कराची से इस्लामाबाद तक अंधेरे में डूबे पाकिस्तान के कई शहर, लंबे पावर कट से लोगों में गुस्सा
पाकिस्तान में बिजली संकट एक बार फिर गंभीर होता दिख रहा है। कराची के कई इलाकों में लंबे और बिना सूचना वाले पावर कट के खिलाफ लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, देश के बिजली क्षेत्र में ईंधन की कमी, उत्पादन और मांग के बीच बड़ा अंतर तथा वितरण संबंधी समस्याएं लगातार दबाव बढ़ा रही हैं। हालांकि, 12-12 घंटे बिजली कटौती पूरे पाकिस्तान में होने की पुष्टि नहीं हुई है; अलग-अलग इलाकों में कटौती की अवधि अलग रही है।
लेखक
Vinay Mishra
Pakistan Power Crisis: कराची से इस्लामाबाद तक बिजली संकट, लंबे पावर कट से परेशान लोग
इस्लामाबाद/कराची: पाकिस्तान में बिजली संकट एक बार फिर आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। खास तौर पर कराची में लंबे और बिना सूचना वाले पावर कट से नाराज लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं और टायर जलाकर बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की।
कराची के Pak Colony, Liaquatabad, Gharibabad, Nishtar Road, Bhimpura और Ranchore Line जैसे इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए। इससे शहर के कई हिस्सों में यातायात भी प्रभावित हुआ।
कराची में लोगों का फूटा गुस्सा
बिजली की लंबी कटौती से परेशान कराची के लोगों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में बिना पूर्व सूचना के घंटों बिजली गुल रहती है।
बिजली कटौती के कारण घरों के साथ-साथ कारोबार और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। गर्मी के मौसम में लंबे पावर कट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
पाकिस्तान की बिजली नियामक संस्था NEPRA भी कराची में लंबे पावर कट को लेकर K-Electric से स्पष्टीकरण मांग चुकी है। जून 2026 में नियामक ने कंपनी से उन इलाकों और परिस्थितियों की जानकारी मांगी थी जहां निर्धारित अवधि से अधिक लोडशेडिंग की शिकायतें सामने आई थीं।
12 घंटे कटौती का दावा कितना सही?
पाकिस्तान में कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती कई घंटे तक पहुंचने की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि, पूरे देश में लगातार 12 घंटे बिजली कटौती होने का दावा उपलब्ध ताजा रिपोर्टों से सार्वभौमिक रूप से स्थापित नहीं होता।
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान सरकार ने ईंधन संबंधी दबाव के बीच रोजाना करीब 2.25 घंटे की निर्धारित लोडशेडिंग की घोषणा की थी। सरकार ने इसे महंगे ईंधन की खपत और बिजली टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी को नियंत्रित करने की रणनीति बताया था।
लेकिन कई इलाकों में स्थानीय वितरण समस्याओं और बिजली की कमी के कारण वास्तविक कटौती इससे ज्यादा होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
बिजली की मांग और उत्पादन में बड़ा अंतर
पाकिस्तान के पावर सेक्टर पर सबसे बड़ा दबाव मांग और उपलब्ध उत्पादन के बीच अंतर का है। अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट में बिजली की मांग करीब 22,000 मेगावाट और उत्पादन लगभग 15,400 मेगावाट बताया गया था। यानी करीब 6,500 मेगावाट का अंतर सामने आया था।
इस तरह का अंतर बिजली वितरण कंपनियों को अलग-अलग क्षेत्रों में लोडशेडिंग करने के लिए मजबूर कर सकता है।
ईंधन संकट ने बढ़ाई परेशानी
पाकिस्तान की बिजली व्यवस्था ईंधन आपूर्ति की स्थिति से भी प्रभावित होती है। अप्रैल में सरकार ने बताया था कि LNG आपूर्ति में व्यवधान और पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण बिजली उत्पादन पर दबाव पड़ा। उस समय बिजली की मांग में अचानक वृद्धि ने स्थिति को और मुश्किल बनाया था।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि बिजली की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त उत्पादन बनाए रखा जाए, लेकिन महंगे ईंधन की वजह से बिजली उत्पादन की लागत भी तेजी से न बढ़े।
इस्लामाबाद में भी कटौती का असर
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद भी बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं से पूरी तरह अछूती नहीं है। Islamabad Electric Supply Company (IESCO) समय-समय पर रखरखाव और अन्य कारणों से राजधानी तथा आसपास के इलाकों के लिए निर्धारित बिजली बंदी की घोषणाएं करती रही है।
हालांकि, कराची की तरह इस्लामाबाद में मौजूदा स्थिति को देशव्यापी 12 घंटे के पावर कट के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
पाकिस्तान के पावर सेक्टर पर कर्ज का बोझ
बिजली संकट के पीछे सिर्फ उत्पादन की कमी ही जिम्मेदार नहीं है। पाकिस्तान का पावर सेक्टर लंबे समय से सर्कुलर डेट, बिजली चोरी, वितरण नुकसान और कमजोर बिल रिकवरी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
मई 2026 में सरकार ने बताया था कि पावर सेक्टर का सर्कुलर डेट 2025 के मध्य तक 2.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा था। सरकार IMF कार्यक्रम के तहत बिजली क्षेत्र में सुधारों पर भी काम कर रही है।
बिजली संकट का असर कारोबार पर भी
लंबे पावर कट का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहता। दुकानों, छोटे कारोबार, कारखानों और सेवा क्षेत्र को भी बिजली की अनिश्चित आपूर्ति से नुकसान उठाना पड़ता है।
कराची जैसे बड़े औद्योगिक और कारोबारी शहर में लंबे पावर कट का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। बिजली संकट के कारण जनरेटर और वैकल्पिक ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ने से कारोबार की लागत भी बढ़ती है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
पाकिस्तान सरकार के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं—एक तरफ बिजली की बढ़ती मांग पूरी करना और दूसरी तरफ बिजली क्षेत्र की बढ़ती लागत तथा कर्ज को नियंत्रित करना।
अगर उत्पादन बढ़ाया जाता है तो ईंधन और वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। वहीं, उत्पादन कम रहने पर लोडशेडिंग बढ़ने और जनता के विरोध का खतरा रहता है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान में बिजली संकट ने एक बार फिर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कराची में लंबे और अनघोषित पावर कट के खिलाफ लोगों का सड़क पर उतरना इस नाराजगी की गंभीरता दिखाता है।
हालांकि, यह कहना कि कराची से इस्लामाबाद तक पूरे पाकिस्तान में हर जगह 12-12 घंटे बिजली कट रही है, उपलब्ध ताजा आंकड़ों से पुष्ट नहीं है। लेकिन बिजली उत्पादन की कमी, ईंधन संकट, सर्कुलर डेट और वितरण व्यवस्था की कमजोरियों के कारण पाकिस्तान का पावर सेक्टर लगातार दबाव में है।
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