व्यापार और अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों को राहत, सरकार ने RELIEF योजना 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री परिवहन से जुड़ी समस्याओं के बीच केंद्र सरकार ने निर्यातकों के लिए RELIEF योजना की अवधि 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी है। इस योजना के तहत पात्र निर्यातकों को युद्ध और उससे जुड़े राजनीतिक जोखिमों के कारण हुए नुकसान पर 100 प्रतिशत तक मुआवजा मिल सकता है। इसके अलावा, पात्र अवधि के दौरान बीमा प्रीमियम को व्यवधान शुरू होने से पहले के स्तर पर स्थिर रखा जाएगा। बढ़ती माल ढुलाई लागत और बंदरगाहों पर भीड़ से कम मुनाफे वाले निर्यात कारोबार पर दबाव बना हुआ है।

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पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों को राहत, सरकार ने RELIEF योजना 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई

पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों को राहत, RELIEF योजना मार्च 2027 तक जारी रहेगी

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक व्यवधानों और समुद्री परिवहन पर उनके असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने निर्यातकों के लिए RELIEF योजना की अवधि बढ़ा दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि यह योजना अब 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में कारोबार करने वाले पात्र निर्यातकों को युद्ध से जुड़े जोखिमों और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच राहत देना है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब बढ़ती माल ढुलाई लागत, बंदरगाहों पर भीड़ और क्षेत्रीय तनाव के कारण निर्यातकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खास तौर पर कम मुनाफे पर कारोबार करने वाले निर्यातकों के लिए परिवहन खर्च और आपूर्ति व्यवस्था में बाधाएं कारोबार को प्रभावित कर रही हैं।

मार्च 2027 तक बढ़ाई गई योजना की अवधि

RELIEF योजना इस साल मार्च में शुरू की गई थी। अब इसे 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में समुद्री लॉजिस्टिक्स पर पड़ रहा है। इसी वजह से निर्यातकों को राहत देने के लिए योजना को आगे जारी रखने का फैसला किया गया है।

इस योजना में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान और ईरान सहित कुल 10 देश शामिल हैं। योजना के तहत लाभ पाने के लिए निर्यातकों और संबंधित कारोबार को निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।

पात्र निर्यातकों को 100 प्रतिशत तक मुआवजे का प्रावधान

RELIEF योजना केंद्र सरकार के Export Promotion Mission (EPM) का हिस्सा है, जिसकी घोषणा इस वर्ष के केंद्रीय बजट में की गई थी। इसके तहत Export Credit Guarantee Corporation of India (ECGC) पात्र निर्यातकों को युद्ध से जुड़े जोखिमों और उनसे संबंधित राजनीतिक परिस्थितियों के कारण हुए नुकसान पर 100 प्रतिशत तक मुआवजा दे सकता है।

हालांकि, मुआवजा संबंधित नुकसान और दावे के सत्यापन के अधीन होगा। इसका अर्थ है कि हर निर्यातक या हर प्रकार के नुकसान पर स्वतः पूरा मुआवजा मिलने की गारंटी नहीं है। दावों का मूल्यांकन योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार किया जाएगा।

बीमा प्रीमियम को पुराने स्तर पर रखने का फैसला

योजना का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि पात्र अवधि के दौरान बीमा प्रीमियम को व्यवधान शुरू होने से पहले के स्तर पर स्थिर रखा जाएगा। इससे पात्र निर्यातकों को बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच बीमा लागत में अचानक वृद्धि से राहत मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय कारोबार में बीमा और माल ढुलाई की लागत निर्यातकों के मुनाफे को प्रभावित करती है। ऐसे में प्रीमियम को स्थिर रखने और पात्र नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान कारोबार से जुड़े वित्तीय जोखिम को सीमित करने में मदद कर सकता है।

बढ़ती माल ढुलाई लागत और बंदरगाहों की भीड़ बनी चुनौती

पश्चिम एशिया संकट के बीच समुद्री परिवहन में व्यवधान, बंदरगाहों पर भीड़ और अधिक माल ढुलाई दरें निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन समस्याओं के कारण माल की आवाजाही में देरी हो सकती है और व्यापार की कुल लागत बढ़ सकती है।

कम मुनाफे पर काम करने वाले निर्यात कारोबार पर इसका असर अधिक पड़ सकता है, क्योंकि परिवहन और अन्य अतिरिक्त खर्च बढ़ने से उनकी कमाई का अंतर घट जाता है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण शिपमेंट की योजना बनाना और समय पर माल पहुंचाना भी कठिन हो सकता है।

निर्यात कारोबार को सहारा देने की कोशिश

RELIEF योजना को बढ़ाने का फैसला ऐसे निर्यातकों को अतिरिक्त सुरक्षा देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है, जिनका पश्चिम एशिया के बाजारों से कारोबार जुड़ा है। मुआवजे और बीमा प्रीमियम से संबंधित प्रावधान पात्र कारोबारियों को संकट के दौरान कुछ वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

हालांकि, योजना से मिलने वाला वास्तविक लाभ निर्यातक की पात्रता, नुकसान की प्रकृति और दावों के सत्यापन पर निर्भर करेगा। पश्चिम एशिया में हालात और समुद्री लॉजिस्टिक्स की स्थिति आगे कैसी रहती है, इसका असर भारतीय निर्यात कारोबार पर भी पड़ सकता है।

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