता है।
ऑफिस कर्मचारियों में भी तेजी से बढ़ रही समस्या
आईटी सेक्टर और कॉर्पोरेट कर्मचारियों में भी डिजिटल आई स्ट्रेन तेजी से बढ़ रहा है। कई कर्मचारी लगातार 8 से 12 घंटे तक लैपटॉप स्क्रीन पर काम करते हैं।
इसके कारण क्या हो रहा है?
आंखों में लगातार दर्द
फोकस करने में दिक्कत
गर्दन और सिर में दर्द
नींद की गुणवत्ता खराब होना
मानसिक थकान
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले वर्षों में आंखों से जुड़ी बीमारियां और तेजी से बढ़ सकती हैं।
आंखों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
डॉक्टरों ने कुछ जरूरी उपाय बताए हैं जिनका पालन करके आंखों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
अपनाएं 20-20-20 नियम
हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
स्क्रीन ब्राइटनेस कम रखें
मोबाइल और लैपटॉप की ब्राइटनेस जरूरत के अनुसार रखें।
ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें
नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर आंखों पर दबाव कम करता है।
पर्याप्त नींद लें
कम नींद आंखों की थकान को और बढ़ा देती है।
नियमित आंखों की जांच करवाएं
अगर आंखों में दर्द या धुंधलापन महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई डॉक्टरों की चेतावनी
हाल के दिनों में कई डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें लोग स्क्रीन टाइम कम करने और आंखों को सुरक्षित रखने की सलाह दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लाइफस्टाइल पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं है, लेकिन सही आदतें अपनाकर इसके नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।
क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स?
हेल्थ विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में डिजिटल हेल्थ सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है। अगर लोग अभी से सतर्क नहीं हुए तो आंखों की समस्याएं महामारी जैसी स्थिति पैदा कर सकती हैं।
डॉक्टरों ने खास तौर पर माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखने की सलाह दी है। साथ ही ऑफिस कर्मचारियों को लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में आंखों को आराम देने की जरूरत बताई गई है।
निष्कर्ष
मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन आज लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इनका अत्यधिक इस्तेमाल आंखों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों, युवाओं और कामकाजी लोगों सभी की आंखों पर बुरा असर डाल रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की चेतावनी साफ है कि अगर अभी से सावधानी नहीं बरती गई तो भविष्य में आंखों की बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में डिजिटल लाइफ और आंखों की सेहत के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी हो गया है।
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