'शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ दर्ज हो FIR', खरगे की रैली मामले में प्रियंका गांधी की पीएम मोदी से मांग
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित तौर पर हुए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि इस मामले में FIR दर्ज कर SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने इसे दलित नेता के अपमान और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधा है। वहीं, कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने शुद्धिकरण को जातिगत भेदभाव से जोड़ने के आरोपों को खारिज किया है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में FIR दर्ज कराने और SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रियंका गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि अगर प्रधानमंत्री संविधान का सम्मान करते हैं, तो उन्हें उत्तराखंड में कथित तौर पर यह कृत्य करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कराने और कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली से जुड़ा है। इस रैली को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संबोधित किया था। कांग्रेस का आरोप है कि रैली खत्म होने के बाद कार्यक्रम स्थल पर ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की गई। पार्टी ने इसे खरगे की दलित पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए जातिगत भेदभाव और छुआछूत का मामला बताया है।
मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी सार्वजनिक स्थान को किसी दलित नेता के वहां जाने के बाद ‘शुद्ध’ करने की कोशिश संविधान में निहित समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी से क्या मांग की?
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कथित घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि घटना के करीब 20 दिन बाद भी इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस नेता ने इसे संविधान और सामाजिक समानता से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
राहुल गांधी भी उठा चुके हैं मुद्दा
प्रियंका गांधी से एक दिन पहले राहुल गांधी ने भी इस विवाद को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से FIR दर्ज कराने की मांग की थी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए कहा था कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की कथित तौर पर शुद्धिकरण कार्यक्रम का बचाव करने वाली टिप्पणी पर भी सवाल उठाए और पूछा कि इतने दिन बाद भी FIR क्यों दर्ज नहीं हुई।
बीजेपी का क्या कहना है?
कांग्रेस के आरोपों के बीच कार्यक्रम के आयोजकों ने इस विवाद में जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है। उनके मुताबिक, आयोजन स्थल पर सफाई और स्वच्छता से जुड़ी वजहों से हवन कराया गया था और इसका खरगे की जाति से कोई संबंध नहीं था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आयोजकों ने दावा किया कि मंच पर गंदगी के कारण हवन किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मामले में किसी भेदभावपूर्ण मंशा से इनकार किया है।
जाति और राजनीति के बीच बढ़ी बहस
इस विवाद ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में जाति, सामाजिक समानता और धार्मिक परंपराओं को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इस मामले को दलित सम्मान और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे के तौर पर पेश कर रही है, जबकि बीजेपी और आयोजन से जुड़े लोग कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बता रहे हैं।
कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के कारण किसी सार्वजनिक स्थान पर उसके जाने के बाद ‘शुद्धिकरण’ किया जाता है, तो यह केवल राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि सामाजिक भेदभाव का गंभीर मामला है।
वहीं, दूसरी तरफ आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि हवन का उद्देश्य स्थल की सफाई और धार्मिक प्रक्रिया से जुड़ा था, न कि किसी व्यक्ति या समुदाय का अपमान करना।
FIR और SC/ST एक्ट की मांग पर टिकी नजर
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुलिस FIR दर्ज करती है और क्या SC/ST एक्ट के तहत कोई कार्रवाई होती है। कांग्रेस लगातार केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बना रही है।
प्रियंका गांधी की मांग के बाद यह विवाद उत्तराखंड की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों के हस्तक्षेप से साफ है कि कांग्रेस इसे दलित सम्मान और संविधान की रक्षा के बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
हालांकि, कथित ‘शुद्धिकरण’ के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी, इस पर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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