भारत-म्यांमार में विद्रोही समूहों को ट्रेनिंग देने के आरोपी 6 यूक्रेनी नागरिकों को जमानत, NIA कोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत दे दी है। अदालत ने प्रत्येक आरोपी को 1 लाख रुपये के कैश बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। इन लोगों पर म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन और हथियारों से जुड़ी ट्रेनिंग देने के आरोपों की जांच NIA कर रही है। मामले में NIA ने 8 सितंबर को चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन उसमें UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। एजेंसी ने कहा है कि UAPA से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
लेखक
Vinay Mishra
छह यूक्रेनी नागरिकों को मिली डिफॉल्ट जमानत
नई दिल्ली: भारत-म्यांमार सीमा के रास्ते म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर ड्रोन और हथियारों से जुड़ी ट्रेनिंग देने के मामले में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत दे दी है।
विशेष NIA जज प्रशांत शर्मा ने प्रत्येक आरोपी को 1 लाख रुपये के कैश बॉन्ड पर जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने यह फैसला उस समय दिया जब मामले में जांच की वैधानिक समयसीमा के भीतर UAPA के तहत आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया था।
कौन-कौन से यूक्रेनी नागरिक आरोपी हैं?
मामले में जिन छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था, उनकी पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियान स्टेफनकिव, मैक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में हुई है।
पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक और इवान सुखमानोव्स्की को 13 मार्च को लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था, जबकि मारियान स्टेफनकिव, मैक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की को उसी दिन दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।
एक अमेरिकी नागरिक को भी मिल चुकी है जमानत
इसी मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक भी आरोपी है। उसे 18 सितंबर को दिल्ली की NIA अदालत ने डिफॉल्ट जमानत दी थी।
अदालत ने उस समय कहा था कि समान परिस्थितियों में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिक भी उपयुक्त आवेदन दाखिल करने पर जमानत के हकदार हो सकते हैं। इसके बाद बुधवार को छह यूक्रेनी नागरिकों की जमानत याचिकाओं पर फैसला आया।
NIA ने लगाए थे क्या आरोप?
NIA ने मार्च में मामला दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि आरोपी म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों के संपर्क में थे और उन्हें हथियार, ड्रोन तथा अन्य सैन्य उपकरणों से संबंधित ट्रेनिंग उपलब्ध कराने में शामिल थे।
एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने भारत में प्रवेश करने के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र की यात्रा की और कथित तौर पर मिजोरम के रास्ते म्यांमार में प्रवेश किया। NIA ने यह भी आरोप लगाया था कि म्यांमार में एक पूर्व निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग तकनीक से संबंधित ट्रेनिंग दी गई।
इन आरोपों को फिलहाल जांच एजेंसी के आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। अदालत में आरोप सिद्ध होना अभी बाकी है।
पहले UAPA के तहत दर्ज हुआ था मामला
NIA ने शुरुआत में मामले को UAPA की धारा 18 समेत अन्य प्रावधानों के तहत दर्ज किया था। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि गतिविधियों के भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों पर असर पड़ सकता है।
मार्च में रिमांड की सुनवाई के दौरान अदालत ने भी माना था कि FIR में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कथित अवैध कृत्यों का उल्लेख था और उस स्तर पर UAPA की धारा 18 के लागू होने की संभावना बनती थी। हालांकि, बाद की चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं।
8 सितंबर की चार्जशीट में UAPA धाराएं नहीं
NIA ने 8 सितंबर 2026 को मामले में चार्जशीट दाखिल की। इसमें आरोपियों के खिलाफ Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराएं 21 और 23 लगाई गईं, जबकि UAPA से जुड़े पहलू को आगे की जांच के लिए लंबित रखा गया।
NIA ने अदालत को बताया कि यदि आगे की जांच में UAPA के तहत अपराध बनता पाया जाता है तो एजेंसी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
विदेशी नागरिकों पर इमिग्रेशन कानून के तहत भी कार्रवाई
अदालत ने छह यूक्रेनी नागरिकों को Immigration and Foreigners Act की धारा 21 और 23 के तहत दर्ज मामलों से भी डिस्चार्ज कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, Foreigners Regional Registration Office (FRRO) ने इन अपराधों को कंपाउंड करते हुए प्रत्येक आरोपी पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
जांच अभी खत्म नहीं हुई है
छह आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले की जांच समाप्त हो गई है। NIA ने स्पष्ट किया है कि म्यांमार में कथित प्रशिक्षण, ड्रोन की बरामदगी और आरोपियों के संभावित संपर्कों से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।
एजेंसी ने अदालत के समक्ष यह भी कहा था कि ड्रोन और उसके सामान की भारत के रास्ते कथित आवाजाही से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए और समय की जरूरत है।
अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और NIA की जांच पर नजर रहेगी। चार्जशीट में UAPA प्रावधान शामिल नहीं किए जाने के बाद अदालत द्वारा दी गई डिफॉल्ट जमानत के बावजूद एजेंसी भविष्य में जांच के आधार पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
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