लिथुआनिया में नाटो लड़ाकू विमानों ने बेलारूस से जुड़े संदिग्ध ड्रोन को मार गिराया, बढ़ा तनाव
लिथुआनिया के हवाई क्षेत्र में घुसे एक संदिग्ध ड्रोन को नाटो के लड़ाकू विमानों ने मार गिराया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ड्रोन के बेलारूस की दिशा से आने की आशंका है, हालांकि उसकी वास्तविक उत्पत्ति की अभी पुष्टि नहीं हुई है। यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बाल्टिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच हुई है। लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने नाटो की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ऐसी तत्परता बेहद जरूरी है।
लेखक
Vinay Mishra
लिथुआनिया के आसमान में घुसा ड्रोन, NATO ने किया ढेर
विलनियस: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप के बाल्टिक क्षेत्र में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। लिथुआनिया के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए एक संदिग्ध ड्रोन को नाटो के लड़ाकू विमानों ने मार गिराया है। यह घटना मंगलवार, 15 सितंबर 2026 की आधी रात के कुछ समय बाद हुई। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि ड्रोन बेलारूस की ओर से लिथुआनिया में दाखिल हुआ था।
कहां गिराया गया ड्रोन?
लिथुआनिया के नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर के मुताबिक, ड्रोन को प्रातकुनाई (Pratkunai) गांव के पास मार गिराया गया। यह इलाका देश के मध्य-दक्षिणी हिस्से में काउनास के नजदीक है।
अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन के हवाई क्षेत्र में दाखिल होने के बाद अलर्ट जारी किया गया और नाटो के एयर डिफेंस मिशन में तैनात लड़ाकू विमानों ने कार्रवाई की। ड्रोन के मलबे और उसकी वास्तविक पहचान की जांच की जा रही है।
बेलारूस से आने का शक, लेकिन पुष्टि बाकी
लिथुआनियाई अधिकारियों की शुरुआती जानकारी के अनुसार, ड्रोन बेलारूस की दिशा से आया हो सकता है। राष्ट्रीय संकट प्रबंधन केंद्र के प्रमुख विलमंतास वित्काउसकास ने बताया कि प्रारंभिक डेटा इसी दिशा की ओर इशारा करता है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्रोन की वास्तविक उत्पत्ति अभी पूरी तरह निर्धारित नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे सीधे तौर पर बेलारूस का सैन्य ड्रोन बताना जल्दबाजी होगी।
इतालवी पायलटों ने संभाला मोर्चा
लिथुआनिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नाटो के बाल्टिक एयर डिफेंस मिशन में शामिल इतालवी पायलटों ने ड्रोन को निष्क्रिय करने में भूमिका निभाई।
लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने नाटो की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस की यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता बढ़ने के बीच क्षेत्र में इस तरह की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है।
क्या रूस-यूक्रेन युद्ध का असर NATO सीमा तक पहुंच रहा है?
इस घटना ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असर नाटो के सदस्य देशों की सीमाओं तक फैल सकता है।
लिथुआनिया की सीमा बेलारूस के साथ लगती है और उसके पश्चिम में रूस का कालिनिनग्राद क्षेत्र भी है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद बाल्टिक देशों के हवाई क्षेत्र के आसपास ड्रोन गतिविधियों को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।
रॉयटर्स के अनुसार, इससे पहले भी यूक्रेनी सैन्य ड्रोन भटककर फिनलैंड, लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया के हवाई क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। यूक्रेन ने कुछ घटनाओं के लिए रूस की इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है।
NATO ने पहले भी मार गिराए हैं ड्रोन
बाल्टिक क्षेत्र में यह नाटो की पहली ऐसी कार्रवाई नहीं है। इस साल पहले भी नाटो के एयर पुलिसिंग मिशन से जुड़े लड़ाकू विमानों ने बाल्टिक देशों के आसपास संदिग्ध या भटके हुए ड्रोन के खिलाफ कार्रवाई की है।
लिथुआनिया के रक्षा मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, जून 2026 में नाटो लड़ाकू विमानों ने लातविया के पूर्वी हिस्से में एक संभावित ड्रोन की पहचान कर उसे नष्ट किया था।
लिथुआनिया ने क्यों बढ़ाई एयर डिफेंस सतर्कता?
लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया की भौगोलिक स्थिति उन्हें रूस और बेलारूस से जुड़े सुरक्षा जोखिमों के प्रति बेहद संवेदनशील बनाती है। तीनों देश नाटो के सदस्य हैं और गठबंधन का Baltic Air Policing Mission इन देशों के आसमान की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में किसी अज्ञात ड्रोन का हवाई क्षेत्र में प्रवेश केवल स्थानीय सुरक्षा घटना नहीं माना जाता, बल्कि इसे नाटो की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर भी देखा जाता है।
क्या यह बेलारूस की ओर से उकसावे की कार्रवाई थी?
फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि ड्रोन को जानबूझकर बेलारूस की ओर से लिथुआनिया में भेजा गया था। जांच एजेंसियां ड्रोन के मलबे, उड़ान मार्ग और तकनीकी विशेषताओं की जांच कर रही हैं।
इसलिए मौजूदा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ड्रोन लिथुआनिया के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ और नाटो लड़ाकू विमानों ने उसे मार गिराया, जबकि उसके स्रोत की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बड़ा सुरक्षा संदेश
इस घटना के बाद लिथुआनिया के विदेश मंत्री केसुतिस बुद्रिस ने नाटो की कार्रवाई को स्पष्ट संदेश बताया कि गठबंधन सतर्क और तैयार है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच लगातार हो रही ड्रोन गतिविधियों और नाटो देशों के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की घटनाएं यूरोप के लिए नई सुरक्षा चुनौती बनती जा रही हैं। लिथुआनिया में हुई यह कार्रवाई बताती है कि नाटो अब ऐसे हवाई खतरों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क और आक्रामक प्रतिक्रिया के लिए तैयार है।
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