चावल के दाने जितनी चिप पर बना ‘इंद्रधनुष’, 6G नेटवर्क में भरेगा रफ्तार; उपग्रहों के लिए बनेगा वरदान
वैज्ञानिकों ने चावल के दाने जितनी छोटी चिप पर एक बेहद खास ‘इंद्रधनुष’ यानी स्पेक्ट्रम तैयार करने वाली तकनीक विकसित की है। यह माइक्रोचिप एक साथ कई अलग-अलग वेवलेंथ की रोशनी पैदा और नियंत्रित कर सकती है। भविष्य में ऐसी तकनीक से 6G नेटवर्क, हाई-स्पीड कम्युनिकेशन और सैटेलाइट-टू-सैटेलाइट डेटा ट्रांसमिशन को तेज और अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: तकनीक की दुनिया में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो आने वाले समय में 6G नेटवर्क और अंतरिक्ष संचार का तरीका बदल सकती है। शोधकर्ताओं ने बेहद छोटी, लगभग चावल के दाने के आकार की माइक्रोचिप पर ‘इंद्रधनुष’ जैसा पूरा ऑप्टिकल स्पेक्ट्रम तैयार करने की तकनीक विकसित की है।
इसका मतलब है कि एक बेहद छोटे चिप प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग रंगों यानी अलग-अलग वेवलेंथ की रोशनी को एक साथ उत्पन्न और नियंत्रित किया जा सकता है। यही क्षमता हाई-स्पीड ऑप्टिकल कम्युनिकेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चिप पर कैसे बना ‘इंद्रधनुष’?
आम तौर पर अलग-अलग फ्रीक्वेंसी या वेवलेंथ के सिग्नल तैयार करने के लिए कई अलग-अलग उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है। नई तकनीक में वैज्ञानिकों ने फोटोनिक चिप के बेहद छोटे ढांचे का इस्तेमाल किया है।
यह चिप प्रकाश को नियंत्रित करके कई अलग-अलग वेवलेंथ में विभाजित कर सकती है। इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे सफेद रोशनी प्रिज्म से गुजरने के बाद अलग-अलग रंगों में बंट जाती है।
यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को ‘ऑप्टिकल इंद्रधनुष’ की तरह देखा है।
6G के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भविष्य के 6G नेटवर्क में केवल तेज इंटरनेट ही लक्ष्य नहीं होगा। नेटवर्क को एक साथ अरबों डिवाइस, सेंसर, वाहन, मशीन और अंतरिक्ष आधारित सिस्टम से डेटा संभालना होगा।
ऑप्टिकल कम्युनिकेशन में एक ही फाइबर या फ्री-स्पेस लिंक के भीतर अलग-अलग वेवलेंथ पर कई डेटा चैनल चलाए जा सकते हैं। इसे Wavelength Division Multiplexing (WDM) कहा जाता है।
अगर एक छोटी चिप कई वेवलेंथ को कुशलता से तैयार और नियंत्रित कर सके, तो कम जगह और कम ऊर्जा में अधिक डेटा ट्रांसमिट करने की संभावना बढ़ जाती है।
सैटेलाइट कम्युनिकेशन में भी बड़ा फायदा
इस तकनीक का संभावित इस्तेमाल केवल जमीन पर मौजूद 6G टावरों तक सीमित नहीं है। इसका सबसे दिलचस्प उपयोग सैटेलाइट कम्युनिकेशन में हो सकता है।
अंतरिक्ष में अलग-अलग सैटेलाइटों के बीच डेटा भेजने के लिए ऑप्टिकल या लेजर कम्युनिकेशन तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। रेडियो फ्रीक्वेंसी की तुलना में ऑप्टिकल लिंक ज्यादा डेटा ले जाने की क्षमता रखते हैं और अपेक्षाकृत संकरे बीम का इस्तेमाल करते हैं।
छोटी और हल्की फोटोनिक चिप भविष्य के सैटेलाइटों में कम वजन और कम ऊर्जा की जरूरत वाले कम्युनिकेशन सिस्टम बनाने में मदद कर सकती है।
एक छोटी चिप, कई सिग्नल
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार है। अगर एक छोटे से चिप प्लेटफॉर्म पर कई ऑप्टिकल चैनल तैयार किए जा सकें, तो बड़े और जटिल कम्युनिकेशन हार्डवेयर की जरूरत कम हो सकती है।
इससे भविष्य में:
हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर
6G नेटवर्क
ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन
सैटेलाइट इंटरनेट
अंतरिक्ष में लेजर कम्युनिकेशन
हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग
जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
क्या इससे तुरंत आएगा 6G?
ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। यह तकनीक 6G के विकास के लिए एक संभावित बिल्डिंग ब्लॉक है, लेकिन किसी एक चिप की खोज से पूरा 6G नेटवर्क तैयार नहीं हो जाता।
6G के लिए नई रेडियो तकनीक, नेटवर्क आर्किटेक्चर, स्पेक्ट्रम, ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।
नई फोटोनिक तकनीक इनमें से खास तौर पर हाई-स्पीड और मल्टी-चैनल ऑप्टिकल कम्युनिकेशन वाले हिस्से में मदद कर सकती है।
अंतरिक्ष संचार का बदल सकता है तरीका
सैटेलाइटों की संख्या लगातार बढ़ रही है और भविष्य में पृथ्वी की कक्षा में मौजूद अलग-अलग सैटेलाइटों के बीच तेजी से डेटा ट्रांसफर की जरूरत और बढ़ेगी।
ऐसे में छोटी फोटोनिक चिप से कई वेवलेंथ पर सिग्नल तैयार करने की क्षमता स्पेस-आधारित नेटवर्क के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
खासकर पृथ्वी की कक्षा में मौजूद सैटेलाइटों के बीच optical inter-satellite links के लिए ऐसी तकनीक भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
तकनीक को आसान भाषा में समझें
तकनीकमतलबफोटोनिक चिपप्रकाश के जरिए सूचना को प्रोसेस/ट्रांसमिट करने वाली माइक्रोचिप‘इंद्रधनुष’कई अलग-अलग वेवलेंथ का ऑप्टिकल स्पेक्ट्रम6Gअगली पीढ़ी की मोबाइल कम्युनिकेशन तकनीकWDMअलग-अलग वेवलेंथ पर कई डेटा चैनल भेजने की तकनीकऑप्टिकल कम्युनिकेशनप्रकाश/लेजर के जरिए डेटा ट्रांसमिशनसंभावित स्पेस इस्तेमालसैटेलाइट-टू-सैटेलाइट कम्युनिकेशन
निष्कर्ष
चावल के दाने से भी छोटे आकार की फोटोनिक तकनीक भविष्य के कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए बड़ी छलांग साबित हो सकती है। एक ही चिप पर कई वेवलेंथ की रोशनी को नियंत्रित करने की क्षमता हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर को अधिक कॉम्पैक्ट और ऊर्जा-कुशल बनाने की दिशा में अहम कदम है।
6G अभी विकास के दौर में है, लेकिन ऐसी तकनीकें बताती हैं कि भविष्य का तेज इंटरनेट केवल बेहतर मोबाइल टावरों पर निर्भर नहीं होगा। प्रकाश, माइक्रोचिप और अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट मिलकर अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन नेटवर्क की रीढ़ बन सकते हैं।
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