क्या Coempt ने CBSE को पुराने साइबर प्रमाण-पत्र दिए? यहां देखें पूरी डिटेल
CBSE और Coempt Edu Teck से जुड़ा OSM (On-Screen Marking) विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Coempt ने CBSE को जो साइबर सुरक्षा प्रमाण-पत्र दिए थे, उनमें कुछ पुराने थे और कुछ किसी अन्य क्लाइंट के सिस्टम से संबंधित थे। इस खुलासे के बाद परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और टेंडर प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
लेखक
Vinay Mishra

क्या Coempt ने CBSE को पुराने साइबर प्रमाण-पत्र दिए? यहां देखें पूरी डिटेल
CBSE–Coempt विवाद में नया मोड़, सामने आया बड़ा खुलासा
देश के लाखों छात्रों से जुड़े CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में एक नया और गंभीर दावा सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, OSM प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनी Coempt Edu Teck द्वारा CBSE को सौंपे गए कुछ साइबर सुरक्षा प्रमाण-पत्र कथित तौर पर पुराने थे। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ प्रमाण-पत्र किसी अन्य ग्राहक (क्लाइंट) के सिस्टम से संबंधित थे और सीधे CBSE के उपयोग में आने वाले प्लेटफॉर्म से जुड़े नहीं थे।
यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पहले से ही तकनीकी खामियों और सुरक्षा संबंधी आरोपों को लेकर चर्चा में है।
क्या है पूरा मामला?
CBSE ने वर्ष 2026 में कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बड़े स्तर पर On-Screen Marking (OSM) प्रणाली लागू की थी। इस डिजिटल सिस्टम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाता है।
हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता, स्कैनिंग संबंधी समस्याओं और मूल्यांकन में कथित त्रुटियों को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बाद OSM प्रणाली और उसे संचालित करने वाली कंपनी Coempt Edu Teck जांच के दायरे में आ गई।
अब नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि CBSE को सुरक्षा अनुपालन साबित करने के लिए जो साइबर सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए गए थे, उनमें से एक लगभग दो वर्ष पुराना था, जबकि कुछ प्रमाण-पत्र दूसरे क्लाइंट के वातावरण में किए गए परीक्षणों से जुड़े थे।
रिपोर्ट में क्या-क्या दावे किए गए?
प्रमुख दावे
साइबर सुरक्षा प्रमाण-पत्रों की वैधता पर सवाल उठे।
कुछ प्रमाण-पत्र पुराने बताए गए।
कुछ प्रमाण-पत्र किसी अन्य ग्राहक के सिस्टम से जुड़े होने का दावा।
OSM प्लेटफॉर्म की वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज।
टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी मूल्यांकन पर नए सवाल खड़े हुए।
हालांकि इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष निकलना अभी बाकी है और संबंधित एजेंसियों की ओर से जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया जारी है।
CBSE का क्या कहना है?
CBSE इससे पहले कई आरोपों को खारिज कर चुका है। बोर्ड ने कहा था कि Coempt को अनुबंध देने की प्रक्रिया सभी सरकारी वित्तीय नियमों के अनुसार पूरी की गई थी और पोर्टल सुरक्षित है। बोर्ड ने आरोपों को "भ्रामक" और "तथ्यों पर आधारित नहीं" बताया था।
इसके अलावा, हाल के दिनों में CBSE ने साइबर हमलों की शिकायत भी दर्ज कराई और कहा कि उसकी मुख्य प्रणालियां सुरक्षित हैं तथा किसी बड़े डेटा उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा चिंताओं के बीच CBSE ने उठाया बड़ा कदम
ताजा घटनाक्रम में CBSE ने पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) प्रक्रिया के लिए Coempt के प्लेटफॉर्म की जगह अपने स्वयं के पोर्टल का उपयोग करने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार छात्र और परीक्षा डेटा को CBSE के नियंत्रण वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पर स्थानांतरित किया गया है।
इस फैसले को सुरक्षा चिंताओं से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि CBSE ने आधिकारिक तौर पर विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए हैं।
संसद तक पहुंचा मामला
OSM प्रणाली और Coempt को लेकर उठे सवाल अब राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बन चुके हैं। एक छात्र द्वारा टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट संसदीय समिति के सामने भी रखी गई। इसमें टेंडर शर्तों में बदलाव और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे।
इसके बाद शिक्षा मंत्रालय द्वारा भी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर रिपोर्ट मांगे जाने की खबरें सामने आईं।
छात्रों और अभिभावकों पर क्या असर?
यह विवाद केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक मुद्दा नहीं है। इसका सीधा संबंध लाखों छात्रों के भविष्य से है।
संभावित प्रभाव
परीक्षा प्रणाली पर भरोसे को झटका।
उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता।
पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी की आशंका।
छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और असमंजस।
डिजिटल मूल्यांकन मॉडल की विश्वसनीयता पर बहस।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को बड़े स्तर पर लागू करना है तो साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता और स्वतंत्र ऑडिट को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी परीक्षा प्रणाली में उपयोग किए जाने वाले सुरक्षा प्रमाण-पत्रों का अद्यतन, वैध और उसी प्लेटफॉर्म से संबंधित होना अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रमाण-पत्रों की वैधता पर सवाल उठते हैं तो स्वतंत्र तकनीकी जांच की जरूरत और बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन सुरक्षा मानकों में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
निष्कर्ष
CBSE और Coempt Edu Teck से जुड़ा विवाद अब केवल तकनीकी खामी तक सीमित नहीं रह गया है। पुराने साइबर प्रमाण-पत्रों और सुरक्षा संबंधी दावों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। फिलहाल कई आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और साइबर सुरक्षा को लेकर जनता की अपेक्षाएं पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।
आने वाले दिनों में CBSE, शिक्षा मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों की जांच रिपोर्ट इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।
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