'अलग-अलग राय होना सामान्य बात', SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद को लेकर EC ने 8 प्वाइंट्स में दी सफाई
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने बुधवार को 8 बिंदुओं में अपनी स्थिति स्पष्ट की। चुनाव आयोग ने कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, टिप्पणियां और सुझाव आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और इन्हें अंतिम फैसले से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में उसके सभी फैसले पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। ECI ने SIR सहित मतदाता सूची के पुनरीक्षण और अन्य चुनावी सुधारों को इसी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
लेखक
Vinay Mishra
SIR पर कथित मतभेद की रिपोर्ट के बाद EC की सफाई
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने Special Intensive Revision (SIR) को लेकर आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों पर बुधवार को विस्तृत सफाई दी। आयोग ने 8 बिंदुओं वाला बयान जारी करते हुए कहा कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में फैसले से पहले अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आना सामान्य है।
यह सफाई ऐसी मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में आपत्तियां और सवाल उठाए थे। आयोग ने कहा कि ऐसे ऑपरेशनल सवाल या इनपुट मुख्य रूप से ड्राफ्ट स्तर की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
'अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा'
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय और टिप्पणियां विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया हैं। अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले ऐसी राय पर चर्चा होती है।
आयोग के अनुसार, केवल तीन चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव दे सकता है। ECI ने इसे चुनाव प्रक्रिया में आंतरिक जांच और संतुलन का हिस्सा बताया है।
पिछले एक साल के सभी फैसले सर्वसम्मत: EC
चुनाव आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी फैसले पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।
आयोग ने कहा कि कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स या टिप्पणियों को अलग से उजागर करने और बड़ी संख्या में लिए गए अनुमोदनों, निर्देशों तथा पहलों को नजरअंदाज करने से तस्वीर का केवल एक हिस्सा सामने आता है।
करीब 40 नई पहल और कई चुनावी सुधार
EC ने कहा कि हाल के महीनों में आयोग ने कई फैसले लिए, निर्देश जारी किए और करीब 40 नई पहल शुरू कीं। इनमें मतदाता सूची के पुनरीक्षण और SIR समेत कई चुनावी सुधार शामिल हैं।
आयोग ने कहा कि इन सभी पहलों को पूरे आयोग की सामूहिक और सर्वसम्मत निर्णय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया है।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अपडेट करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और डेटा के प्रबंधन को लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न पक्षों की ओर से सवाल उठते रहे हैं।
ताजा विवाद उस मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां या सवाल उठाए थे। चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों को अंतिम फैसलों से अलग संदर्भ में देखने के खिलाफ अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
डेटा सुरक्षा पर भी आयोग ने दी सफाई
आयोग ने मतदाता सूची के डिजिटल डेटा को लेकर उठाए गए सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। ECI ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिनमें ECINet शामिल है, अनधिकृत छेड़छाड़ और डेटा में हेरफेर को रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं।
आयोग के मुताबिक, IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस में इस्तेमाल होने वाले सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं। वहीं, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए कानूनी अधिकार प्राप्त Electoral Registration Officers (EROs) और District Election Officers (DEOs) कानून के मुताबिक काम करते हैं।
आयोग ने Article 324 का भी दिया हवाला
ECI ने अपने बयान में कहा कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाली बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है।
आयोग ने कहा कि लिखित नोट्स, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल की प्रक्रिया पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और प्रशासनिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए नियमित तौर पर इस्तेमाल की जाती है।
बिहार से बंगाल तक चुनावों का भी जिक्र
EC ने अपने बयान में हाल में हुए बड़े चुनावों का भी उल्लेख किया। आयोग के मुताबिक, बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव और चुनाव संबंधी गतिविधियां पूरी प्रशासनिक एवं परिचालन व्यवस्था के साथ कराई गईं।
आयोग ने कहा कि इन चुनावों के दौरान भी कई स्तरों पर अनुमोदन और निर्देश जारी किए गए, जो उसकी सामूहिक कार्यप्रणाली का हिस्सा रहे।
EC ने कहा- संवैधानिक जिम्मेदारी के लिए प्रतिबद्ध
चुनाव आयोग ने अंत में कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने SIR और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सामने आए सवालों के संदर्भ में अपनी बहु-सदस्यीय और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर जोर दिया।
इस तरह, आयोग की 8 बिंदुओं वाली सफाई का मुख्य संदेश यह है कि आंतरिक स्तर पर सवाल, सुझाव या अलग-अलग राय होना अंतिम निर्णय में मतभेद का स्वतः प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। आयोग के अनुसार, पिछले एक साल के अंतिम फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
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