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BRICS Summit: भारत आ सकते हैं शी चिनफिंग, 400 लोगों का दल भी होगा साथ; 2019 में आए थे 200 अधिकारी

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके साथ करीब 400 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल आ सकता है, जो 2019 में भारत दौरे के दौरान आए 200 से कम अधिकारियों की संख्या से दोगुना है। हालांकि, चीन और भारत की ओर से अभी शी की यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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BRICS Summit: भारत आ सकते हैं शी चिनफिंग, 400 लोगों का दल भी होगा साथ; 2019 में आए थे 200 अधिकारी

भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के संभावित दौरे को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, शी सितंबर में नई दिल्ली आ सकते हैं और उनके साथ करीब 400 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल होने की संभावना है। अगर यह दौरा होता है तो करीब सात साल बाद शी चिनफिंग भारत की यात्रा करेंगे।

भारत इस साल BRICS की मेजबानी कर रहा है और शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होना है। शी की संभावित मौजूदगी को BRICS के एजेंडे से ज्यादा भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

400 लोगों का दल क्यों है खास?

Reuters से बातचीत करने वाले भारतीय सूत्रों के मुताबिक, शी चिनफिंग के साथ करीब 400 चीनी अधिकारी भारत आ सकते हैं। यह संख्या 2019 में उनकी भारत यात्रा के दौरान आए 200 से कम अधिकारियों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अधिकारी संभावित दौरे को लेकर होटल बुकिंग और सुरक्षा इंतजामों पर काम कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम यात्रा कार्यक्रम और द्विपक्षीय बैठक को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

सात साल बाद भारत आ सकते हैं शी

अगर शी चिनफिंग नई दिल्ली आते हैं, तो यह उनकी सात साल बाद भारत की पहली यात्रा होगी। इससे पहले वह 2019 में भारत आए थे, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चेन्नई के पास मामल्लपुरम में अनौपचारिक शिखर वार्ता की थी।

इसके बाद भारत-चीन संबंधों में गलवान घाटी में 2020 की हिंसक झड़प के बाद काफी तनाव पैदा हुआ। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य तैनाती ने द्विपक्षीय संबंधों को लंबे समय तक प्रभावित किया।

क्या मोदी और शी की मुलाकात होगी?

शी की भारत यात्रा अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित द्विपक्षीय बैठक का एजेंडा भी अंतिम नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, यात्रा और बैठक से जुड़ी व्यवस्थाओं पर बातचीत जारी है।

अगर दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो सीमा विवाद, व्यापार, द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे बातचीत में अहम हो सकते हैं।

2020 के बाद रिश्तों में धीरे-धीरे नरमी

भारत और चीन के रिश्तों में 2020 के बाद लंबे समय तक तनाव रहा। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं।

2024 में सीमा पर सैन्य गतिरोध कम करने के लिए समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। इसके बावजूद सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

यही वजह है कि शी की संभावित भारत यात्रा को सिर्फ एक BRICS दौरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति का बड़ा कूटनीतिक संकेत भी हो सकती है।

चीन ने क्या कहा?

शी की यात्रा को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन BRICS सहयोग को काफी महत्व देता है और इस साल के BRICS सम्मेलन की सफल मेजबानी में भारत का समर्थन करता है। हालांकि, शी की यात्रा पर उसने कहा कि फिलहाल साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस संभावित यात्रा पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित दौरा ही माना जाना चाहिए।

BRICS के लिए क्यों महत्वपूर्ण है भारत में शी की मौजूदगी?

BRICS का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में हुआ है और अब संगठन में पहले से ज्यादा देश शामिल हैं। ऐसे समय में भारत में होने वाली बैठक में चीन के राष्ट्रपति की मौजूदगी समूह के भीतर चीन की भूमिका को भी रेखांकित करेगी।

भारत के लिए भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली BRICS के मंच का इस्तेमाल विकासशील देशों के मुद्दों, व्यापार, वित्तीय सहयोग और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे विषयों को आगे बढ़ाने के लिए कर सकती है।

अमेरिका फैक्टर भी अहम

भारत और चीन दोनों ही अमेरिका के साथ अपने-अपने स्तर पर रणनीतिक और व्यापारिक संबंध रखते हैं। ऐसे में BRICS के दौरान मोदी और शी की संभावित बातचीत का व्यापक भू-राजनीतिक असर भी हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी बने हुए हैं, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दों पर कुछ साझा हित भी हैं।

2019 बनाम 2026: शी की संभावित भारत यात्रा

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क्या शी की यात्रा पक्की है?

नहीं। अभी शी चिनफिंग के भारत आने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Reuters को भारतीय सूत्रों ने बताया है कि उनकी यात्रा की संभावना है और तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन अंतिम यात्रा कार्यक्रम और संभावित द्विपक्षीय बैठक अभी तय नहीं हुई है।

एक नजर में

  • BRICS Summit: 12-13 सितंबर 2026

  • मेजबान: भारत

  • स्थान: नई दिल्ली

  • संभावित मेहमान: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग

  • संभावित प्रतिनिधिमंडल: करीब 400 अधिकारी

  • 2019 में प्रतिनिधिमंडल: 200 से कम अधिकारी

  • संभावित दौरे का अंतर: करीब 7 साल

  • मुख्य मुद्दे: BRICS सहयोग, भारत-चीन संबंध, सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा

  • आधिकारिक पुष्टि: अभी नहीं हुई है

निष्कर्ष

शी चिनफिंग का सितंबर में भारत आना अगर तय होता है, तो यह भारत-चीन रिश्तों के लिए बेहद अहम कूटनीतिक घटनाक्रम होगा। करीब 400 अधिकारियों वाला बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी इस संभावित दौरे की गंभीरता को दिखाता है। लेकिन फिलहाल शी की यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि क्या नई दिल्ली में मोदी-शी मुलाकात होती है और क्या BRICS के मंच से दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने का कोई नया रास्ता निकलता है।

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