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पीएम मोदी ने फ्रांस में क्यों नहीं की ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस? सामने आई असली वजह

फ्रांस में जून 2026 में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई थी। अब सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ट्रंप के 'अप्रत्याशित व्यवहार' को देखते हुए संयुक्त मीडिया बातचीत से बचने का फैसला किया था। भारत को आशंका थी कि प्रेस के सवाल-जवाब के दौरान कोई अप्रत्याशित टिप्पणी कूटनीतिक असहजता पैदा कर सकती है।

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पीएम मोदी ने फ्रांस में क्यों नहीं की ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस? सामने आई असली वजह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में हुई मुलाकात के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस न होने को लेकर अब नई जानकारी सामने आई है। जून 2026 में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की बैठक हुई थी, लेकिन इसके बाद दोनों ने साथ आकर मीडिया के सवालों का सामना नहीं किया।

अब सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसके पीछे मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रंप का अप्रत्याशित मीडिया व्यवहार था। भारत ने कथित तौर पर पहले ही अमेरिका को संकेत दे दिया था कि वह बैठक के बाद संयुक्त प्रेस इंटरैक्शन नहीं चाहता।

ट्रंप के 'अप्रत्याशित व्यवहार' को लेकर थी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार को आशंका थी कि संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए अचानक कोई ऐसी टिप्पणी कर सकते हैं, जिसका कूटनीतिक असर हो।

ट्रंप अपने मीडिया इंटरैक्शन में अक्सर अचानक सवालों का जवाब देने और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में भारत ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की बजाय नियंत्रित और सीमित मीडिया कवरेज को प्राथमिकता दी।

भारत ने पहले ही अमेरिका को बता दिया था फैसला

The New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की यह प्राथमिकता जून में मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले ही अमेरिकी पक्ष के सामने रख दी गई थी। लेकिन बैठक के बाद ट्रंप ने अप्रत्याशित रूप से पत्रकारों के लिए सवाल-जवाब का मंच खोल दिया और करीब 45 मिनट तक मीडिया से बातचीत की।

यानी भारत का मकसद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में संभावित अप्रत्याशित स्थिति से बचना था, लेकिन ट्रंप ने बैठक के बाद अलग से मीडिया बातचीत कर ली।

पहले भी ट्रंप के मीडिया इंटरैक्शन बने थे चर्चा का विषय

भारतीय अधिकारियों की चिंता का आधार केवल आशंका नहीं थी। रिपोर्टों में ट्रंप के दूसरे नेताओं के साथ हुए हालिया मीडिया इंटरैक्शन का भी उल्लेख किया गया है।

विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के नेताओं के साथ ट्रंप की सार्वजनिक बातचीत के दौरान हुई तीखी टिप्पणियों को उदाहरण के तौर पर देखा गया। भारत को डर था कि इसी तरह की कोई स्थिति मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पैदा हो सकती है।

मोदी और ट्रंप के रिश्ते में कोई दरार?

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में कोई बड़ा तनाव था।

दोनों नेताओं की जून में G7 के दौरान द्विपक्षीय बैठक हुई थी और दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत जारी रही। प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचना मुख्य रूप से मीडिया मैनेजमेंट और कूटनीतिक जोखिम को नियंत्रित करने का फैसला बताया जा रहा है।

भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार, टैरिफ, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और प्रवासन जैसे कई संवेदनशील मुद्दे हैं। ऐसे माहौल में किसी सार्वजनिक मंच पर अचानक आई टिप्पणी दोनों देशों के लिए राजनीतिक मुश्किल पैदा कर सकती है।

फरवरी 2025 में क्या हुआ था?

दिलचस्प बात यह है कि फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मोदी और ट्रंप ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उस समय व्हाइट हाउस ने दोनों नेताओं की बैठक के बाद संयुक्त मीडिया कार्यक्रम की घोषणा की थी।

उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं ने बात की थी। ट्रंप ने भारत के ऊंचे टैरिफ पर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी भी जताई थी, जबकि मोदी ने भारत के राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च रखने की बात कही थी।

इसलिए 2026 में फ्रांस में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचने का फैसला और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आखिर क्यों लिया गया था यह फैसला?

पूरे घटनाक्रम को देखें तो भारत की रणनीति को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है—

  • अप्रत्याशित सवालों से बचना: प्रेस के सवालों के दौरान अचानक संवेदनशील मुद्दे उठने की संभावना।

  • कूटनीतिक संदेश पर नियंत्रण: दोनों नेताओं की बातचीत के बाद सार्वजनिक संदेश को सीमित रखना।

  • संवेदनशील मुद्दों पर जोखिम कम करना: व्यापार, टैरिफ, यूक्रेन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सार्वजनिक टकराव से बचना।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यही वजह थी कि भारत ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की बजाय अधिक नियंत्रित प्रारूप को प्राथमिकता दी।

ट्रंप फिर भी पत्रकारों के सामने आए

भारत की इच्छा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने की थी, लेकिन ट्रंप ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब 45 मिनट तक सवालों के जवाब दिए।

इससे यह भी साफ हुआ कि संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने का फैसला ट्रंप को मीडिया से बात करने से रोकने के लिए नहीं था। भारत का उद्देश्य मुख्य रूप से मोदी-ट्रंप संयुक्त मीडिया कार्यक्रम से संभावित जोखिम को कम करना था।

क्या यह कूटनीतिक रणनीति थी?

कूटनीति में सार्वजनिक मंच पर कही गई एक छोटी टिप्पणी भी कई बार बड़ी खबर बन जाती है। खासकर तब, जब दो बड़े देशों के नेता व्यापार, रक्षा और वैश्विक राजनीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत कर रहे हों।

ऐसे में भारत का फैसला एक सावधानी भरी कूटनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सामने आई जानकारी सरकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है; सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल ट्रंप के व्यवहार की वजह से नहीं हुई।

एक नजर में

सवालजवाबमुलाकात कब हुई?जून 2026, G7 शिखर सम्मेलन के दौरानमुलाकात कहां हुई?फ्रांसनेतानरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंपसंयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई?नहींबताई गई वजहट्रंप के अप्रत्याशित मीडिया व्यवहार की चिंताभारत ने क्या किया?संयुक्त मीडिया इंटरैक्शन से बचने की प्राथमिकता जताईट्रंप ने क्या किया?बैठक के बाद करीब 45 मिनट मीडिया से सवाल-जवाब किएक्या दोनों देशों के रिश्तों में दरार की पुष्टि हुई?नहीं

निष्कर्ष: फ्रांस में मोदी-ट्रंप बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस न होने की वजह अब सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक किसी बड़े राजनीतिक मतभेद के बजाय संभावित मीडिया और कूटनीतिक जोखिम को नियंत्रित करना थी। भारतीय अधिकारियों को ट्रंप के अप्रत्याशित सार्वजनिक बयानों को लेकर चिंता थी। हालांकि ट्रंप ने बाद में पत्रकारों से लंबी बातचीत की, लेकिन भारत ने मोदी के साथ संयुक्त प्रेस मंच से दूरी बनाए रखना पसंद किया।

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