मक्का तक पहुंचा हूती विद्रोहियों का खतरा, सऊदी की लड़ाई से बचने के लिए पाकिस्तान ने चली 'चाल'
सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले मार गिराया। सऊदी गठबंधन ने इसे मक्का की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है, जबकि हूती संगठन ने पवित्र शहर को निशाना बनाने से इनकार किया है। इसी बीच पाकिस्तान पर अपने नए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, इस्लामाबाद ने फिलहाल हूती ठिकानों पर सीधे सैन्य हमले में शामिल होने से दूरी बनाए रखी है और कहा है कि समझौते के तहत सैन्य कार्रवाई पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव ने अब मक्का की सुरक्षा को भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना दिया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले मार गिराने का दावा किया गया है।
इस घटना के बाद सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि मक्का, मदीना और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उसके लिए 'रेड लाइन' है। दूसरी तरफ हूती पक्ष ने मक्का या किसी इस्लामी पवित्र स्थल को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है।
मक्का के पास क्या हुआ?
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार, 15 सितंबर को शाम करीब 6:50 बजे मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया। उनका कहना है कि ड्रोन को पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।
सऊदी पक्ष ने इसे मक्का को निशाना बनाने की हूती कोशिश बताया है। गठबंधन के मुताबिक, 2017 के बाद यह दूसरी ऐसी घटना है जिसे मक्का पर संभावित हमले की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, हूती नेतृत्व ने इस दावे से इनकार किया है। हूती पक्ष का कहना है कि वह मक्का या अन्य इस्लामी पवित्र स्थलों को निशाना नहीं बना रहा है। ऐसे में घटना के उद्देश्य को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू पाकिस्तान-सऊदी रक्षा संबंध है। पाकिस्तान, सऊदी अरब का लंबे समय से रक्षा सहयोगी रहा है। हाल में दोनों देशों के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौता भी हुआ है, जिसके बाद सऊदी अरब पर हमला होने की स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
लेकिन इस्लामाबाद ने फिलहाल यह स्पष्ट किया है कि हूती ठिकानों पर हमले के लिए पाकिस्तानी सेना को भेजने का कोई तत्काल फैसला नहीं हुआ है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा है कि मक्का रक्षा समझौता एक व्यापक रक्षा ढांचा है और इसे लागू करने के लिए संस्थागत तंत्र एवं प्रक्रियाएं विकसित की जानी हैं। पाकिस्तान ने साथ ही यमन संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया है।
पाकिस्तान ने क्यों बनाई सैन्य कार्रवाई से दूरी?
पाकिस्तान के लिए स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि उसे एक तरफ सऊदी अरब के साथ रक्षा साझेदारी निभानी है, जबकि दूसरी तरफ हूती संघर्ष में सीधे उतरने से क्षेत्रीय युद्ध में उसकी सैन्य भागीदारी बढ़ सकती है।
Reuters के अनुसार, पाकिस्तान पिछले कुछ समय से सऊदी अरब का रक्षा साझेदार होने के साथ-साथ क्षेत्र में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है। हूती हमलों के बाद इस संतुलन को बनाए रखना इस्लामाबाद के लिए चुनौती बन गया है।
10 सितंबर को पाकिस्तान ने यह भी कहा था कि मक्का रक्षा समझौते के तहत किसी सैन्य प्रतिक्रिया पर उस समय कोई चर्चा नहीं हुई थी। हालांकि, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन को दोहराया था।
सऊदी अरब के साथ खड़ा है पाकिस्तान
पाकिस्तान ने हूती हमलों की निंदा करने में कोई संकोच नहीं किया है। उसके विदेश मंत्रालय ने 8 सितंबर को सऊदी अरब के अब्हा, खमीस मुशैत, जिजान और नजरान में नागरिक एवं आर्थिक ठिकानों पर हुए हमलों की निंदा की थी।
इस्लामाबाद ने कहा था कि वह सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और समृद्धि का समर्थन करता है। साथ ही उसने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही थी।
यानी पाकिस्तान की मौजूदा नीति को दो हिस्सों में देखा जा सकता है—सऊदी अरब के लिए राजनीतिक और सुरक्षा समर्थन, लेकिन यमन के अंदर हूती ठिकानों पर तत्काल सीधे सैन्य अभियान से दूरी।
क्या पाकिस्तान को युद्ध में उतरना पड़ेगा?
