द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में सरकार बनाने के करीब फार-राइट AfD, 44% वोट
जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट राज्य में फार-राइट पार्टी Alternative for Germany (AfD) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पार्टी को करीब 43.8% वोट मिले और 83 सदस्यीय विधानसभा में 39 सीटें मिलीं। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में किसी फार-राइट पार्टी का सबसे बड़ा राज्यस्तरीय प्रदर्शन है। हालांकि, बहुमत से तीन सीट कम होने के कारण सरकार बनाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
लेखक
Vinay Mishra
बर्लिन: जर्मनी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्वी जर्मनी के राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट में फार-राइट पार्टी Alternative for Germany (AfD) ने राज्य चुनाव में करीब 43.8% वोट हासिल कर इतिहास रच दिया। यह पार्टी का अब तक का सबसे मजबूत चुनावी प्रदर्शन है और पहली बार ऐसा हुआ है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में कोई फार-राइट पार्टी राज्य सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची है।
83 में से 39 सीटें, बहुमत से तीन कदम दूर
अंतिम नतीजों के मुताबिक AfD को सैक्सोनी-आनहाल्ट की 83 सदस्यीय विधानसभा में 39 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए उसे 42 सीटों की जरूरत है, यानी पार्टी बहुमत से सिर्फ तीन सीट दूर रह गई।
AfD ने 2021 में इसी राज्य में करीब 20.8% वोट हासिल किए थे। इस बार उसका वोट शेयर दोगुने से भी ज्यादा हो गया। वहीं चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की CDU लगभग 17.2% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही।
क्या AfD बना पाएगी सरकार?
चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद AfD के सामने सरकार बनाने की बड़ी चुनौती है। जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियों ने लंबे समय से AfD के साथ गठबंधन या सत्ता में सहयोग से इनकार किया है। इसी नीति को राजनीतिक ‘फायरवॉल’ कहा जाता है।
AfD के पास अकेले बहुमत नहीं है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दूसरी कोई पार्टी उसके साथ सरकार बनाने के लिए तैयार होगी। पार्टी के स्थानीय नेता उलरिख जीगमंड ने चुनाव परिणाम को सरकार बनाने का जनादेश बताया है, लेकिन सत्ता का गणित अभी उसके पक्ष में पूरी तरह नहीं है।
AfD की ऐतिहासिक छलांग
यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जर्मनी में द्वितीय विश्व युद्ध और नाजी शासन के बाद से फार-राइट राजनीति को सत्ता से दूर रखने के लिए मजबूत राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित की गई है।
AfD की स्थापना 2013 में हुई थी। पार्टी ने 2024 में थुरिंगिया के राज्य चुनाव में सबसे अधिक वोट हासिल कर पहली बार किसी जर्मन राज्य में चुनावी बढ़त बनाई थी, लेकिन अन्य दलों ने उसके साथ गठबंधन नहीं किया। सैक्सोनी-आनहाल्ट का मौजूदा प्रदर्शन इससे भी बड़ा है और पार्टी को पहली बार राज्य सरकार के बेहद करीब ले आया है।
प्रवासन और रूस नीति पर सख्त रुख
AfD का राजनीतिक एजेंडा मुख्य रूप से आव्रजन-विरोधी नीतियों, राष्ट्रवाद और यूरोपीय संघ को लेकर आलोचनात्मक रुख पर केंद्रित रहा है। पार्टी रूस के साथ संबंधों को मजबूत करने और यूक्रेन के लिए जर्मनी के समर्थन को कम करने की भी वकालत करती रही है।
जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने सैक्सोनी-आनहाल्ट में AfD को दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया है। यही वजह है कि पार्टी के सत्ता में आने को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
मर्ज की CDU को बड़ा झटका
AfD की जीत का सीधा असर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की CDU पर पड़ा है। सैक्सोनी-आनहाल्ट में CDU का वोट शेयर 2021 के करीब 37% से गिरकर लगभग 17% रह गया।
यह परिणाम मर्ज की राष्ट्रीय सरकार के लिए भी राजनीतिक चेतावनी माना जा रहा है। जर्मनी में बढ़ती महंगाई, आर्थिक सुस्ती, प्रवासन और मुख्यधारा की पार्टियों से असंतोष जैसे मुद्दों ने AfD को समर्थन बढ़ाने में मदद की है।
जर्मनी की राजनीति पर क्या होगा असर?
सैक्सोनी-आनहाल्ट का नतीजा सिर्फ एक राज्य का चुनावी परिणाम नहीं माना जा रहा। यह जर्मनी में फार-राइट के बढ़ते प्रभाव और पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था के सामने बढ़ती चुनौती का संकेत है।
AfD अभी सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत से पीछे है, इसलिए आने वाले दिनों में गठबंधन और समर्थन को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण होगी। अगर पार्टी सत्ता में पहुंचती है तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में फार-राइट के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ होगा।
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