PoK में चुनाव के आखिरी चरण के लिए आज वोटिंग, PTI और JAAC के बहिष्कार के बीच कड़ी सुरक्षा
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के लिए आज मतदान हो रहा है। यह चरण हिंसक विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव के बीच आयोजित किया जा रहा है। PTI और Joint Awami Action Committee (JAAC) ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया है। चार विधानसभा सीटों पर हो रहे मतदान को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
Written by
Vinay Mishra
PoK में आखिरी चरण की वोटिंग शुरू, PTI-JAAC के बहिष्कार से बढ़ी सियासी हलचल
मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के लिए सोमवार, 10 अगस्त को मतदान हो रहा है। यह मतदान ऐसे समय हो रहा है जब क्षेत्र में पिछले कई हफ्तों से राजनीतिक तनाव और हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी रहे हैं। चुनाव के अंतिम चरण के बीच Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) और Joint Awami Action Committee (JAAC) की ओर से बहिष्कार का आह्वान किया गया है।
चार सीटों पर हो रहा मतदान
अंतिम चरण में पुंछ जिले की चार विधानसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षा कारणों से अलग-अलग चरणों में कराया गया है। मतदान केंद्रों के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है।
इस चरण में कुछ प्रमुख राजनीतिक चेहरे भी मैदान में हैं। पहले के चरणों में पाकिस्तान की सत्तारूढ़ PML-N 34 में से 24 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और अब क्षेत्रीय सरकार बनाने की स्थिति में बताई जा रही है।
PTI और JAAC ने क्यों किया बहिष्कार?
चुनाव से पहले PTI और JAAC ने मतदान के बहिष्कार का आह्वान किया। JAAC लंबे समय से क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, महंगाई, बिजली की कीमतों और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रही है।
सबसे विवादित मुद्दों में विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें शामिल हैं। ये सीटें भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान में रहने वाले लोगों के लिए आरक्षित हैं। JAAC का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
विरोध प्रदर्शनों के बीच चुनाव
PoK में चुनाव से पहले कई इलाकों में प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुई थीं। इन घटनाओं के कारण चुनावी माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
JAAC को सरकार ने प्रतिबंधित संगठन घोषित किया है। संगठन की मांगों में आरक्षित सीटों को खत्म करना और स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों को मजबूत करना प्रमुख मुद्दे रहे हैं। सरकार का कहना है कि उसकी ओर से संगठन की कई मांगों को स्वीकार किया जा चुका है, जबकि आरक्षित सीटों का फैसला क्षेत्रीय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है।
PML-N की बढ़त, सरकार बनाने की तैयारी
चुनाव के शुरुआती चरणों में PML-N ने मजबूत प्रदर्शन किया है। पार्टी पहले ही 34 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है। ऐसे में अंतिम चरण के बाद उसके लिए क्षेत्र में सरकार बनाने का रास्ता काफी हद तक साफ माना जा रहा है।
नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को इस महीने के अंत में क्षेत्र का अगला प्रधानमंत्री चुनना है।
कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान
विरोध प्रदर्शनों और पहले हुई हिंसा को देखते हुए अंतिम चरण में सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि मतदान केंद्रों पर किसी तरह की हिंसा या व्यवधान न हो।
हालांकि, PTI और JAAC के बहिष्कार ने चुनाव की राजनीतिक वैधता और प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। मतदान पूरा होने के बाद चुनाव में वास्तविक भागीदारी और बहिष्कार के प्रभाव पर भी नजर रहेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
PoK की विधानसभा में कुल 45 सीटें हैं, जिनमें 12 सीटें विस्थापित कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों को लेकर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर असंतोष रहा है। यही मुद्दा हालिया JAAC आंदोलन के प्रमुख कारणों में शामिल रहा है।
ऐसे में अंतिम चरण का मतदान सिर्फ सरकार गठन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी तय करेगा कि मौजूदा राजनीतिक विरोध और बहिष्कार के बीच नई विधानसभा को कितना व्यापक जनादेश मिलता है।
