12 वर्षों में DBT से जनता की जेब में पहुंचे ₹53 लाख करोड़, PM मोदी बोले- जन धन योजना का असर बेमिसाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT और प्रधानमंत्री जन धन योजना की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में DBT के जरिए करीब ₹53 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे हैं। उन्होंने जन धन योजना को वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी Direct Benefit Transfer (DBT) व्यवस्था और प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में DBT के जरिए करीब ₹53 लाख करोड़ सीधे जनता के बैंक खातों तक पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री ने जन धन योजना को देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा और बेमिसाल कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन योजना ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का काम किया। बैंक खाते, मोबाइल और आधार जैसी व्यवस्थाओं के बेहतर इस्तेमाल से सरकारी सहायता को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया मजबूत हुई है।
DBT से सीधे लाभार्थियों तक पहुंचा पैसा
DBT व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को बिचौलियों की भूमिका कम करते हुए सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचाना है। इसके तहत सब्सिडी, पेंशन, छात्रवृत्ति और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े भुगतान सीधे खातों में किए जाते हैं।
सरकार के मुताबिक, DBT के विस्तार से सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और लाभार्थियों को पैसा मिलने में आसानी हुई है। प्रधानमंत्री ने इसी बदलाव को भारत के डिजिटल और वित्तीय ढांचे की बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया।
जन धन योजना ने बदली बैंकिंग की तस्वीर
प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत 2014 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, जो अब तक औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर थे।
जन धन खातों के जरिए लोगों को बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच मिली। इसके साथ ही इन खातों को आधार और मोबाइल से जोड़ने से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ।
प्रधानमंत्री ने जन धन योजना के असर को “बेमिसाल” बताते हुए कहा कि इस पहल ने देश के गरीब और वंचित वर्गों को आर्थिक व्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बिचौलियों पर लगाम लगाने में मदद
DBT के समर्थकों के मुताबिक, सरकारी सहायता सीधे बैंक खातों में पहुंचने से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है। पहले जिन योजनाओं में लाभार्थियों तक पैसा पहुंचने के दौरान कई स्तर होते थे, उनमें DBT ने प्रक्रिया को अधिक सीधा बनाया।
सरकार का दावा है कि इससे फर्जी लाभार्थियों और डुप्लीकेट खातों को हटाने में भी मदद मिली है। बची हुई रकम का इस्तेमाल अन्य विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों में किया जा सकता है।
डिजिटल इंडिया से जुड़ा बड़ा बदलाव
जन धन योजना और DBT को सरकार के व्यापक डिजिटल इंडिया विजन का अहम हिस्सा माना जाता है। बैंक खातों के बढ़ते इस्तेमाल, मोबाइल कनेक्टिविटी और डिजिटल भुगतान के विस्तार ने सरकारी योजनाओं के वितरण के तरीके को भी बदल दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) को भारत के वित्तीय समावेशन मॉडल की प्रमुख ताकत बताते रहे हैं। इस व्यवस्था के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी सहायता कम से कम लीकेज के साथ सही लाभार्थी तक पहुंचे।
करोड़ों लोगों को बैंकिंग से जोड़ने का दावा
जन धन योजना की शुरुआत के बाद देश में बैंक खातों की पहुंच तेजी से बढ़ी है। खास तौर पर ग्रामीण इलाकों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया।
इसका असर सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहा। बैंक खाते होने से लोगों को बचत, बीमा, पेंशन और डिजिटल भुगतान जैसी वित्तीय सेवाओं तक भी पहुंच मिली।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में DBT के जरिए ₹53 लाख करोड़ का सीधे लाभार्थियों तक पहुंचना इस बदलाव के पैमाने को दिखाता है। सरकार के लिए यह व्यवस्था कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
आगे भी जारी रहेगा वित्तीय समावेशन पर जोर
सरकार अब DBT और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक सरकारी योजनाओं को सीधे लाभार्थियों से जोड़ना और भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाना है।
जन धन योजना के 12 साल पूरे होने के साथ सरकार के सामने अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं का लाभ देश के उन लोगों तक भी पहुंचे, जो अभी पूरी तरह औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से नहीं जुड़ पाए हैं।
Keep reading
More in राष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रीय समाचार
जयपुर के NIMS अस्पताल में लगी आग, धुआं फैलते ही मरीजों को लेकर बाहर भागे परिजन; कोई जनहानि नहीं
जयपुर-दिल्ली हाईवे पर चंदवाजी के पास स्थित NIMS अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे आग लग गई। आग ग्राउंड फ्लोर के ऑपरे…
राष्ट्रीय समाचार
'दुख पहुंचाने का इरादा नहीं था...', लद्दाख की तिब्बत से तुलना पर घिरे सोनम वांगचुक ने मांगी माफी
लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की तुलना तिब्बत में चीन के शासन के दौरान दमन से करने को लेकर विवादों में घिरे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक…
राष्ट्रीय समाचार
'पद्मभूषण क्यों देना, प्रधानमंत्री ही बना दो', ज्ञानेश कुमार की तारीफ पर कांग्रेस ने BJP बंगाल अध्यक्ष पर कसा तंज
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की मांग पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तंज…
राष्ट्रीय समाचार
महराजगंज कोर्ट में तारीख देखने गई विवाहिता से मारपीट, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल; पति समेत दो गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के महराजगंज में परिवार न्यायालय में भरण-पोषण के मुकदमे की तारीख पर पहुंची एक विवाहिता के साथ कचहरी परिसर में मारपीट का मामला सा…
राष्ट्रीय समाचार
गोरखपुर में अस्पताल की लैब में दिखे दो विषैले सांप, एक का हुआ रेस्क्यू और दूसरे की तलाश जारी
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के कैंपियरगंज स्थित जय अंबे हॉस्पिटल की लैब में दो विषैले सांप दिखाई देने से हड़कंप मच गया। अस्पताल कर्मियों ने एक ब…
राष्ट्रीय समाचार
जमशेदपुर में ऑटो हटाने को लेकर बवाल, किन्नरों ने ट्रैफिक जवान से की हाथापाई; फाड़ी वर्दी
जमशेदपुर के साकची गोलचक्कर पर ऑटो हटाने को लेकर किन्नर समुदाय के कुछ सदस्यों और ट्रैफिक पुलिस के बीच विवाद हो गया। कहासुनी के बाद मामला हाथा…
