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केन्या में पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा सप्लायर बना भारत, UAE और सऊदी अरब को छोड़ा पीछे

भारत ने केन्या के पेट्रोलियम उत्पादों के सबसे बड़े सप्लायर के रूप में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया है। उपलब्ध कमोडिटी-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, भारत से केन्या को पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल की आपूर्ति में तेज बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित शिपिंग ने पारंपरिक ईंधन आपूर्ति मार्गों को प्रभावित किया। भारत की बड़ी रिफाइनिंग क्षमता ने उसे अफ्रीकी बाजारों में अतिरिक्त ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने का अवसर दिया।

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केन्या में पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा सप्लायर बना भारत, UAE और सऊदी अरब को छोड़ा पीछे

केन्या के पेट्रोलियम बाजार में भारत की बड़ी छलांग

भारत ने अफ्रीकी देश केन्या के पेट्रोलियम उत्पाद बाजार में बड़ी बढ़त हासिल की है। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत अब केन्या को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है। इस क्रम में उसने लंबे समय से प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे UAE और सऊदी अरब को पीछे छोड़ा है।

कमोडिटी डेटा का हवाला देते हुए ऊर्जा अर्थशास्त्री अनास अलहज्जी ने बताया कि भारत ने केन्या को गैसोलीन, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल की आपूर्ति में UAE और सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया है।

पश्चिम एशिया संकट से बदली सप्लाई चेन

भारत की बढ़ती हिस्सेदारी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय ईंधन व्यापार में आया बदलाव माना जा रहा है। 2026 में पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति पर दबाव बढ़ा।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी 2026 के अपने ऑयल मार्केट आकलन में कहा था कि होर्मुज के जरिए समुद्री व्यापार में व्यवधान के कारण वैश्विक तेल बाजार में नए व्यापारिक रास्ते उभर रहे हैं।

केन्या पारंपरिक रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के लिए मध्य-पूर्वी सप्लायर्स पर काफी निर्भर रहा है। ऐसे में आपूर्ति मार्गों में बदलाव के बीच भारत से आने वाले कार्गो की भूमिका बढ़ी।

UAE की सप्लाई में आई बड़ी गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, केन्या को UAE से आने वाले पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में इस दौरान काफी गिरावट आई। उपलब्ध आंकड़ों में UAE की शिपमेंट लगभग 90,000 बैरल प्रतिदिन से घटकर करीब 15,000 बैरल प्रतिदिन तक आने का उल्लेख किया गया है।

इसी अवधि में भारत से केन्या जाने वाले पेट्रोलियम कार्गो बढ़े। इससे भारतीय रिफाइनरियों के लिए अफ्रीकी बाजार का महत्व और बढ़ गया।

भारत की रिफाइनिंग क्षमता बनी बड़ी ताकत

भारत खुद कच्चे तेल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, लेकिन देश में मौजूद विशाल रिफाइनिंग क्षमता उसे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक बनाती है।

भारत में 22 ऑपरेशनल रिफाइनरियों की कुल स्थापित क्षमता करीब 258.1 मिलियन टन सालाना बताई गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया।

गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स भी भारत की वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का प्रमुख हिस्सा है।

अफ्रीका को रिकॉर्ड स्तर पर ईंधन निर्यात

केन्या अकेला अफ्रीकी बाजार नहीं है जहां भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों की मांग बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में अफ्रीका को भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में सालाना आधार पर करीब 66 फीसदी की वृद्धि हुई।

इस बदलाव को वैश्विक ईंधन व्यापार में हो रहे पुनर्संयोजन से जोड़कर देखा जा रहा है। यूरोप में रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किए गए उत्पादों पर प्रतिबंधों के बाद भारतीय रिफाइनरियों के लिए कई नए बाजारों का महत्व बढ़ा है।

भारत-केन्या व्यापार में भी बढ़ी अहमियत

भारत और केन्या के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं। नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 4.31 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का केन्या को निर्यात करीब 4.01 अरब डॉलर और केन्या से भारत का आयात करीब 29 करोड़ डॉलर था।

भारत से केन्या को होने वाले प्रमुख निर्यात में पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा दवाएं, मशीनरी, अनाज, चीनी, प्लास्टिक, वाहन और इलेक्ट्रिकल मशीनरी शामिल हैं।

केन्या के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

केन्या के लिए ईंधन आपूर्ति में किसी एक क्षेत्र या सीमित सप्लायर्स पर निर्भरता कम करना महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब वैश्विक समुद्री मार्ग भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित हों।

हालांकि, भारत के सबसे बड़े सप्लायर बनने की स्थिति को वर्तमान व्यापार परिस्थितियों से जुड़ा बदलाव समझना जरूरी है। केन्या के कुल आयात में चीन, भारत, सऊदी अरब और UAE की संयुक्त हिस्सेदारी भी काफी बड़ी है। केन्या के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में इन चार देशों से कुल आयात देश के आयात बिल का 55.1 प्रतिशत था।

भारत के लिए बढ़ता अफ्रीकी बाजार

केन्या में यह बदलाव भारतीय रिफाइनिंग उद्योग के लिए अफ्रीकी बाजार की बढ़ती अहमियत को भी दिखाता है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार में आपूर्ति मार्गों में बदलाव के बीच भारत की रिफाइनिंग क्षमता उसे तैयार ईंधन के निर्यात में प्रतिस्पर्धी स्थिति देती है।

आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री परिवहन मार्गों और ईंधन की वैश्विक मांग के आधार पर भारत-केंद्रित सप्लाई में आगे भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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