'ब्रिक्स का भविष्य उज्ज्वल', 7 साल बाद दिल्ली पहुंचे शी चिनफिंग; चीन ने दिया निष्पक्षता और न्याय का संदेश
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं, जहां वह नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। उनके दौरे से पहले चीन के सरकारी मीडिया ने BRICS को निष्पक्षता, न्याय, खुलेपन और समावेशिता पर आधारित मंच बताते हुए कहा कि समूह का भविष्य उज्ज्वल है। शी की यात्रा भारत-चीन संबंधों में हालिया नरमी और दोनों देशों के बीच मतभेदों को संभालने की कोशिशों के बीच हो रही है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS Summit आयोजित किया जा रहा है। शी की भारत यात्रा को BRICS के साथ-साथ भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
शी के दिल्ली पहुंचने से पहले चीन ने BRICS को लेकर अपना संदेश भी स्पष्ट किया। चीन के सरकारी मीडिया Global Times ने कहा कि BRICS की ताकत उसके खुलेपन, समावेशिता, परस्पर लाभ और निष्पक्षता एवं न्याय की प्रतिबद्धता में है। साथ ही कहा गया कि बदलती और अशांत दुनिया में BRICS सहयोग का महत्व बढ़ रहा है और समूह का भविष्य उज्ज्वल है।
7 साल बाद भारत आए शी चिनफिंग
शी चिनफिंग की भारत यात्रा करीब सात साल बाद हो रही है। इससे पहले वह अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। इसके बाद 2020 के गलवान संघर्ष के कारण दोनों देशों के रिश्तों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था।
हाल के महीनों में हालांकि दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क बढ़ा है। सीमा पर तनाव कम करने, सीधे संपर्क बहाल करने और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
चीन ने BRICS को बताया ‘भविष्य का मंच’
शी के दौरे से पहले चीनी सरकारी मीडिया ने BRICS को लेकर काफी सकारात्मक संदेश दिया। Global Times के मुताबिक, संगठन की ताकत खुलेपन, समावेशिता और win-win cooperation में है।
चीन का कहना है कि दुनिया में अस्थिरता बढ़ने के साथ BRICS देशों के बीच सहयोग का महत्व और बढ़ रहा है। बीजिंग ने समूह के पास मौजूद “विशाल संभावनाओं” और उज्ज्वल भविष्य पर जोर दिया।
निष्पक्षता और न्याय पर चीन का जोर
चीनी संदेश में खास तौर पर fairness और justice यानी निष्पक्षता और न्याय की बात सामने आई है।
बीजिंग BRICS को ऐसे मंच के रूप में पेश कर रहा है जहां ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक शासन, आर्थिक व्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
चीन ने BRICS के विस्तार और विकासशील देशों के बीच सहयोग को भी अपनी प्राथमिकताओं से जोड़ा है।
Xi-Modi की मुलाकात पर टिकी नजर
शी के भारत पहुंचने के साथ ही सबसे ज्यादा नजरें उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक पर हैं।
बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश, वीजा और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। हालांकि BRICS मंच पर दोनों देशों की नजदीकी का मतलब यह नहीं है कि सीमा विवाद पूरी तरह खत्म हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों देश फिलहाल मतभेदों को नियंत्रित करते हुए सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
गलवान के बाद रिश्तों में आई थी खटास
2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।
इसके बाद सैन्य और राजनयिक स्तर पर लंबे समय तक बातचीत चलती रही। हाल के दौर में सीमा पर स्थिरता और संवाद बढ़ाने की कोशिशों ने रिश्तों में कुछ नरमी पैदा की है। लेकिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक अविश्वास अभी भी बना हुआ है।
BRICS में चीन की बड़ी भूमिका
चीन BRICS के संस्थापक देशों में शामिल है और लंबे समय से समूह के विस्तार और प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश करता रहा है।
Global Times ने बताया कि Xi Jinping ने 2013 से BRICS Plus जैसी अवधारणाओं समेत कई पहल आगे बढ़ाईं। चीन ने New Development Bank, BRICS विस्तार और शांति, नवाचार, हरित विकास तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसी पहलों का भी समर्थन किया है।
2027 में चीन संभालेगा BRICS की अध्यक्षता
नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के बाद 2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन के पास जाएगी। ऐसे में इस सम्मेलन को बीजिंग के लिए अगले साल की प्राथमिकताओं की जमीन तैयार करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, चीन अगले साल बहुपक्षवाद, सदस्य देशों के बीच एकजुटता और विकास रणनीतियों के बेहतर तालमेल पर जोर दे सकता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, AI, हरित विकास, गरीबी उन्मूलन और कृषि जैसे क्षेत्रों को भी सहयोग के संभावित क्षेत्र बताया गया है।
भारत-चीन संबंधों में ‘नजदीकी’ या सिर्फ रणनीतिक मजबूरी?
शी की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी।
Lowy Institute के विश्लेषण के मुताबिक, भारत और चीन दोनों BRICS को सफल बनाना चाहते हैं, लेकिन दोनों की दीर्घकालिक प्राथमिकताएं अलग हैं। BRICS दोनों देशों के लिए संवाद बनाए रखने और साझा हितों पर काम करने का माध्यम है, लेकिन इससे सीमा विवाद या रणनीतिक अविश्वास खत्म नहीं हो जाता।
यानी दिल्ली और बीजिंग के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।
ग्लोबल साउथ के लिए क्या मायने?
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और उसका फोकस Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability पर है।
चीन की तरफ से BRICS को निष्पक्षता और न्याय के मंच के रूप में पेश करना भारत की उस कोशिश से भी मेल खाता है, जिसमें ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक संस्थानों में मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक व्यापार और आर्थिक शासन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद भी सामने आ सकते हैं।
शी की यात्रा पर दुनिया की नजर
शी चिनफिंग की सात साल बाद भारत यात्रा सिर्फ BRICS सम्मेलन में उनकी मौजूदगी तक सीमित नहीं है। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन अपने रिश्तों को एक नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन का “BRICS का भविष्य उज्ज्वल है” वाला संदेश साफ संकेत देता है कि बीजिंग इस मंच को आने वाले वर्षों में और प्रभावशाली बनाना चाहता है। लेकिन भारत के लिए चुनौती यह होगी कि BRICS सहयोग को आगे बढ़ाते हुए वह अपनी रणनीतिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं को भी संतुलित रखे।
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