बिना पति को बताए मुमताज बेगम को बांग्लादेश भेजा, गौहाटी HC सख्त; MEA को महिला को ढूंढकर भारत लाने का आदेश
गौहाटी हाईकोर्ट ने मुमताज बेगम को उनके पति या किसी वयस्क परिजन को सूचना दिए बिना बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में असम सरकार को ₹2 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने विदेश मंत्रालय (MEA) को मामले में शामिल करते हुए मुमताज बेगम को बांग्लादेश में तलाशकर भारत वापस लाने के प्रयास करने का निर्देश दिया, ताकि वह Foreigners Tribunal के आदेश को चुनौती देने का कानूनी अवसर पा सकें।
लेखक
Vinay Mishra
गुवाहाटी: असम की मुमताज बेगम को विदेशी घोषित किए जाने के बाद जिस तरह बांग्लादेश भेजा गया, उस पर गौहाटी हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि महिला को हिरासत में लिए जाने और देश से बाहर भेजे जाने की जानकारी उनके पति या परिवार के किसी वयस्क सदस्य को नहीं दी गई। कोर्ट ने अब विदेश मंत्रालय (MEA) को मामले में शामिल करते हुए मुमताज बेगम को बांग्लादेश में तलाशने और उन्हें भारत वापस लाने के प्रयास करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मुमताज बेगम के खिलाफ Foreigners Tribunal, 4th Nagaon at Juria में विदेशी होने का मामला चल रहा था। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, Tribunal ने 2019 में उनके खिलाफ विदेशी होने की राय दी थी। बाद में उन्होंने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में पुराने Tribunal opinion को हटाकर मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 30 मई 2026 को Tribunal ने फिर से उन्हें विदेशी घोषित कर दिया।
Tribunal पहुंचीं तो पुलिस ने हिरासत में ले लिया
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, मुमताज बेगम 30 मई को Tribunal के सामने पेश हुई थीं। इसके बाद करीब दोपहर 1 बजे पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्हें पहले Juria Police Station, फिर Nagaon और बाद में Matia detention/holding area ले जाया गया।
मामले की गंभीर बात यह रही कि उनके पति मुज़म्मेल हक या परिवार के किसी वयस्क सदस्य को उनकी हिरासत और आगे की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित नहीं किया गया।
बाद में उन्हें BSF को सौंपा गया और 14 जून 2026 को असम के श्रीभूमि जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए बांग्लादेश भेज दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा- कानूनी उपाय का मौका ही नहीं मिला
हाईकोर्ट ने कहा कि मुमताज बेगम को Tribunal के उस फैसले की Certified Copy समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके जरिए उन्हें विदेशी घोषित किया गया था।
अदालत ने इस देरी को गंभीरता से लिया और कहा कि परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि Certified Copy जारी करने में “malice in law” का तत्व मौजूद था। कोर्ट के अनुसार, इस वजह से महिला को फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए उपलब्ध कानूनी उपाय का इस्तेमाल करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
MEA को महिला को ढूंढकर भारत लाने का निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने Ministry of External Affairs (MEA) को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।
अदालत चाहती है कि संबंधित अधिकारी बांग्लादेश में मुमताज बेगम को locate करने और उन्हें भारत वापस लाने का प्रयास करें, ताकि वह Foreigners Tribunal के फैसले के खिलाफ अपना कानूनी उपाय इस्तेमाल कर सकें।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत ने उन्हें भारत की नागरिक घोषित नहीं किया है। मुद्दा मुख्य रूप से यह है कि विदेशी घोषित किए जाने के बाद भी उन्हें फैसले की जानकारी और उसे चुनौती देने का उचित अवसर मिला या नहीं।
असम सरकार को ₹2 लाख मुआवजा
हाईकोर्ट ने मुमताज बेगम के पति मुज़म्मेल हक को ₹2 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश असम सरकार को दिया है।
यह रकम 60 दिनों के भीतर देने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि यह अंतरिम मुआवजा भविष्य में सिविल कोर्ट के सामने अतिरिक्त मुआवजे का दावा करने के उनके अधिकार को खत्म नहीं करता।
अब ऐसे मामलों में परिवार को सूचना देना जरूरी
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि किसी व्यक्ति को Foreigners Tribunal द्वारा विदेशी घोषित किए जाने के बाद उसे हिरासत में लेने से पहले Tribunal के opinion की मुफ्त प्रति उपलब्ध कराई जाए।
यदि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को जिले के बाहर ले जाया जाता है, तो उसके परिवार के किसी वयस्क सदस्य को भी इसकी जानकारी देने की जरूरत पर कोर्ट ने जोर दिया है।
Tribunal के रिकॉर्ड की भी जांच के आदेश
अदालत ने यह पता लगाने के लिए भी जांच का निर्देश दिया है कि 30 मई का Tribunal opinion वास्तव में कब तैयार हुआ था।
जरूरत पड़ने पर Tribunal के कंप्यूटर को जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराने की संभावना भी आदेश में रखी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फैसला कब तैयार हुआ और Certified Copy जारी करने में इतनी देरी क्यों हुई।
अगली सुनवाई 24 सितंबर को
मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी। तब तक अधिकारियों को मुमताज बेगम को बांग्लादेश में तलाशने और उन्हें भारत वापस लाने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी।
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