'बच्चों पर Instagram के असर से वाकिफ था Meta', 29 अमेरिकी राज्यों ने कंपनी पर जानकारी छिपाने का लगाया आरोप
अमेरिका में Meta के खिलाफ बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के कथित नुकसान को लेकर बड़ा मुकदमा शुरू हुआ है। 29 अमेरिकी राज्यों का आरोप है कि Meta को Instagram और Facebook के युवाओं पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की जानकारी थी, फिर भी कंपनी ने इसे सार्वजनिक नहीं किया। राज्यों का यह भी आरोप है कि Meta ने युवाओं को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाली सुविधाओं को जानबूझकर बढ़ावा दिया। Meta ने आरोपों से इनकार किया है।
Written by
Vinay Mishra
Instagram के असर को लेकर Meta पर गंभीर आरोप, 29 अमेरिकी राज्यों ने कहा- 'कंपनी सब जानती थी'
वॉशिंगटन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram और Facebook के बच्चों तथा किशोरों की मानसिक सेहत पर कथित असर को लेकर Meta के खिलाफ अमेरिका में एक बड़ा कानूनी मुकदमा शुरू हो गया है। 29 अमेरिकी राज्यों का आरोप है कि Meta को अपने प्लेटफॉर्म के युवाओं पर पड़ने वाले संभावित नुकसान की जानकारी थी, लेकिन कंपनी ने इस जानकारी को छिपाया और अपने उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करवाने के लिए डिजाइन किया।
यह मुकदमा कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित संघीय अदालत में चल रहा है। इसे सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयों में से एक माना जा रहा है। मुकदमे में चार राज्य—कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी—मुख्य रूप से अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं।
राज्यों का आरोप- Meta को नुकसान की जानकारी थी
मामले में राज्यों का कहना है कि Meta के पास आंतरिक शोध और आंकड़े मौजूद थे, जिनसे कंपनी को पता था कि उसके प्लेटफॉर्म युवाओं में एंग्जायटी, डिप्रेशन, नींद की समस्या और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जुड़े हो सकते हैं।
आरोप है कि इसके बावजूद कंपनी ने Instagram और Facebook के ऐसे फीचर्स को जारी रखा जो उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने में मदद करते हैं। इनमें इनफिनिट स्क्रॉल, नोटिफिकेशन और एल्गोरिदम आधारित कंटेंट रिकमेंडेशन जैसे फीचर्स शामिल हैं।
'लाभ के लिए बच्चों को प्लेटफॉर्म पर बांधे रखा'
अभियोजन पक्ष का तर्क है कि Meta का बिजनेस मॉडल उपयोगकर्ताओं का अधिक से अधिक समय और जुड़ाव हासिल करने पर आधारित था। राज्यों का आरोप है कि कंपनी ने युवाओं को प्लेटफॉर्म से दूर रखने के बजाय उन्हें ज्यादा समय तक जोड़े रखने को प्राथमिकता दी।
कैलिफोर्निया समेत चार राज्यों के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि Meta ने ऐसे डिजाइन विकल्प अपनाए जिनसे युवा उपयोगकर्ताओं के लिए प्लेटफॉर्म छोड़ना मुश्किल हो सकता था।
पूर्व Meta इंजीनियर ने भी दिए बयान
मामले में Meta के पूर्व इंजीनियर आर्टुरो बेहार की गवाही भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने कंपनी के अंदर युवाओं की सुरक्षा को लेकर उठाए गए सवालों और अपनी चिंताओं के बारे में अदालत को बताया।
बेहार का आरोप है कि कंपनी के पास युवाओं को होने वाले नुकसान से संबंधित जानकारी थी, लेकिन आंतरिक निगरानी में वास्तविक नुकसान के बजाय दूसरे तरह के सुरक्षा उल्लंघनों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था।
नाबालिगों के डेटा को लेकर भी सवाल
29 राज्यों के मुकदमे में सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा ही नहीं है। राज्यों ने Meta पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा बिना उचित अभिभावकीय सहमति के एकत्र करने और इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है।
यह आरोप अमेरिकी Children's Online Privacy Protection Act (COPPA) से जुड़ा है, जो बच्चों की ऑनलाइन निजता की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। जून में संघीय जज ने Meta की मामले को खारिज करने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया था और बच्चों के डेटा से जुड़े कुछ मुद्दों पर राज्यों के पक्ष में फैसला दिया था।
Meta ने आरोपों को खारिज किया
Meta ने अदालत में इन आरोपों से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि राज्यों ने उसके शोध और दस्तावेजों को संदर्भ से अलग करके पेश किया है और यह साबित नहीं हुआ है कि कंपनी ने जानबूझकर बच्चों को नुकसान पहुंचाने या उन्हें सोशल मीडिया का आदी बनाने की रणनीति अपनाई।
Meta ने यह भी कहा है कि वह युवाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लेता है और प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कई उपाय लागू किए गए हैं।
मामला हारने पर अरबों डॉलर का खतरा
इस मुकदमे में Meta पर आर्थिक दबाव भी बहुत बड़ा हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी ने अदालत में संभावित नुकसान की राशि 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की आशंका जताई है। हालांकि, अंतिम तौर पर कितनी राशि का जुर्माना या हर्जाना लगाया जाएगा, यह अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।
इसके अलावा राज्यों की मांग सिर्फ आर्थिक दंड तक सीमित नहीं है। वे Meta के प्लेटफॉर्म के डिजाइन और संचालन में बदलाव कराने की कोशिश भी कर रहे हैं।
सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बन सकता है बड़ा उदाहरण
यह मामला सिर्फ Meta तक सीमित नहीं माना जा रहा। अमेरिका में TikTok, YouTube, Snapchat जैसी दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ भी बच्चों और किशोरों पर कथित नुकसान को लेकर मुकदमे चल रहे हैं।
अगर अदालत Meta के खिलाफ फैसला देती है और प्लेटफॉर्म के डिजाइन में बदलाव के आदेश जारी होते हैं, तो इसका असर पूरे सोशल मीडिया उद्योग पर पड़ सकता है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बड़ा कानूनी टेस्ट
फिलहाल मुकदमे की सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है। लेकिन 29 राज्यों की ओर से लगाए गए आरोपों ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी होने के बावजूद यूजर्स की एंगेजमेंट बढ़ाने वाले फीचर्स जारी रखने की अनुमति होनी चाहिए?
आने वाले हफ्तों में Meta के अधिकारियों, पूर्व कर्मचारियों और विशेषज्ञों की गवाही इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। यह फैसला बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही के लिए एक बड़ा मिसाल बन सकता है।
नोट: Meta पर लगाए गए आरोप अभी मुकदमे का हिस्सा हैं। कंपनी ने आरोपों से इनकार किया है और अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही सामने आएगा।
