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ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के समर्थन के बाद चर्चा में आया तुर्की, 31.5% महंगाई से अर्थव्यवस्था पर दबाव; भारत के खिलाफ रहा मुखर

तुर्की की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव अभी भी बना हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में देश की सालाना उपभोक्ता महंगाई दर 31.51% रही। हालांकि यह जुलाई के 31.75% से थोड़ी कम है, लेकिन खाद्य पदार्थ, परिवहन और आवास जैसी जरूरी श्रेणियों में कीमतें अब भी तेजी से बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के समर्थन को लेकर भारत और तुर्की के रिश्तों में तनाव बढ़ा था। तुर्की ने भारत की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की थी और पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया था। बाद में दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी हुए।

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ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के समर्थन के बाद चर्चा में आया तुर्की, 31.5% महंगाई से अर्थव्यवस्था पर दबाव; भारत के खिलाफ रहा मुखर

नई दिल्ली: भारत और तुर्की के बीच रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। खासकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के समर्थन को लेकर तुर्की का रुख भारत में चर्चा का विषय बना था। इसी बीच तुर्की की अर्थव्यवस्था एक बार फिर महंगाई की चुनौती से जूझ रही है।

तुर्की के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में सालाना महंगाई दर 31.51% रही। जुलाई में यह 31.75% थी। यानी महंगाई में मामूली कमी आई है, लेकिन कीमतों का स्तर अब भी काफी ऊंचा है।

तुर्की में 31.51% महंगाई का क्या मतलब?

तुर्की के सांख्यिकी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में उपभोक्ता कीमतों में महीने-दर-महीने 1.84% की वृद्धि हुई। सालाना आधार पर खाद्य और गैर-मादक पेय पदार्थों की कीमतों में 33.79%, परिवहन में 35.08% और आवास, पानी, बिजली, गैस तथा अन्य ईंधन से जुड़ी कीमतों में 39.77% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ता है। खास तौर पर भोजन, परिवहन और घर से जुड़ी लागत में लगातार ऊंची कीमतें महंगाई के दबाव को बनाए हुए हैं।

तुर्की के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में महंगाई जुलाई के मुकाबले कुछ कम हुई, लेकिन यह अभी भी 30% से ऊपर बनी हुई है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की का क्या रुख था?

भारत और तुर्की के संबंधों में तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण ऑपरेशन सिंदूर रहा। अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।

भारतीय आधिकारिक रुख के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर को पहलगाम हमले के जवाब में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के तौर पर अंजाम दिया गया था।

इस दौरान तुर्की ने भारत की सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं किया और पाकिस्तान के रुख के करीब नजर आया। Indian Express की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-तुर्की संबंधों में काफी तनाव आया था और तुर्की पाकिस्तान के समर्थन में मुखर देशों में शामिल था।

तुर्की और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी

तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं रणनीतिक संबंध पहले से मौजूद हैं। 2026 में दोनों देशों के बीच यह सहयोग और चर्चा में आया।

अगस्त 2026 में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक संयुक्त रक्षा समझौते के तहत रणनीतिक और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था बनाई। तीनों देशों के बीच इस समझौते के तहत साझा सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की बात कही गई है।

इसके अलावा अगस्त 2026 में तुर्की के सैन्य परिवहन विमानों की पाकिस्तान यात्रा को लेकर भी भारतीय रक्षा हलकों में सवाल उठे। रिपोर्टों में इन उड़ानों के संभावित सैन्य सामान और ड्रोन आपूर्ति से संबंध की चर्चा हुई, हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से हर खेप की सामग्री की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।

क्या तुर्की की अर्थव्यवस्था संकट में है?

31.51% महंगाई निश्चित रूप से तुर्की की अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती को दिखाती है, लेकिन सिर्फ महंगाई के आंकड़े के आधार पर पूरी अर्थव्यवस्था को “बेहाल” कहना आर्थिक स्थिति का पूर्ण आकलन नहीं होगा।

तुर्की के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 की सालाना CPI महंगाई 31.51% थी, जबकि जनवरी में यह 30.65% और मई में 32.61% थी। यानी महंगाई में कुछ उतार-चढ़ाव के बावजूद यह ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

तुर्की सरकार की ओर से महंगाई कम करने के लिए मौद्रिक और आर्थिक नीतियों पर जोर दिया जा रहा है। अगस्त में सालाना महंगाई जुलाई की तुलना में कुछ नीचे आई थी।

महंगाई में किन चीजों का सबसे ज्यादा योगदान?

अगस्त 2026 के आंकड़ों में तीन बड़े खर्च समूह विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहे:

  • खाद्य और गैर-मादक पेय: सालाना वृद्धि 33.79%

  • परिवहन: सालाना वृद्धि 35.08%

  • आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन: सालाना वृद्धि 39.77%

मासिक आधार पर परिवहन की कीमतों में 4.82% की वृद्धि अगस्त की महंगाई में सबसे बड़ा योगदान देने वाले कारकों में रही।

भारत-तुर्की रिश्तों में अब क्या स्थिति है?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा था, लेकिन 2026 में भारत और तुर्की ने संबंधों को पूरी तरह टकराव की दिशा में ले जाने के बजाय कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की कोशिश की है।

Indian Express के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद तनाव के बावजूद दोनों देशों ने बाद में राजनयिक संपर्क और सुरक्षा सहयोग के जरिए रिश्तों को स्थिर करने की दिशा में कदम उठाए।

वहीं पाकिस्तान के साथ तुर्की की रक्षा साझेदारी भी जारी है। अगस्त 2026 में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौते से जुड़े संस्थागत ढांचे पर आगे बढ़ने की खबरें सामने आईं।

भारत के लिए तुर्की का रुख क्यों महत्वपूर्ण है?

तुर्की NATO का सदस्य है और पश्चिम एशिया, यूरोप तथा दक्षिण एशिया के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थिति रखता है। पाकिस्तान के साथ उसके रक्षा संबंध और भारत के साथ उसके आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंध दोनों ही नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के पाकिस्तान समर्थक रुख को भारत में गंभीरता से देखा गया। हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए और बाद में संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी रहीं।

निष्कर्ष

तुर्की इस समय 31.51% की वार्षिक महंगाई से जूझ रहा है। अगस्त में महंगाई दर में मामूली गिरावट जरूर आई, लेकिन खाद्य, परिवहन और आवास जैसी जरूरी श्रेणियों में कीमतों की वृद्धि अब भी काफी ऊंची है।

दूसरी ओर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के समर्थन ने भारत-तुर्की संबंधों में तनाव पैदा किया था। हालांकि 2026 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क और संबंधों को स्थिर करने की कोशिशें भी जारी हैं। इसलिए तुर्की की आर्थिक चुनौतियों और भारत के साथ उसके संबंधों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है।

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