समुद्र की गहराइयों में बढ़ेगी भारत की ताकत, नौसेना में कमीशन हुआ INS निपुण
भारतीय नौसेना ने सोमवार को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में स्वदेशी रूप से निर्मित INS निपुण को कमीशन कर लिया। यह नौसेना का दूसरा Diving Support Vessel (DSV) है, जो गहरे समुद्र में डाइविंग, अंडरवॉटर ऑपरेशन और संकट में फंड़ी पनडुब्बियों के तेजी से बचाव में अहम भूमिका निभाएगा। करीब 119.4 मीटर लंबे और 10,500 टन क्षमता वाले इस पोत को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है।
लेखक
Vinay Mishra
मुंबई: समुद्र की गहराइयों में भारत की रणनीतिक और बचाव क्षमता को सोमवार को बड़ा बूस्ट मिला। भारतीय नौसेना ने INS निपुण को आधिकारिक तौर पर अपने बेड़े में शामिल कर लिया। मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की मौजूदगी में इस अत्याधुनिक Diving Support Vessel को कमीशन किया गया।
INS निपुण नौसेना का दूसरा स्वदेशी Nistar-class Diving Support Vessel है। इससे पहले इसकी सिस्टर शिप INS Nistar को जुलाई 2025 में कमीशन किया गया था। दोनों जहाजों की तैनाती से भारतीय नौसेना को देश के पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तटों पर डीप-सी डाइविंग और सबमरीन रेस्क्यू की मजबूत क्षमता मिलेगी।
119 मीटर लंबा, 10,500 टन का अत्याधुनिक पोत
INS निपुण की लंबाई करीब 119.4 मीटर है और इसका विस्थापन लगभग 10,500 टन है। जहाज को विशाखापत्तनम स्थित Hindustan Shipyard Limited (HSL) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है। इसमें करीब 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाता है।
जहाज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र में अपनी स्थिति को बेहद सटीकता से बनाए रख सके। यह क्षमता गहरे समुद्र में चलने वाले जटिल डाइविंग और अंडरवॉटर ऑपरेशन के दौरान बेहद महत्वपूर्ण होती है।
300 मीटर तक गहराई में डाइविंग ऑपरेशन
INS निपुण की सबसे बड़ी खासियत इसकी डीप-सी डाइविंग क्षमता है। यह करीब 300 मीटर तक की गहराई में डाइविंग ऑपरेशन को सपोर्ट कर सकता है। जहाज में आधुनिक डाइविंग कॉम्प्लेक्स और अंडरवॉटर रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
इसका इस्तेमाल समुद्र के भीतर तकनीकी जांच, मरम्मत, रिकवरी और अन्य विशेष अभियानों में किया जा सकता है।
पनडुब्बी संकट में बनेगा 'संकटमोचक'
INS निपुण का सबसे महत्वपूर्ण रोल Submarine Rescue Operations में होगा। यदि किसी भारतीय पनडुब्बी को समुद्र की गहराई में तकनीकी खराबी या किसी दुर्घटना का सामना करना पड़ता है, तो ऐसे हालात में समय पर बचाव बेहद महत्वपूर्ण होता है।
INS निपुण को इसी तरह के जटिल अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की rapid submarine rescue capability और मजबूत होगी।
अब दोनों समुद्री तटों पर डीप-सी रेस्क्यू क्षमता
INS निपुण की तैनाती पश्चिमी समुद्री तट पर होगी, जबकि INS Nistar को पूर्वी तट पर तैनात किया गया है। इस तरह नौसेना के पास अब दो DSV और दो तटों पर डीप-सी ऑपरेशन की क्षमता होगी।
यह व्यवस्था भारतीय नौसेना को समुद्र में किसी आपात स्थिति पर ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद कर सकती है।
सिर्फ सैन्य नहीं, आपदा राहत में भी आएगा काम
INS निपुण का इस्तेमाल केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर इसे Disaster Relief और Humanitarian Assistance के लिए भी तैनात किया जा सकता है। समुद्री दुर्घटनाओं, खोज एवं बचाव अभियानों और अंडरवॉटर आपात स्थितियों में यह पोत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में अहम कदम
INS निपुण का निर्माण भारत में होना इसे रणनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बनाता है। HSL द्वारा तैयार इस पोत में लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।
नौसेना के लिए ऐसे अत्याधुनिक जहाजों का घरेलू निर्माण न केवल विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करता है, बल्कि भारत के डिफेंस शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम को भी मजबूत करता है।
INS Nistar के साथ बढ़ेगी क्षमता
INS निपुण को INS Nistar का साथी पोत माना जा रहा है। Nistar को 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था और यह भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित DSV था।
अब Nistar और Nipun की जोड़ी के साथ भारतीय नौसेना के पास समुद्र की गहराइयों में डाइविंग, अंडरवॉटर इंटरवेंशन, डीप-सी साल्वेज और सबमरीन रेस्क्यू के लिए पहले से कहीं अधिक मजबूत नेटवर्क है।
INS निपुण की कमीशनिंग ऐसे समय हुई है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री सुरक्षा और अंडरवॉटर क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। यह पोत आने वाले वर्षों में भारतीय नौसेना के लिए समुद्र की गहराइयों का अहम 'संकटमोचक' साबित हो सकता है।
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