संसदीय समिति की बैठक में UPI पर टैक्स का कांग्रेस सांसदों ने नहीं किया था विरोध? छिड़ा विवाद
UPI भुगतान पर नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। केंद्र की ओर से यह सवाल उठाया गया कि वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति की उस रिपोर्ट को अपनाते समय पांच कांग्रेस सांसद मौजूद थे, जिसमें UPI के लिए चरणबद्ध MDR और टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी और प्रकाशित कार्यवाही में किसी असहमति का उल्लेख नहीं है। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि समिति के सामने मौजूदा UPI शुल्क का कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं रखा गया था। इसलिए समिति की सामान्य MDR संबंधी सिफारिश को हाल में घोषित शुल्क का समर्थन मानना सही नहीं है।
लेखक
Jyoti Mukherjee
नई दिल्ली: UPI पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति की पुरानी सिफारिशों का हवाला देते हुए यह सवाल उठाया गया कि जब समिति ने UPI के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल और चरणबद्ध Merchant Discount Rate (MDR) की जरूरत बताई थी, तब उसमें शामिल कांग्रेस सांसदों ने इसका विरोध क्यों नहीं किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, समिति ने अपनी रिपोर्ट में UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक सरकारी सहायता पर निर्भर रखने के बजाय एक टिकाऊ राजस्व व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई थी। रिपोर्ट को 12 अगस्त को अपनाया गया था। उस समय समिति में पांच कांग्रेस सांसद—पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ—मौजूद थे। प्रकाशित कार्यवाही में इन सांसदों की ओर से कोई अलग असहमति दर्ज होने की बात सामने नहीं आई है।
क्या थी संसदीय समिति की सिफारिश?
वित्त संबंधी स्थायी समिति ने UPI के लिए टियर आधारित MDR या राजस्व मॉडल की जरूरत पर जोर दिया था। समिति का तर्क था कि UPI के संचालन और उसके विस्तार की लागत को लंबे समय तक सरकारी खजाने से पूरा करना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता।
रिपोर्ट में MDR व्यवस्था को जल्द अधिसूचित कर लागू करने की बात कही गई थी। इसी सिफारिश को अब केंद्र की ओर से कांग्रेस की मौजूदा आपत्ति के संदर्भ में सामने रखा जा रहा है।
कांग्रेस सांसदों ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस दावे को खारिज किया कि संसदीय समिति ने मौजूदा UPI शुल्क प्रस्ताव का समर्थन किया था। उनका कहना है कि जब वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि समिति के सदस्यों के सामने आए थे, तब UPI टैक्स या मौजूदा MDR का कोई विशिष्ट प्रस्ताव मौजूद नहीं था।
गोगोई के मुताबिक, बैठक में MDR की जरूरत से जुड़े सवाल जरूर उठे थे, लेकिन सरकार की ओर से उस समय कोई स्पष्ट या संतोषजनक प्रस्ताव सामने नहीं रखा गया था। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि हाल में लागू किए जाने वाले विशिष्ट MDR प्रस्ताव को समिति के सामने नहीं रखा गया था।
केंद्र और कांग्रेस के दावों में अंतर क्या है?
विवाद का मुख्य बिंदु 'MDR की सामान्य सिफारिश' और 'मौजूदा UPI शुल्क के विशिष्ट प्रस्ताव' के बीच का अंतर है।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि समिति ने UPI के लिए टियर आधारित MDR/राजस्व व्यवस्था की सिफारिश की थी और पांच कांग्रेस सांसद उस समिति का हिस्सा थे। प्रकाशित कार्यवाही में किसी असहमति का उल्लेख नहीं होने को भी इसी संदर्भ में उठाया जा रहा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसदों का कहना है कि समिति की चर्चा को हाल में घोषित विशिष्ट UPI शुल्क के समर्थन के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता, क्योंकि उस समय ऐसा कोई प्रस्ताव समिति के सामने नहीं था।
UPI पर नया शुल्क क्या है?
केंद्र सरकार के अनुसार, नया MDR टैक्स नहीं है और इसे सरकार या NPCI सीधे वसूल नहीं करेगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, निर्धारित परिस्थितियों में MDR भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच वितरित होगा। सरकार ने यह भी कहा है कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI भुगतान मुफ्त रहेगा और ₹2,000 तक के कई छोटे व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे।
सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस नए ढांचे से प्रभावित नहीं होंगे। निर्धारित सीमा से ऊपर के कुछ व्यापारी लेनदेन पर MDR लागू होगा।
क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
UPI शुल्क को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल सरकार से इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच संसदीय समिति की पुरानी सिफारिश सामने आने के बाद राजनीतिक बहस का एक नया पहलू जुड़ गया है।
केंद्र की ओर से समिति की सिफारिश और उसमें शामिल कांग्रेस सांसदों की मौजूदगी का हवाला दिया जा रहा है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि किसी विशिष्ट UPI शुल्क प्रस्ताव पर उनकी ओर से सहमति नहीं दी गई थी।
इस तरह विवाद सिर्फ UPI शुल्क पर नहीं, बल्कि संसदीय समिति की पुरानी सिफारिशों की व्याख्या को लेकर भी खड़ा हो गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि समिति ने UPI के लिए टिकाऊ राजस्व/MDR मॉडल की जरूरत पर चर्चा की थी, लेकिन कांग्रेस सांसद मौजूदा विशिष्ट शुल्क प्रस्ताव को उस सिफारिश के बराबर मानने से इनकार कर रहे हैं।
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