बिहार के 6 शहरों में दौड़ेंगी 400 ई-बसें, पटना में 150; बदल जाएगा सफर का अंदाज
बिहार में शहरी सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में 400 नई इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन किया जाएगा। पटना को 150 ई-बसें मिलेंगी, जबकि गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा में 50-50 बसें चलाने की योजना है। इन बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अनुसार, बेड़े में 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की बसें शामिल होंगी, जिससे शहरों में सार्वजनिक परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
लेखक
Vinay Mishra
बिहार के छह शहरों को मिलेंगी 400 इलेक्ट्रिक बसें
बिहार में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को इलेक्ट्रिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की तैयारी तेज हो गई है। पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत राज्य के छह प्रमुख शहरों में कुल 400 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। इनमें सबसे ज्यादा 150 बसें पटना के लिए निर्धारित हैं।
पटना के अलावा गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा में 50-50 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन प्रस्तावित है। बिहार सरकार के दस्तावेजों में भी इन छह शहरों के लिए कुल 400 बसों की व्यवस्था का उल्लेख है।
पटना में 150, बाकी शहरों में 50-50 बसें
बीएसआरटीसी के अनुसार, कुल 400 बसों में 200 बसें 9 मीटर और 200 बसें 12 मीटर लंबी होंगी। पटना को दोनों श्रेणियों में 75-75 बसें मिलेंगी।
वहीं गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा को 25-25 नौ मीटर और 25-25 बारह मीटर की बसें देने की योजना है। संबंधित शहरों में जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार होने के साथ बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा।
चार्जिंग स्टेशन पर भी तेजी से काम
ई-बसों के संचालन के लिए सिर्फ बसें उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार के संबंधित शहरों में चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं।
ताजा जानकारी के मुताबिक, मुजफ्फरपुर में चार्जिंग स्टेशन का निर्माण अंतिम चरण में है, जबकि अन्य शहरों में भी काम जारी है। इससे बसों के नियमित संचालन के लिए जरूरी चार्जिंग व्यवस्था तैयार की जा रही है।
9 और 12 मीटर की होंगी ई-बसें
नई इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े में दो आकार की बसें शामिल होंगी। छोटी श्रेणी की बसें 9 मीटर और बड़ी बसें 12 मीटर लंबी होंगी। अलग-अलग क्षमता और रूट के हिसाब से इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पटना जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में 150 बसों का संचालन शहर के भीतर और जरूरत के अनुसार अन्य रूटों पर सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, किस रूट पर कितनी बसें चलेंगी और समय-सारिणी क्या होगी, इसका अंतिम विवरण संबंधित परिवहन प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाना बाकी है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
इलेक्ट्रिक बसों के आने से यात्रियों को आधुनिक एसी सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। सरकार और परिवहन विभाग ने योजना को सुरक्षित, आरामदायक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन से जोड़कर देखा है।
ई-बसों में पारंपरिक ईंधन से चलने वाली बसों की तुलना में स्थानीय स्तर पर टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता। ऐसे में बड़े शहरों में इनके इस्तेमाल से परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
पहले चरण में 200 बसों की तैयारी
योजना के तहत 200 नौ मीटर की बसों को पहले चरण में शामिल किए जाने की जानकारी पहले दी गई थी। इनमें 50 बसों को महिलाओं के लिए पिंक इलेक्ट्रिक एसी बसों के रूप में संचालित करने की योजना भी बताई गई थी।
बिहार परिवहन विभाग की वेबसाइट पर भी पीएम ई-बस योजना से संबंधित अधिसूचना और योजना की जानकारी उपलब्ध है। विभाग ने 2026 में बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति भी सूचीबद्ध की है।
शहरों के सफर में आएगा बदलाव
पटना समेत बिहार के पांच अन्य प्रमुख शहरों में 400 ई-बसों का परिचालन सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चार्जिंग स्टेशन और अन्य सुविधाएं पूरी होने के बाद बसों का संचालन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
हालांकि यात्रियों के लिए वास्तविक बदलाव रूट, किराया, फ्रीक्वेंसी और समय-सारिणी तय होने के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल 400 इलेक्ट्रिक बसों की योजना से बिहार के शहरी परिवहन को अधिक आधुनिक और इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में तैयारी जारी है।
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