'हमें मजबूर न करें...', रिलीफ कैंपों में हुई मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर को लगाई फटकार
मणिपुर के राहत शिविरों में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगा है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अप्राकृतिक मौतों की जांच, FIR और पोस्टमार्टम को लेकर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि 34 मौतों में केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम क्यों कराया गया और अप्राकृतिक मौतों के पीड़ितों को महज 20-30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया।
लेखक
Jyoti Mukherjee
नई दिल्ली: मणिपुर में 2023 की हिंसा के बाद बनाए गए राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने विशेष रूप से उन मौतों का संज्ञान लिया, जिन्हें अप्राकृतिक बताया गया है और पूछा कि इन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने मणिपुर के मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई मौतों, खासकर अप्राकृतिक मौतों, को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
'हमें मजबूर न करें...' कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में हुई मौतों को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने राज्य से पूछा कि जस्टिस गीता मित्तल समिति की ओर से मौतों से संबंधित जानकारी दिए जाने के बावजूद इस दिशा में पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।
पीठ ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होगा। कोर्ट ने मणिपुर स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (MSLSA) को भी अप्राकृतिक मौतों के मामलों में FIR दर्ज कराने और जांच में तेजी सुनिश्चित करने को कहा।
34 मौतों में सिर्फ 20 पोस्टमार्टम क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर भी राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। पीठ ने सवाल किया कि 34 मौतों के मामलों में सिर्फ 20 मामलों में पोस्टमार्टम क्यों कराया गया?
कोर्ट ने मुख्य सचिव से यह बताने को कहा है कि मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और जिन मामलों में मौत अप्राकृतिक थी, उनमें जांच और कानूनी कार्रवाई की स्थिति क्या है।
मुआवजे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान पीठ ने अप्राकृतिक मौतों के मामलों में दिए गए मुआवजे को लेकर भी सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि राहत शिविरों में अप्राकृतिक मौत के शिकार हुए विस्थापित लोगों के परिवारों को केवल 20,000 से 30,000 रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया।
कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में भी विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
FIR और जांच को लेकर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को निर्देश दिया कि वह सभी अप्राकृतिक मौतों के मामलों में FIR दर्ज होने और उनकी जांच तेजी से आगे बढ़ने को सुनिश्चित करे।
इसके साथ ही राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
एक मौत में यौन हमले का भी आरोप
कोर्ट के सामने रखी गई जस्टिस गीता मित्तल समिति और एक IAS अधिकारी की रिपोर्टों में राहत शिविरों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया। इनमें से एक मौत के संबंध में कथित यौन हमले की बात भी सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों की जानकारी को गंभीरता से लेते हुए राज्य से जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
मणिपुर हिंसा के मामलों की जांच कहां तक पहुंची?
सुनवाई के दौरान केंद्र और CBI की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि CBI ने 31 मामलों की जांच की है और 28 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है, जबकि तीन मामलों की जांच अभी जारी है।
राज्य पुलिस की ओर से गठित 42 SIT ने आठ जिलों में 3,020 मामले दर्ज किए हैं। इनमें 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने की जानकारी दी गई। 1,135 मामलों में जांच जारी थी और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुके हैं।
2023 की हिंसा के बाद अब भी जारी है कानूनी प्रक्रिया
मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को हुई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। सुप्रीम कोर्ट इस हिंसा से जुड़े मामलों की जांच, पीड़ितों की सुरक्षा, राहत और पुनर्वास से जुड़े मामलों की लगातार निगरानी कर रहा है।
गुरुवार की सुनवाई में कोर्ट ने CBI और NIA से जुड़े मामलों के लिए स्थापित विशेष ट्रायल कोर्ट में सुनवाई जल्द पूरी होने की उम्मीद भी जताई।
राहत शिविरों में हुई मौतों पर अब मणिपुर के मुख्य सचिव का हलफनामा मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगा। इसमें मौतों के कारण, पोस्टमार्टम की स्थिति, FIR और जांच की प्रगति तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है।
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