फिलहाल ऐसा कोई सार्वजनिक संकेत नहीं है कि पाकिस्तान ने हूती ठिकानों पर सैन्य हमले में शामिल होने का फैसला किया है। पाकिस्तान के अधिकारियों ने भी कहा है कि ऐसी कार्रवाई अभी चर्चा का विषय नहीं है।
हालांकि, अगर सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और बिगड़ती है या सऊदी सरकार औपचारिक रूप से रक्षा समझौते के तहत सहायता मांगती है, तो पाकिस्तान पर अपनी प्रतिबद्धताओं को लेकर फैसला लेने का दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह है कि मक्का के पास ड्रोन घटना ने मक्का रक्षा समझौते की वास्तविक परीक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। विश्लेषकों के बीच भी इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि समझौता किस परिस्थिति में सक्रिय होगा और उसकी सैन्य सीमाएं क्या होंगी।
मक्का की सुरक्षा क्यों बनी सबसे बड़ा मुद्दा?
मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां स्थित काबा दुनिया भर के मुसलमानों के लिए धार्मिक केंद्र है। हर साल हज और पूरे वर्ष उमरा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
इसी कारण सऊदी नेतृत्व ने मक्का की सुरक्षा को किसी भी सैन्य खतरे से अलग और अत्यंत संवेदनशील मुद्दा माना है। सऊदी गठबंधन ने भी कहा है कि पवित्र स्थलों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
आगे क्या?
मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्शन के बाद सऊदी अरब ने हूती हमलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। वहीं पाकिस्तान फिलहाल सऊदी अरब के साथ एकजुटता और कूटनीतिक समर्थन की नीति पर कायम है, लेकिन सीधे यमन युद्ध में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर उसने कोई सार्वजनिक निर्णय नहीं लिया है।
इस घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि मक्का रक्षा समझौता व्यवहार में किस तरह लागू होता है, और क्या सऊदी अरब औपचारिक रूप से पाकिस्तान से सैन्य सहायता मांगता है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक बयानों के आधार पर पाकिस्तान की रणनीति सऊदी सुरक्षा का समर्थन करते हुए सीधे युद्ध में उतरने से बचने की दिखाई देती है।
Keep reading
More in अंतरराष्ट्रीय समाचार
अंतरराष्ट्रीय समाचार
'मंच एक, रूप दो...' शांतिदूत से विनाश की धमकी तक; UN में ट्रंप के भाषण के मायने समझिए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में दिए भाषण में खुद को युद्धों और वैश्विक संकटों…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
'व्हाइट हाउस में आने-जाने की सुविधा विशेषाधिकार, अधिकार नहीं', ट्रंप द्वारा पत्रकारों पर बैन की DOJ ने बताई वजह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोकने के फैसले का बचाव किया है…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
'लश्कर-जैश अनगाइडेड मिसाइल हैं', ख्वाजा आसिफ को सता रहा पाकिस्तान के सीरिया-इराक बनने का डर
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एक पॉडकास्ट में उन्ह…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कश्मीर की महिला ने UN में उठाया PoK में पाकिस्तान की हिंसक कार्रवाई का मुद्दा, UNHRC से हस्तक्षेप की मांग
जम्मू-कश्मीर के बारामूला की सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र क…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
इस्लामाबाद में मास कैजुअल्टी का अलर्ट, इमरान खान की पार्टी के प्रदर्शन से पहले अस्पतालों की छुट्टियां रद
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के 27 सितंबर के प्रस्तावित इस्लामाबाद मार्च से पहले राजधा…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेंगे ईरानी राष्ट्रपति, अमेरिका ने होटल से बाहर जाने पर लगाई रोक
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं। अमेरिका ने ईरानी प्रत…
