हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद: राहुल गांधी के खिलाफ FIR के बाद कांग्रेस-बीजेपी में घमासान तेज, सड़क से सदन तक सियासी संग्राम
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राहुल गांधी के खिलाफ FIR तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने FIR को राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए बीजेपी पर हमला बोला है और देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए उन पर जाति के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR तक पहुंच चुका है। FIR के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है।
कांग्रेस का आरोप है कि खरगे की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल का ‘शुद्धिकरण’ कराया गया, जिसे पार्टी ने दलित नेता के प्रति जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया कि वहां केवल साफ-सफाई और धार्मिक अनुष्ठान किया गया था और इसका किसी जाति या खरगे से संबंध नहीं था।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हुई। कांग्रेस का आरोप है कि सभा के बाद मैदान का ‘शुद्धिकरण’ कराया गया। पार्टी ने इसे खरगे के साथ जातिगत भेदभाव और अपमान के तौर पर पेश किया।
इस घटना पर राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR की मांग की थी।
राहुल गांधी के खिलाफ क्यों दर्ज हुई FIR?
हल्द्वानी पुलिस ने अमित कुमार नाम के एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत रंग दिया। पुलिस ने FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 के साथ SC/ST एक्ट की धाराएं भी लगाई हैं।
FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया और सवाल उठाया कि कथित ‘शुद्धिकरण’ कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय राहुल गांधी पर मामला क्यों दर्ज किया गया।
कांग्रेस ने खोला मोर्चा
FIR के खिलाफ कांग्रेस ने उत्तराखंड में प्रदर्शन का ऐलान किया। पार्टी ने मंगलवार को सचिवालय तक मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
कांग्रेस का कहना है कि FIR वापस ली जानी चाहिए और कथित शुद्धिकरण कराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस का बीजेपी पर बड़ा आरोप
कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी पर दलित विरोधी सोच रखने का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने FIR पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने वही मुद्दा उठाया है जिसे संविधान और कानून गलत मानता है। उन्होंने शिकायतकर्ता के बीजेपी से कथित संबंधों को लेकर भी सवाल खड़े किए।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी कहा कि संविधान छुआछूत और जातिगत भेदभाव को स्वीकार नहीं करता। उनके मुताबिक, अगर किसी दलित नेता के साथ इस तरह का व्यवहार हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बीजेपी का राहुल गांधी पर पलटवार
वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर जाति की राजनीति करने का आरोप लगाया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने चाय में भी जाति खोजने की कोशिश की। धामी ने इसे संकीर्ण राजनीति बताया और कहा कि लोगों के बीच अपनापन और स्वाद दिखता है, जाति नहीं।
बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
अखिलेश यादव भी कांग्रेस के साथ
इस विवाद में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी कांग्रेस के समर्थन में सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की दलित विरोधी सोच के कारण हल्द्वानी में मंच का शुद्धिकरण कराया गया और बाद में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई। उन्होंने कार्रवाई को निंदनीय बताया।
हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR के विरोध में प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने की मांग की।
मामला अब उत्तराखंड से बाहर भी पहुंचा
हल्द्वानी का यह विवाद अब सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा। मध्य प्रदेश के भोपाल में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR के विरोध में मार्च निकाला। पार्टी ने FIR वापस लेने और कथित शुद्धिकरण कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
झारखंड के धनबाद में भी इस मुद्दे को लेकर बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
अब 'शुद्धिकरण' से आगे बढ़कर राजनीतिक मुद्दा
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर जाति, छुआछूत और राजनीतिक दलों के बीच सामाजिक न्याय की राजनीति को केंद्र में ला दिया है।
कांग्रेस इसे दलित सम्मान और संविधान के मूल्यों से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रही है।
मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। साथ ही दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और प्रदर्शन आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
चुनावी राजनीति पर भी असर
उत्तराखंड में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य की राजनीति में सामाजिक समीकरण बेहद अहम हैं। कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए दलित सम्मान और सामाजिक समानता का सवाल उठा रही है, जबकि बीजेपी राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक अवसरवाद के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
इसलिए हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण विवाद’ अब केवल एक स्थानीय घटना नहीं रह गया है। FIR के बाद यह कांग्रेस और बीजेपी के बीच व्यापक राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन चुका है।
एक तरफ कांग्रेस FIR को वापस लेने और कथित शुद्धिकरण कराने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी राहुल गांधी पर जाति के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है। अब इस विवाद का अगला मोर्चा अदालत के साथ-साथ राजनीतिक मंचों पर भी दिखाई देगा।
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