'लश्कर-जैश अनगाइडेड मिसाइल हैं', ख्वाजा आसिफ को सता रहा पाकिस्तान के सीरिया-इराक बनने का डर
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि ऐसे मिलिशिया समूह समय के साथ नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं और पाकिस्तान को सीरिया या इराक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। आसिफ ने इन समूहों को “अनगाइडेड मिसाइल” बताते हुए कहा कि पाकिस्तान को ऐसे मिलिशिया की जरूरत नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर बहस जारी है।
लेखक
Vinay Mishra
लश्कर-जैश को लेकर ख्वाजा आसिफ की बड़ी टिप्पणी
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकी संगठनों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समूह केवल बाहरी मोर्चों पर इस्तेमाल होने वाले संगठन नहीं हैं, बल्कि समय के साथ खुद उस देश के लिए खतरा बन सकते हैं, जिसने उन्हें बढ़ावा दिया हो।
ख्वाजा आसिफ ने यह टिप्पणी पाकिस्तान के हम न्यूज के पत्रकार जाहिद गिश्कोरी के साथ एक पॉडकास्ट बातचीत में की। यह पॉडकास्ट 15 सितंबर 2026 को रिलीज हुआ था और अब उनके बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
'ये अनगाइडेड मिसाइल हैं'
लश्कर और जैश का जिक्र करते हुए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसे मिलिशिया समूहों पर लंबे समय तक नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल होता है। उन्होंने इन्हें “अनगाइडेड मिसाइल” बताया।
आसिफ के मुताबिक, ये समूह समय और परिस्थितियों के अनुसार अपना नाम या स्वरूप बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कभी अमेरिका की लड़ाई लड़ते हैं, कभी अपनी लड़ाई और कभी किसी दूसरे पक्ष की लड़ाई में शामिल हो जाते हैं।
उनकी टिप्पणी का मूल तर्क यह था कि हथियारबंद समूह जब किसी राज्य के नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं तो वे उसी राज्य की सुरक्षा और स्थिरता के लिए चुनौती बन सकते हैं।
'सीरिया और इराक जैसा हाल न हो जाए'
ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के सामने संभावित खतरे की तुलना सीरिया और इराक की परिस्थितियों से की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को ऐसे हालात से बचने की जरूरत है।
उन्होंने मिलिशिया समूहों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि पिछले 40-50 वर्षों का इतिहास यह दिखाता है कि ऐसे समूह अंततः अपने ही देश के लिए दुश्मन बन सकते हैं।
आसिफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को ऐसे मिलिशिया की जरूरत नहीं है और इन समूहों की गतिविधियां देश की सैन्य ताकत को भी प्रभावित कर सकती हैं।
तालिबान का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान ख्वाजा आसिफ ने तालिबान का भी उल्लेख किया। उनसे जब यह सवाल किया गया कि भारत पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों को लेकर आरोप लगाता है, तो उन्होंने पाकिस्तान के भीतर मौजूद हथियारबंद समूहों और उनके प्रभाव का हवाला दिया।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवादी संगठनों और देश के भीतर सक्रिय उग्रवादी समूहों से निपटने की चुनौती का सामना कर रहा है।
पहले भी उठता रहा है आतंकवाद पर सवाल
पाकिस्तान में आतंकवाद को लेकर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर बहस लंबे समय से चलती रही है। देश के नेताओं की ओर से भी अलग-अलग मौकों पर आतंकवादी समूहों के खतरे को स्वीकार किया गया है।
2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी आतंकवाद से लड़ने के लिए पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख किया था। हालांकि, आतंकवादी संगठनों को लेकर पाकिस्तान की नीतियों और उसके सुरक्षा प्रतिष्ठान की भूमिका पर भारत समेत कई देशों की ओर से अलग-अलग आरोप और आलोचनाएं सामने आती रही हैं। इन दावों को संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
ख्वाजा आसिफ के बयान का महत्व
ख्वाजा आसिफ का ताजा बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए संभावित खतरे के रूप में पेश किया है।
उनका “अनगाइडेड मिसाइल” वाला बयान इस चिंता को दर्शाता है कि राज्य के बाहर काम करने वाले हथियारबंद समूह समय के साथ अपने मूल उद्देश्य से अलग होकर व्यापक सुरक्षा संकट पैदा कर सकते हैं।
हालांकि, पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति और सीरिया-इराक से उसकी तुलना एक राजनीतिक टिप्पणी है; इसे भविष्य की निश्चित स्थिति के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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