'ममता बनर्जी ने अनसुनी की मेरी बात, चिकन नेक कॉरिडोर के लिए चाहिए थी 560 एकड़ जमीन'; अमित शाह का बड़ा हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बड़ा हमला बोला। शाह ने आरोप लगाया कि उन्होंने सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए केंद्र की ओर से मांगी गई जमीन उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने कहा कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक को मजबूत करने के लिए 560 एकड़ जमीन की जरूरत थी, लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया। शाह ने मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को जमीन की मंजूरी देने के लिए धन्यवाद दिया।
लेखक
Vinay Mishra
Amit Shah on Chicken Neck: 'ममता बनर्जी ने मेरी बात नहीं सुनी', 560 एकड़ जमीन को लेकर गृह मंत्री का बड़ा आरोप
सिलीगुड़ी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। शाह ने आरोप लगाया कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार से जमीन मांगी थी, लेकिन उनकी बार-बार की गई अपीलों पर ध्यान नहीं दिया गया।
शाह ने कहा कि बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर 'चिकन नेक' कहा जाता है, को मजबूत करने के लिए 560 एकड़ जमीन की जरूरत थी। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने वर्षों तक यह जमीन उपलब्ध नहीं कराई।
'ममता बनर्जी ने मेरी बात अनसुनी कर दी'
सिलीगुड़ी में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के फ्रंटियर मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा।
शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए उन्होंने बार-बार जमीन की मांग की, लेकिन उनकी अपीलों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि अब राज्य में सरकार बदलने के बाद सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी मिल रही है।
गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में कहा कि मौजूदा राज्य सरकार ने केंद्र की सुरक्षा संबंधी जरूरतों को तुरंत मंजूरी दी है।
560 एकड़ जमीन से क्या होगा?
अमित शाह के मुताबिक, सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए 560 एकड़ जमीन की जरूरत थी। यह इलाका भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी संकरे भू-भाग के जरिए देश का मुख्य हिस्सा पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ता है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर को अक्सर 'चिकन नेक' कहा जाता है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब है और इसकी रणनीतिक स्थिति इसे देश की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बनाती है।
शाह ने कहा कि इस संवेदनशील क्षेत्र को मजबूत करने के लिए जमीन और बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों में तेजी जरूरी है।
शुभेंदु अधिकारी सरकार की शाह ने की तारीफ
अमित शाह ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद केंद्र को सीमा सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए जो भी जरूरत पड़ी, उसे राज्य सरकार ने उपलब्ध कराया।
गृह मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार से सुरक्षा परियोजनाओं के लिए मंजूरी औपचारिक पत्र भेजे जाने से पहले ही मिलने लगी है।
शाह ने इसी संदर्भ में 560 एकड़ जमीन की मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।
सिर्फ 560 एकड़ नहीं, 1,129 एकड़ जमीन का भी जिक्र
अमित शाह ने अपने भाषण में सीमा सुरक्षा से जुड़े एक बड़े भूमि आवंटन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि BSF और SSB के लिए सीमा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से 1,129 एकड़ जमीन की जरूरत थी।
शाह के मुताबिक, उन्होंने 2014 से इस जमीन की मांग की थी और यह जमीन राज्य में सरकार बदलने के बाद उपलब्ध कराई गई।
यानी उनके भाषण में दो अलग-अलग जरूरतों का उल्लेख हुआ—सीमा सुरक्षा के लिए 1,129 एकड़ और संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए 560 एकड़ जमीन।
सिलीगुड़ी में बनेगा नया Border Security Administration Headquarters
गृह मंत्री ने सिलीगुड़ी में 80 एकड़ जमीन पर Border Security Administration Headquarters बनाए जाने की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा कि यह बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद करेगा।
इसके अलावा शाह ने सिलीगुड़ी-नई दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देशभर में प्रस्तावित सात ऐसे परिवहन कॉरिडोर में शामिल यह परियोजना अब पहले की तुलना में ज्यादा करीब है।
क्यों अहम है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के सबसे संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्रों में से एक है। यह संकरा भू-भाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों तक सड़क, रेल और अन्य संपर्क का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसलिए यहां सीमा सुरक्षा, परिवहन नेटवर्क और सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं इसके आसपास हैं, जबकि चीन का तिब्बत क्षेत्र भी अपेक्षाकृत नजदीक है।
सीमा सुरक्षा पर ममता सरकार को घेरा
अमित शाह ने अपने भाषण में केवल जमीन के मुद्दे पर ही ममता बनर्जी को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि जब तक देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक पश्चिम बंगाल या भारत पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकता।
उन्होंने पूर्ववर्ती राज्य सरकारों पर BSF और SSB जैसे सीमा सुरक्षा बलों के कार्यक्रमों में पर्याप्त भागीदारी नहीं करने का भी आरोप लगाया।
शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है और सुरक्षा बल देश की रक्षा के लिए काम करते हैं।
Vande Mataram का भी किया जिक्र
सिलीगुड़ी के कार्यक्रम में अमित शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक इसके पूर्ण संस्करण को वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हकदार था। शाह ने इस साल स्वतंत्रता दिवस के दौरान लाल किले से वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे उन्हें संतोष मिला है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश को इसके ऐतिहासिक और राष्ट्रवादी महत्व को समझने का अवसर मिल रहा है।
ममता बनर्जी बनाम बीजेपी: बंगाल में फिर गरमाया सुरक्षा का मुद्दा
अमित शाह का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में सीमा सुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने लाता है।
बीजेपी लंबे समय से पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और सीमा प्रबंधन के मुद्दों को उठाती रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस केंद्र पर राज्य के अधिकारों और संघीय ढांचे के मुद्दे पर सवाल उठाती रही है।
अब 560 एकड़ जमीन को लेकर शाह का आरोप इस राजनीतिक टकराव को और हवा दे सकता है।
हालांकि, ममता बनर्जी की ओर से इस आरोप पर तत्काल प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए शाह के दावे को फिलहाल उनके राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
अमित शाह ने सिलीगुड़ी में 560 एकड़ जमीन के मुद्दे को उठाते हुए ममता बनर्जी सरकार पर सीमा सुरक्षा से जुड़े केंद्र के प्रस्तावों में देरी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्र को मजबूत करने के लिए यह जमीन जरूरी थी।
वहीं, शाह ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार की जमीन और सुरक्षा परियोजनाओं को लेकर त्वरित मंजूरी देने के लिए तारीफ की।
चिकन नेक की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए आने वाले दिनों में यह जमीन और सीमा सुरक्षा का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।
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