मेहदी हसन की वो गजल, टूटे दिल की खामोश टीस को करता है बयां; सीधा रूह में बसती है आवाज
कुछ गजलें सिर्फ सुनी नहीं जातीं, उन्हें महसूस किया जाता है। मेहदी हसन की “रंजिश ही सही” ऐसी ही गजल है, जिसमें जुदाई, अधूरी मोहब्बत और वापस लौटने की एक आखिरी उम्मीद बेहद खूबसूरती से…