बच्चे के लिए कितना एजुकेशन फंड जरूरी? कैसे करें तैयारी, एजुकेशन लोन के फायदे-नुकसान और एक्सपर्ट की पूरी सलाह
बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च हर साल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सिर्फ बचत करना काफी नहीं है, बल्कि सही एजुकेशन फंड बनाना भी जरूरी हो गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय रहते निवेश शुरू करने से करोड़ों रुपये के शिक्षा खर्च का बोझ आसानी से संभाला जा सकता है। जानिए कितना फंड जरूरी है, कैसे तैयार करें और कब एजुकेशन लोन लेना समझदारी हो सकती है।
लेखक
Vinay Mishra

बच्चे के लिए कितना एजुकेशन फंड जरूरी? कैसे करें तैयारी, एजुकेशन लोन के फायदे-नुकसान और एक्सपर्ट की पूरी सलाह
आज के दौर में बच्चों की अच्छी शिक्षा हर माता-पिता की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है। लेकिन जिस रफ्तार से स्कूल, कॉलेज और प्रोफेशनल कोर्स की फीस बढ़ रही है, उसने लाखों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का खर्च अब लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये तक पहुंच रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चे की पढ़ाई के लिए कितना एजुकेशन फंड तैयार होना चाहिए? क्या केवल बचत पर्याप्त है या फिर एजुकेशन लोन भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है? वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर प्लानिंग शुरू कर दी जाए तो भविष्य का बड़ा खर्च भी आसानी से संभाला जा सकता है।
एजुकेशन की लागत क्यों तेजी से बढ़ रही है?
पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में महंगाई सामान्य महंगाई दर से कहीं ज्यादा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार एजुकेशन इंफ्लेशन औसतन 8% से 12% सालाना तक पहुंच चुका है।
इसका मतलब है कि जिस कोर्स की फीस आज 20 लाख रुपये है, वही 15 साल बाद 60 से 80 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
उदाहरण समझिए
अगर आपके बच्चे की उम्र अभी 3 साल है और 15 साल बाद उसे उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये की जरूरत होगी, तो 10% शिक्षा महंगाई के हिसाब से यह राशि लगभग 84 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
यही वजह है कि केवल बैंक में पैसे जमा करना पर्याप्त नहीं माना जाता।
बच्चे के लिए कितना एजुकेशन फंड जरूरी है?
एजुकेशन फंड की राशि कई बातों पर निर्भर करती है—
बच्चे की वर्तमान उम्र
भविष्य में चुना जाने वाला कोर्स
भारत या विदेश में पढ़ाई
शिक्षा महंगाई दर
परिवार की आय
मोटा अनुमान
कोर्सवर्तमान खर्च15 साल बाद संभावित खर्चइंजीनियरिंग15-25 लाख50-90 लाखमेडिकल50 लाख-1 करोड़1.5-3 करोड़MBA20-40 लाख70 लाख-1.5 करोड़विदेश में पढ़ाई50 लाख-1.5 करोड़2-4 करोड़
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता को बच्चे के जन्म के साथ ही एजुकेशन फंड की योजना शुरू कर देनी चाहिए।
एजुकेशन फंड कैसे बनाएं?
