क्या उपचुनाव में भी चलेगा 'थलापति' विजय का जादू? दोनों सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और TVK प्रमुख थलापति विजय ने आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए दो सीटों—मदुरांतकम और धारापुरम—पर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। मदुरांतकम से पूर्व AIADMK विधायक मरगथम कुमारवेल और धारापुरम से पी. सत्यबामा को मैदान में उतारा गया है। 6 अक्टूबर को होने वाला यह चुनाव विजय और उनकी TVK के लिए सत्ता संभालने के बाद पहला बड़ा राजनीतिक टेस्ट माना जा रहा है।
लेखक
Vinay Mishra
चेन्नई: अभिनेता से राजनेता बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय अब उपचुनाव की अग्निपरीक्षा के लिए तैयार हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। दोनों सीटों पर पार्टी ने ऐसे चेहरों पर दांव लगाया है, जिनका AIADMK से राजनीतिक जुड़ाव रहा है।
मदुरांतकम से मरगथम कुमारवेल, धारापुरम से सत्यबामा
TVK ने मदुरांतकम सीट से पूर्व AIADMK विधायक K. मरगथम कुमारवेल को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, धारापुरम से पी. सत्यबामा चुनाव लड़ेंगी। दोनों ही नेता पहले AIADMK से जुड़े रहे हैं और बाद में विजय की पार्टी में शामिल हुए।
विजय ने कहा है कि दोनों उम्मीदवार ‘Secular Social Justice Victory Alliance’ के सिद्धांतों के आधार पर चुनाव मैदान में उतरेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं से उनकी जीत के लिए पूरी ताकत लगाने की अपील की है।
6 अक्टूबर को होगा उपचुनाव
तमिलनाडु की इन दोनों विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी। नामांकन प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू होकर 16 सितंबर तक चलेगी।
ऐसे में दोनों सीटों पर आने वाले नतीजे TVK की मौजूदा राजनीतिक पकड़ को परखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
विजय के लिए क्यों है यह बड़ा टेस्ट?
2026 के विधानसभा चुनाव में विजय की TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया और सरकार बनाने में सफल रही। इसके बाद पार्टी की लोकप्रियता और संगठनात्मक ताकत की पहली बड़ी परीक्षा इन उपचुनावों में होगी।
यही वजह है कि मदुरांतकम और धारापुरम के नतीजों को सिर्फ दो सीटों की लड़ाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इन चुनावों से यह संकेत मिल सकता है कि विजय का स्टारडम वोटों में कितनी मजबूती से बदल रहा है।
क्या 'थलापति' फैक्टर काम करेगा?
विजय की सबसे बड़ी ताकत उनका विशाल प्रशंसक आधार रहा है। फिल्मों से राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक संगठन में बदलने की कोशिश की है। लेकिन उपचुनाव विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं—यहां स्थानीय उम्मीदवार, संगठन, जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और मतदान प्रतिशत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए मदुरांतकम और धारापुरम में जीत मिलने पर TVK इसे विजय की लोकप्रियता और संगठन की मजबूती के प्रमाण के तौर पर पेश कर सकती है। वहीं, अगर पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है तो विपक्ष विजय के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठा सकता है।
AIADMK के बागियों पर दांव क्यों?
दोनों उम्मीदवारों का AIADMK से पुराना संबंध TVK की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इससे पार्टी को स्थानीय राजनीतिक नेटवर्क और पुराने समर्थकों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
यानी विजय ने सिर्फ सेलिब्रिटी चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय राजनीतिक अनुभव रखने वाले नेताओं को मैदान में उतारा है।
DMK से भी होगी अहम टक्कर
दोनों सीटों पर मुकाबला TVK बनाम AIADMK तक सीमित रहने वाला नहीं है। DMK ने भी अपने उम्मीदवार तय कर लिए हैं, जिससे इन उपचुनावों में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन रही है।
ऐसे में वोटों का बंटवारा और स्थानीय गठबंधन समीकरण नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
विजय ने बनाया नया गठबंधन
उपचुनाव से ठीक पहले TVK ने कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML समेत सहयोगी दलों के साथ मिलकर ‘Secular Social Justice Victory Alliance’ नाम से अपना राजनीतिक मोर्चा औपचारिक रूप से सामने रखा है। इससे विजय अपनी पार्टी को व्यापक सामाजिक और राजनीतिक गठबंधन के रूप में स्थापित करने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
अब नतीजे बताएंगे कितना मजबूत है 'विजय मैजिक'
मदुरांतकम और धारापुरम के उपचुनाव TVK के लिए केवल दो सीटों की लड़ाई नहीं हैं। ये चुनाव यह भी बताएंगे कि विजय की लोकप्रियता विधानसभा चुनाव के बाद भी बरकरार है या नहीं और उनकी पार्टी का संगठन जमीनी स्तर पर कितना मजबूत है।
6 अक्टूबर को वोटिंग और 9 अक्टूबर को नतीजों के बाद साफ होगा कि 'थलापति' विजय का सिनेमा वाला करिश्मा उपचुनावी राजनीति में भी उतना ही असरदार है या नहीं।
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