महाराष्ट्र में 1.12 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट मामले में IIT ग्रेजुएट और बैंकर गिरफ्तार
महाराष्ट्र के मुंबई में एक 68 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेशनल से ₹1.12 करोड़ की कथित डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में साइबर पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में IIT दिल्ली का ग्रेजुएट और एक निजी बैंक का ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को करीब दो सप्ताह तक फर्जी पुलिस और जांच अधिकारियों का डर दिखाकर वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। आरोप है कि उससे एफडी तुड़वाकर रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई।
लेखक
Jyoti Mukherjee
महाराष्ट्र के मुंबई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹1.12 करोड़ की ठगी के मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में जांच के दौरान एक IIT ग्रेजुएट और निजी बैंक के ऑपरेशंस मैनेजर की कथित भूमिका भी सामने आई है।
मुंबई साइबर पुलिस के मुताबिक, ठगी का शिकार दहिसर निवासी 68 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति हुआ। आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड और सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ है और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच चल रही है।
पहले टेलीकॉम अधिकारी बनकर किया फोन
पुलिस जांच के अनुसार, पीड़ित को सबसे पहले एक व्यक्ति ने फोन किया, जिसने खुद को टेलीकॉम विभाग से जुड़ा अधिकारी बताया। कथित तौर पर उसे बताया गया कि उसके आधार से जुड़ी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया गया है और मामला क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया जा रहा है।
इसके बाद एक अन्य आरोपी ने खुद को विजय खन्ना नाम का पुलिस अधिकारी बताया और दावा किया कि दिल्ली में सिम कार्ड के कथित दुरुपयोग को लेकर उसके खिलाफ मामला दर्ज है।
फर्जी दस्तावेज भेजकर बनाया दबाव
जांच में सामने आया कि ठगों ने पीड़ित को WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए कथित तौर पर पुलिस अधिकारी के रूप में बात की। वीडियो कॉल में पुलिस का लोगो भी इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पीड़ित को कथित जांच से जुड़े फर्जी दस्तावेज भी भेजे। उसे अपनी लोकेशन की जानकारी नियमित रूप से देने के लिए कहा गया और परिवार के सदस्यों को इसकी जानकारी देने से भी रोका गया।
आरोपियों ने कथित तौर पर यह डर भी दिखाया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसके परिवार के सदस्य भी कानूनी कार्रवाई में फंस सकते हैं।
एफडी तुड़वाकर ट्रांसफर कराई रकम
पुलिस के मुताबिक, ठगों ने पीड़ित से उसकी आर्थिक स्थिति और संपत्ति के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद उसे अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तोड़ने और रकम बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
कथित तौर पर करीब दो सप्ताह तक यह सिलसिला चलता रहा और पीड़ित ने कुल ₹1.12 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसकी बेटी को मामले का पता चला और उसने परिवार को सचेत किया, जिसके बाद साइबर क्राइम हेल्पलाइन के जरिए पुलिस में शिकायत की गई।
गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी के खाते से मिला सुराग
शिकायत के बाद पुलिस ने रकम के लेनदेन की जांच शुरू की। जांचकर्ताओं को पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा एक गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी के बैंक खाते में पहुंचा था।
पुलिस के अनुसार, कंपनी के दो निदेशकों से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान सिम कार्ड एक अन्य आरोपी तारिक मोमिन के पास होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। कंपनी के एक निदेशक राकेश जैन को भी गिरफ्तार किया गया।
OTP हासिल करने में बैंक मैनेजर की कथित भूमिका
जांच का अगला सिरा निजी बैंक के ऑपरेशंस मैनेजर तक पहुंचा। पुलिस के मुताबिक, मोमिन ने कुछ सिम कार्ड नए मोबाइल हैंडसेट में लगाए और ये डिवाइस बैंक के ऑपरेशंस मैनेजर शकर त्यागी तक पहुंचे।
पुलिस का आरोप है कि इन मोबाइल उपकरणों का इस्तेमाल OTP प्राप्त करने के लिए किया गया और त्यागी तथा IIT दिल्ली से पढ़े वेब डेवलपर G. Gohel ने कथित तौर पर दूसरे आरोपियों को इन उपकरणों तक पहुंच उपलब्ध कराई।
छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें तारिक मोमिन, राकेश जैन, शकर त्यागी, G. Gohel, चिंतन देसाई और अजय शर्मा शामिल हैं।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों की कथित भूमिकाएं अलग-अलग थीं—कहीं म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराना, कहीं सक्रिय सिम कार्ड मुहैया कराना, कहीं OTP तक पहुंच बनाना और कहीं रकम निकालने में मदद करना।
रकम यूपी के म्यूल खातों तक पहुंची
पुलिस के मुताबिक, गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी के खाते से रकम आगे उत्तर प्रदेश के बिजनौर क्षेत्र से जुड़े म्यूल खातों तक पहुंचाई गई। जांच में रकम के कुछ हिस्से को निकालने और कुछ को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने की बात सामने आई है।
पुलिस अब पूरे मनी ट्रेल और आरोपियों के बीच संपर्क की जांच कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचें?
डिजिटल अरेस्ट कोई वैध कानूनी प्रक्रिया नहीं है। साइबर ठग अक्सर पुलिस, CBI, ED, TRAI या दूसरे सरकारी विभागों का अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और वीडियो कॉल पर पूछताछ या निगरानी के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
किसी भी अधिकारी के नाम पर फोन आए और OTP, बैंक डिटेल, PIN या पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाए तो तुरंत बातचीत रोककर संबंधित विभाग या साइबर क्राइम हेल्पलाइन से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए।
मुंबई का यह मामला भी दिखाता है कि ऐसे साइबर अपराधों में केवल फोन कॉल करने वाले ठग ही नहीं, बल्कि बैंक खाते, सिम कार्ड, OTP और रकम की निकासी से जुड़े अलग-अलग स्तर के लोग कथित तौर पर शामिल हो सकते हैं। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।
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