1. जल्दी शुरुआत करें
निवेश की दुनिया में समय सबसे बड़ा हथियार माना जाता है। जितनी जल्दी निवेश शुरू होगा, उतना कम मासिक निवेश करना पड़ेगा।
2. SIP का सहारा लें
म्यूचुअल फंड SIP लंबे समय में एजुकेशन फंड बनाने का सबसे लोकप्रिय तरीका माना जाता है।
अगर कोई व्यक्ति 15 साल तक हर महीने 10,000 रुपये निवेश करता है और औसतन 12% रिटर्न मिलता है, तो लगभग 50 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है।
3. लक्ष्य आधारित निवेश करें
निवेश करते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि पैसा किस उद्देश्य के लिए जमा किया जा रहा है।
स्कूल शिक्षा
ग्रेजुएशन
प्रोफेशनल कोर्स
विदेश शिक्षा
हर लक्ष्य के लिए अलग निवेश योजना बनाना बेहतर माना जाता है।
4. पोर्टफोलियो की समीक्षा करें
हर साल निवेश की समीक्षा जरूरी है। यदि शिक्षा महंगाई बढ़ रही है तो निवेश राशि भी बढ़ानी चाहिए।
एजुकेशन फंड बनाने के लोकप्रिय विकल्प
इक्विटी म्यूचुअल फंड
लंबी अवधि के लिए सबसे बेहतर विकल्पों में गिना जाता है।
PPF
सुरक्षित निवेश चाहने वालों के लिए अच्छा विकल्प।
सुकन्या समृद्धि योजना
बेटी की शिक्षा और भविष्य के लिए लोकप्रिय सरकारी योजना।
NPS और अन्य निवेश साधन
लंबी अवधि के निवेश में विविधता लाने के लिए उपयोगी।
एजुकेशन लोन कब लेना चाहिए?
कई बार पूरी शिक्षा लागत स्वयं वहन करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में एजुकेशन लोन मददगार साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी प्रतिष्ठित संस्थान से उच्च शिक्षा ली जा रही है और भविष्य में अच्छी आय की संभावना है तो एजुकेशन लोन लेना गलत फैसला नहीं है।
एजुकेशन लोन के फायदे
1. तत्काल फंड की व्यवस्था
बड़ी फीस होने पर भी पढ़ाई नहीं रुकती।
2. निवेश को टूटने से बचाता है
माता-पिता को अपनी बचत या रिटायरमेंट फंड निकालने की जरूरत नहीं पड़ती।
3. टैक्स लाभ
कुछ मामलों में शिक्षा ऋण के ब्याज पर कर लाभ मिलता है।
4. वित्तीय अनुशासन
छात्रों में जिम्मेदारी और वित्तीय समझ विकसित होती है।
एजुकेशन लोन के नुकसान
1. कर्ज का बोझ
पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी मिलने तक मानसिक दबाव बना रह सकता है।
2. ब्याज का अतिरिक्त खर्च
लोन की कुल लागत फीस से काफी ज्यादा हो सकती है।
3. नौकरी का जोखिम
अगर अपेक्षित आय नहीं मिलती तो EMI चुकाना मुश्किल हो सकता है।
4. क्रेडिट स्कोर पर असर
समय पर भुगतान न होने पर भविष्य की वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
एक्सपर्ट क्या सलाह देते हैं?
वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि आदर्श स्थिति में शिक्षा खर्च का 60% से 80% हिस्सा पहले से बनाए गए एजुकेशन फंड से आना चाहिए और जरूरत पड़ने पर केवल सीमित राशि के लिए एजुकेशन लोन लेना चाहिए।
इसके अलावा माता-पिता को अपनी रिटायरमेंट बचत को बच्चों की पढ़ाई के लिए पूरी तरह खर्च नहीं करना चाहिए। शिक्षा के लिए लोन मिल सकता है लेकिन रिटायरमेंट के लिए नहीं।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
बढ़ती शिक्षा लागत ने मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे ज्यादा दबाव बढ़ाया है। यदि समय रहते वित्तीय योजना नहीं बनाई गई तो भविष्य में बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी कर्ज लेना पड़ सकता है।
दूसरी ओर जो परिवार शुरुआती वर्षों से नियमित निवेश कर रहे हैं, वे इस बढ़ती लागत का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं।
निष्कर्ष
बच्चों की शिक्षा आज केवल एक सपना नहीं बल्कि एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी बन चुकी है। शिक्षा महंगाई लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा का खर्च वर्तमान से कई गुना अधिक हो सकता है। ऐसे में जल्दी निवेश शुरू करना, लक्ष्य आधारित एजुकेशन फंड बनाना और जरूरत पड़ने पर समझदारी से एजुकेशन लोन का उपयोग करना सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि जितनी जल्दी तैयारी शुरू होगी, उतना कम वित्तीय दबाव भविष्य में महसूस होगा।
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