एजुकेशन लोन से जुड़े हर सवाल का जवाब: 7.5 लाख रुपये तक बिना सिक्योरिटी लोन, 15 साल तक रीपेमेंट का विकल्प
उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के बीच एजुकेशन लोन छात्रों और परिवारों के लिए पढ़ाई का खर्च जुटाने का एक अहम विकल्प है। कई मामलों में 7.5 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन बिना संपत्ति को गिरवी रखे मिल सकता है। लोन की अवधि, ब्याज, मार्जिन, कोर्स, संस्थान और बैंक की शर्तों के आधार पर नियम अलग-अलग हो सकते हैं। जानिए एजुकेशन लोन लेने से पहले किन बातों पर ध्यान देना चाहिए।
Written by
Vinay Mishra
एजुकेशन लोन से जुड़े हर सवाल का जवाब: 7.5 लाख तक बिना सिक्योरिटी लोन, 15 साल तक रीपेमेंट का विकल्प
नई दिल्ली: देश और विदेश में उच्च शिक्षा की फीस लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ या अन्य प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई के लिए कई परिवार Education Loan का सहारा लेते हैं। एजुकेशन लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पढ़ाई का खर्च एक साथ देने के बजाय उसे लोन के जरिए मैनेज किया जा सकता है और कई मामलों में पढ़ाई पूरी होने के बाद रीपेमेंट शुरू होता है।
हालांकि, एजुकेशन लोन लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि कितनी रकम बिना सिक्योरिटी मिल सकती है, ब्याज कितना लगेगा, रीपेमेंट कब शुरू होगा और कुल कितने साल में लोन चुकाना होगा।
7.5 लाख रुपये तक बिना सिक्योरिटी लोन
भारत में शिक्षा ऋण के लिए आमतौर पर Credit Guarantee Fund Scheme for Education Loan (CGFSEL) का प्रावधान महत्वपूर्ण है। पात्र मामलों में 7.5 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन पर अलग से संपत्ति की सिक्योरिटी की जरूरत नहीं पड़ सकती।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर छात्र को किसी भी बैंक से अपने आप 7.5 लाख रुपये का लोन मिल जाएगा। बैंक छात्र की शैक्षणिक योग्यता, संस्थान, कोर्स, सह-आवेदक की वित्तीय स्थिति और अपनी क्रेडिट पॉलिसी के आधार पर आवेदन का मूल्यांकन करता है।
इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा शर्तों को जरूर जांचना चाहिए।
एजुकेशन लोन में किन खर्चों को शामिल किया जा सकता है?
एजुकेशन लोन सिर्फ कॉलेज की फीस के लिए ही नहीं होता। पात्रता और बैंक की योजना के अनुसार इसमें कई तरह के शिक्षा संबंधी खर्च शामिल हो सकते हैं।
इनमें आम तौर पर शामिल हो सकते हैं:
कॉलेज या संस्थान की ट्यूशन फीस
परीक्षा और लाइब्रेरी फीस
हॉस्टल का खर्च
किताबें और जरूरी उपकरण
कंप्यूटर या अन्य आवश्यक उपकरण
यात्रा से जुड़े कुछ खर्च
कोर्स के लिए जरूरी अन्य शैक्षणिक खर्च
हालांकि, हर बैंक और लोन योजना में खर्चों की सीमा अलग हो सकती है।
रीपेमेंट 15 साल तक करने का विकल्प
एजुकेशन लोन की एक खासियत इसकी लंबी रीपेमेंट अवधि है। कुछ बैंक और योजनाएं 15 साल तक की अवधि उपलब्ध कराती हैं। इससे छात्र या परिवार पर हर महीने की EMI का दबाव कम किया जा सकता है।
लेकिन लंबी अवधि का मतलब यह भी है कि लोन पर कुल ब्याज ज्यादा हो सकता है। इसलिए सिर्फ कम EMI देखकर लंबी अवधि चुनना हमेशा बेहतर फैसला नहीं होता।
अगर आपकी आय अनुमति देती है तो कम अवधि में लोन चुकाने से कुल ब्याज खर्च कम किया जा सकता है।
पढ़ाई के दौरान EMI देनी पड़ती है क्या?
