ममता काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं: चुनावी हिंसा केस में पैरवी, बाहर लगे ‘बुआ चोर-भतीजा चोर’ के नारे
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं, जहां उन्होंने चुनावी हिंसा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पैरवी की। कोर्ट परिसर के बाहर विपक्षी समर्थकों ने “बुआ चोर-भतीजा चोर” के नारे लगाए, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। इस घटना ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
लेखक
Vinay Mishra

ममता काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं: चुनावी हिंसा केस में पैरवी, बाहर लगे ‘बुआ चोर-भतीजा चोर’ के नारे
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं। चुनावी हिंसा से जुड़े चर्चित मामले की सुनवाई के दौरान उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी।
कोर्ट परिसर से बाहर निकलते ही माहौल और ज्यादा गरमा गया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने “बुआ चोर-भतीजा चोर” के नारे लगाने शुरू कर दिए। यह नारा सीधे तौर पर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
क्यों खास रही ममता बनर्जी की कोर्ट में मौजूदगी?
आमतौर पर मुख्यमंत्री स्तर के नेता अदालत में व्यक्तिगत रूप से कम ही दिखाई देते हैं। लेकिन इस बार ममता बनर्जी का खुद हाईकोर्ट पहुंचना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है।
सूत्रों के मुताबिक मामला चुनावी हिंसा, प्रशासनिक कार्रवाई और राज्य सरकार की भूमिका से जुड़ा हुआ है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि बंगाल में चुनाव के दौरान हुई हिंसा के मामलों में निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।
ममता बनर्जी का काला कोट पहनकर अदालत पहुंचना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का बड़ा विषय बन गया। कई लोगों ने इसे “राजनीतिक संदेश” बताया, जबकि समर्थकों ने इसे “संविधान और न्यायपालिका के प्रति सम्मान” कहा।
कोर्ट के बाहर क्यों लगे ‘बुआ चोर-भतीजा चोर’ के नारे?
जैसे ही ममता बनर्जी अदालत परिसर से बाहर निकलीं, वहां मौजूद कुछ लोगों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। “बुआ चोर-भतीजा चोर” का नारा पिछले कुछ समय से बंगाल की राजनीति में विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य में सत्ता का केंद्रीकरण हो गया है और कई सरकारी फैसलों में पारदर्शिता की कमी है। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक साजिश बता रही है।
इस नारेबाजी के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर ट्रेंड करने लगा।
चुनावी हिंसा का मामला क्यों बना बड़ा मुद्दा?
पश्चिम Bengal लंबे समय से चुनावी हिंसा को लेकर चर्चा में रहा है। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक कई बार हिंसा, झड़प और राजनीतिक संघर्ष की खबरें सामने आती रही हैं।
इस मामले में अदालत ने पहले भी राज्य प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। विपक्ष लगातार केंद्रीय एजेंसियों या स्वतंत्र जांच की मांग करता रहा है।
मुख्य आरोप:
चुनाव के दौरान हिंसा और धमकी
विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हमले
प्रशासनिक निष्क्रियता
निष्पक्ष जांच की मांग
इन्हीं मुद्दों को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है।
सोशल मीडिया पर छाया पूरा घटनाक्रम
ममता बनर्जी की काला कोट वाली तस्वीरें और कोर्ट के बाहर की नारेबाजी इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
एक तरफ समर्थक इसे “संघर्षशील नेता की छवि” बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे “डैमेज कंट्रोल पॉलिटिक्स” कह रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की क्या राय?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश भी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
ममता बनर्जी जनता को यह संदेश देना चाहती हैं कि वह सीधे लड़ाई लड़ रही हैं।
विपक्ष इस मौके का इस्तेमाल भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे को मजबूत करने में करेगा।
कोर्ट परिसर में हुई नारेबाजी आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकती है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक तनाव और चुनावी हिंसा जैसे मुद्दे आम जनता के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। लोग चाहते हैं कि:
चुनाव शांतिपूर्ण हों
प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करे
अदालतों के फैसलों का सम्मान हो
बंगाल में लगातार बढ़ते राजनीतिक संघर्ष का असर निवेश, रोजगार और कानून व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
क्या कहती है तृणमूल कांग्रेस?
तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को विपक्ष की “सस्ती राजनीति” बताया है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री कानून और संविधान के दायरे में रहकर काम कर रही हैं और विपक्ष केवल माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।
टीएमसी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत परिसर के बाहर जानबूझकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की गई।
निष्कर्ष
ममता बनर्जी का काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचना और उसके बाद कोर्ट परिसर के बाहर हुई नारेबाजी ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। चुनावी हिंसा का मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई, विपक्ष की रणनीति और तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले को और ज्यादा गर्मा सकती है। फिलहाल बंगाल की राजनीति में यह सबसे बड़ी और चर्चित खबर बन चुकी है।
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