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'हमने अंतरिक्ष में तैनात कर रखे हैं हथियार', रूस-चीन को चेतावनी देते हुए अमेरिका ने पहली बार की पुष्टि

अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है कि उसके पास पृथ्वी की कक्षा में तैनात 'ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स' हैं। अमेरिकी वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक ने कहा कि ये हथियार दुश्मन की कार्रवाई से अमेरिकी सैन्य बलों की रक्षा करने में सक्षम हैं। हालांकि, हथियारों की सटीक प्रकृति और संख्या का खुलासा नहीं किया गया है। यह घोषणा चीन और रूस के साथ बढ़ती अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा के बीच हुई है और इसे दोनों देशों के लिए स्पष्ट रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।

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'हमने अंतरिक्ष में तैनात कर रखे हैं हथियार', रूस-चीन को चेतावनी देते हुए अमेरिका ने पहली बार की पुष्टि

अंतरिक्ष में अमेरिका के हथियार, पहली बार खुलासा

वॉशिंगटन: अंतरिक्ष में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका ने बड़ा खुलासा किया है। अमेरिकी वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक (Troy Meink) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से पुष्टि की कि अमेरिका के पास पृथ्वी की कक्षा में स्पेस कंट्रोल वेपन्स तैनात हैं। उन्होंने कहा कि इन हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य बलों को विरोधी देशों की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई से बचाने के लिए किया जा सकता है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका लगातार चीन और रूस की अंतरिक्ष सैन्य क्षमताओं को लेकर चिंता जताता रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक दोनों देश ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो उपग्रहों को बाधित या नुकसान पहुंचाने में सक्षम हो सकती है।

ट्रॉय मिंक ने क्या कहा?

मैरीलैंड में आयोजित Air, Space & Cyber Conference 2026 में बोलते हुए मिंक ने कहा कि अमेरिका के पास अब ऐसे 'on-orbit space control weapons' हैं, जो संयुक्त सैन्य बलों को दुश्मन की कार्रवाई से बचाने में सक्षम हैं।

हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये हथियार किस तरह के हैं, कितने हथियार अंतरिक्ष में तैनात हैं या इन्हें कब लॉन्च किया गया था।

अमेरिकी अंतरिक्ष बल ने भी स्पष्ट किया है कि इन क्षमताओं के परिचालन तरीकों, पेलोड और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

क्या ये हथियार दुश्मन के सैटेलाइट को नष्ट कर सकते हैं?

अमेरिका ने हथियारों की सटीक क्षमता की पुष्टि नहीं की है। लेकिन अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, 'space control' में ऐसी क्षमताएं शामिल हो सकती हैं जिनका इस्तेमाल विरोधी की अंतरिक्ष क्षमताओं को बाधित, कमजोर या जरूरत पड़ने पर नष्ट करने के लिए किया जा सकता है। ये क्षमताएं रक्षात्मक और आक्रामक दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसमें दुश्मन के ऐसे सैटेलाइट को निशाना बनाने की क्षमता भी शामिल हो सकती है जो अमेरिकी सैनिकों या अमेरिकी अंतरिक्ष परिसंपत्तियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा हो। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वर्तमान में तैनात अमेरिकी सिस्टम वास्तव में किस तकनीक पर आधारित हैं।

रूस और चीन को सीधा संदेश

अमेरिका का यह खुलासा सिर्फ सैन्य क्षमता की जानकारी देना नहीं माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे deterrence यानी दुश्मन को हमला करने से रोकने की रणनीति से जोड़ा है।

अमेरिका लंबे समय से चीन और रूस की एंटी-सैटेलाइट क्षमताओं पर चिंता जताता रहा है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, दोनों देश ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जिनका इस्तेमाल अमेरिकी अंतरिक्ष-आधारित सैन्य प्रणालियों को बाधित या कमजोर करने के लिए किया जा सकता है।

इसलिए अंतरिक्ष में अमेरिकी हथियारों की सार्वजनिक पुष्टि को बीजिंग और मॉस्को के लिए यह संदेश माना जा रहा है कि अमेरिका संभावित अंतरिक्ष संघर्ष के लिए केवल तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि कुछ क्षमताएं पहले ही तैनात कर चुका है।

क्या है चीन और रूस की तैयारी?

अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, चीन तेजी से अपने अंतरिक्ष और काउंटरस्पेस सिस्टम विकसित कर रहा है। चीन के पास बड़ी संख्या में निगरानी और संचार उपग्रह हैं और वह अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता बढ़ा रहा है।

रूस के पास भी एंटी-सैटेलाइट क्षमता विकसित करने का लंबा रिकॉर्ड है। अमेरिकी आकलन के मुताबिक रूस ने 2021 में एक एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण के दौरान एक निष्क्रिय उपग्रह को नष्ट किया था, जिससे बड़ी मात्रा में अंतरिक्ष मलबा पैदा हुआ था।

Reuters की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और चीन दोनों ऐसे सैन्य अंतरिक्ष अभियानों पर काम कर रहे हैं जिनमें दूसरे उपग्रहों की निगरानी और संभावित रूप से उन्हें निशाना बनाने की क्षमता शामिल हो सकती है।

क्या अंतरिक्ष में हथियार रखना कानूनी है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 1967 का Outer Space Treaty परमाणु हथियारों और अन्य Weapons of Mass Destruction को पृथ्वी की कक्षा में रखने पर रोक लगाता है। लेकिन यह संधि सभी प्रकार के पारंपरिक हथियारों को अंतरिक्ष में रखने पर व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाती।

अमेरिकी स्पेस फोर्स का कहना है कि उसकी अंतरिक्ष गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून और Outer Space Treaty के अनुरूप हैं।

क्या शुरू हो सकती है अंतरिक्ष में हथियारों की नई दौड़?

अमेरिका के इस ऐलान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे Space Arms Race और तेज होगी।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, चीन और रूस एक-दूसरे की अंतरिक्ष क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए नई आक्रामक प्रणालियां तैनात करते हैं, तो इससे अंतरिक्ष में तनाव बढ़ सकता है। इससे सैन्य उपग्रहों के साथ-साथ संचार, GPS, मौसम और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष सेवाओं पर भी जोखिम बढ़ सकता है।

अमेरिका ने क्या छिपाकर रखा है?

अमेरिका ने यह तो पहली बार स्वीकार कर लिया है कि उसके पास ऑन-ऑर्बिट हथियार हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण जानकारी अभी भी गुप्त है—इन हथियारों की संख्या कितनी है, वे किस कक्षा में हैं और उनकी वास्तविक मारक क्षमता क्या है।

यही गोपनीयता इस घोषणा को और महत्वपूर्ण बनाती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिका अंतरिक्ष को भविष्य के संभावित युद्धक्षेत्र के रूप में गंभीरता से ले रहा है और चीन तथा रूस को यह संकेत दे रहा है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर पीछे नहीं है।

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