एजुकेशन लोन में कई मामलों में छात्र को पढ़ाई के दौरान तुरंत पूरी EMI नहीं चुकानी पड़ती। बैंक की शर्तों के अनुसार moratorium period दिया जा सकता है।
यह अवधि आमतौर पर कोर्स की अवधि और उसके बाद निर्धारित अतिरिक्त समय से जुड़ी होती है। इसके बाद लोन की नियमित किस्त शुरू होती है।
लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि मोरेटोरियम के दौरान ब्याज का क्या होगा। कई मामलों में ब्याज जमा होता रहता है और बाद में लोन की कुल देनदारी में शामिल हो सकता है।
इसलिए लोन लेते समय बैंक से साफ पूछें कि पढ़ाई के दौरान ब्याज कैसे कैलकुलेट होगा।
एजुकेशन लोन के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
आमतौर पर एजुकेशन लोन के लिए छात्र मुख्य आवेदक होता है और माता-पिता या अभिभावक सह-आवेदक हो सकते हैं। बैंक की शर्तों के अनुसार छात्र का किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या पात्र कोर्स में प्रवेश होना जरूरी हो सकता है।
लोन मंजूर करने से पहले बैंक कोर्स, कॉलेज, फीस और छात्र के अकादमिक रिकॉर्ड सहित कई चीजों की जांच कर सकता है।
कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
एजुकेशन लोन के आवेदन में बैंक आमतौर पर छात्र और सह-आवेदक से कई दस्तावेज मांग सकता है।
इनमें शामिल हो सकते हैं:
पहचान और पते का प्रमाण
शैक्षणिक प्रमाणपत्र
कॉलेज/संस्थान का एडमिशन लेटर
फीस स्ट्रक्चर
पासपोर्ट साइज फोटो
माता-पिता या सह-आवेदक की आय का प्रमाण
बैंक स्टेटमेंट
जरूरी होने पर अन्य वित्तीय दस्तावेज
दस्तावेजों की सूची बैंक और लोन की रकम के अनुसार बदल सकती है।
ब्याज दर की तुलना करना क्यों जरूरी?
एजुकेशन लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना जरूर करें। ब्याज दर में थोड़ा अंतर भी लंबी अवधि के लोन में बड़ी रकम का अंतर पैदा कर सकता है।
इसके साथ यह भी देखें कि ब्याज फिक्स्ड है या फ्लोटिंग, EMI कब शुरू होगी और ब्याज की गणना किस तरह होगी।
टैक्स में भी मिल सकता है फायदा
एजुकेशन लोन के ब्याज भुगतान पर Income Tax Act की धारा 80E के तहत पात्र करदाताओं को टैक्स लाभ मिल सकता है। यह लाभ लोन के मूलधन पर नहीं, बल्कि पात्र परिस्थितियों में भुगतान किए गए ब्याज पर मिलता है।
हालांकि, टैक्स नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं और अलग-अलग टैक्स रिजीम में लाभ की उपलब्धता अलग हो सकती है। इसलिए टैक्स क्लेम करने से पहले मौजूदा नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।
लोन लेने से पहले इन 7 बातों की जांच करें
एजुकेशन लोन साइन करने से पहले इन सवालों के जवाब जरूर लें:
कुल कितनी रकम मिलेगी?
ब्याज दर कितनी है?
क्या सिक्योरिटी या गारंटर की जरूरत है?
मोरेटोरियम अवधि कितनी है?
रीपेमेंट कितने साल में करना होगा?
प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज कितना है?
कुल मिलाकर कितनी रकम वापस करनी होगी?
कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं
मान लीजिए दो बैंकों के लोन में एक की EMI कम है। जरूरी नहीं कि वही लोन आपके लिए सस्ता हो। अगर उसकी अवधि ज्यादा है तो आप लंबे समय तक ब्याज चुका सकते हैं।
इसलिए EMI के बजाय कुल भुगतान और कुल ब्याज की तुलना करें।
एजुकेशन लोन लेने से पहले करें पूरी प्लानिंग
एजुकेशन लोन पढ़ाई का खर्च पूरा करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे मुफ्त पैसा नहीं समझना चाहिए। आखिरकार यह एक कर्ज है जिसे भविष्य में चुकाना होगा।
छात्र और परिवार को कोर्स की फीस, रहने का खर्च, संभावित नौकरी और शुरुआती आय को ध्यान में रखते हुए लोन की रकम तय करनी चाहिए। जितना जरूरी हो उतना ही लोन लेना और संभव हो तो अतिरिक्त ब्याज बोझ कम रखना बेहतर वित्तीय रणनीति हो सकती है।
सबसे जरूरी बात: 7.5 लाख रुपये तक बिना सिक्योरिटी लोन और 15 साल तक रीपेमेंट जैसी सुविधाएं कुछ पात्र योजनाओं और बैंक की शर्तों के तहत उपलब्ध हो सकती हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा ब्याज दर, पात्रता, सिक्योरिटी नियम और रीपेमेंट शर्तें जरूर जांच लें।
