लद्दाख की छठी अनुसूची की मांग के समर्थन में उतरे खरगे, लेह गोलीबारी में मारे गए चार लोगों के लिए मांगा न्याय
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लद्दाख के लिए संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने लेह में पिछले साल हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान मारे गए चार लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए घटना की न्यायिक जांच में सच्चाई सामने लाने और जवाबदेही तय करने की मांग की। खरगे ने कहा कि लद्दाख की जमीन, रोजगार, पर्यावरण, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा के लिए प्रभावी संवैधानिक उपाय जरूरी हैं। हालांकि, इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार पहले ही 24 सितंबर 2025 की घटना की न्यायिक जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में जांच अधिसूचित कर चुकी है।
Written by
Vinay Mishra
लद्दाख के मुद्दे पर खरगे का बड़ा बयान
नई दिल्ली: लद्दाख में संवैधानिक सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारों को लेकर चल रही मांग के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को क्षेत्र के लोगों की मांगों के समर्थन की बात कही। खरगे ने विशेष रूप से छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग का समर्थन किया।
खरगे ने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के दौरान मारे गए चार लोगों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उस घटना की न्यायिक जांच से पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने जांच में जवाबदेही तय करने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
चार लोगों की मौत का मामला क्या है?
24 सितंबर 2025 को लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई और पुलिस की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद लद्दाख में तनाव बढ़ गया था और क्षेत्र में राजनीतिक एवं संवैधानिक अधिकारों को लेकर मांगें तेज हुई थीं।
इस घटना की जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच अधिसूचित की थी। जांच का दायरा 24 सितंबर की कानून-व्यवस्था की स्थिति, पुलिस कार्रवाई और इसके परिणामस्वरूप हुई चार मौतों की परिस्थितियों तक रखा गया था।
खरगे ने न्यायिक जांच को लेकर क्या कहा?
खरगे ने कहा कि 24 सितंबर की घटना की न्यायिक जांच को पूरी सच्चाई सामने लानी चाहिए और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि लद्दाख के लोगों की संवैधानिक और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
छठी अनुसूची में क्या खास है?
संविधान की छठी अनुसूची कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों में विशेष प्रशासनिक व्यवस्था का प्रावधान करती है। इसके तहत स्वायत्त जिला और क्षेत्रीय परिषदों को कुछ विधायी, न्यायिक और प्रशासनिक शक्तियां दी जाती हैं।
लद्दाख में छठी अनुसूची की मांग का संबंध मुख्य रूप से भूमि, रोजगार, स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण और पहचान की सुरक्षा से जुड़ा है। खरगे ने भी इन्हीं क्षेत्रों में संवैधानिक सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया है।
लद्दाख में राज्यhood और संवैधानिक सुरक्षा की मांग
लद्दाख के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूह लंबे समय से क्षेत्र के लिए अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा की मांग करते रहे हैं। प्रमुख मांगों में राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं भूमि अधिकारों की रक्षा शामिल हैं।
सितंबर 2025 की हिंसा के बाद इन मांगों को लेकर केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों के बीच संवाद का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना रहा।
चार मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान
सितंबर 2026 में लद्दाख प्रशासन ने पिछले साल की पुलिस गोलीबारी में मारे गए चार लोगों के परिवारों के लिए 15-15 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी। प्रशासन ने गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए 3 लाख रुपये और मामूली रूप से घायल प्रदर्शनकारियों के लिए 1 लाख रुपये की सहायता भी घोषित की। कुल मिलाकर इसके लिए 1.52 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा था कि मुआवजे का उद्देश्य प्रभावित परिवारों और लोगों को सहायता एवं सहयोग देना है। प्रशासन के अनुसार, यह राशि पिछले साल की हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए राहत के तौर पर दी गई है।
खरगे ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली की भी बात कही
खरगे ने छठी अनुसूची की मांग के साथ-साथ लद्दाख में लोकतांत्रिक और प्रतिनिधि संस्थाओं को मजबूत करने की बात भी कही। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों को अपने भविष्य से जुड़े फैसलों में प्रभावी आवाज मिलनी चाहिए।
कांग्रेस का यह रुख लद्दाख के संवैधानिक दर्जे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है। वहीं, केंद्र और लद्दाख प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग समय पर संवाद और संवैधानिक सुरक्षा के विकल्पों पर चर्चा की जाती रही है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे केंद्र और क्षेत्रीय प्रतिनिधि संगठनों के बीच चर्चा का विषय हैं। सितंबर 2025 की हिंसा की न्यायिक जांच भी इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
खरगे की ताजा टिप्पणी ने एक बार फिर छठी अनुसूची, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और लेह गोलीबारी में मारे गए चार लोगों के लिए जवाबदेही के मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।
