अरब सागर में चीन की चाल चल रहा पाकिस्तान, 'ग्रे-जोन' रणनीति का कैसे कर रहा इस्तेमाल?
उत्तरी अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक पोतों की टक्कर के बाद समुद्री सुरक्षा और 'ग्रे-जोन' रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रे-जोन रणनीति में ऐसा दबाव बनाया जाता है जो सीधे युद्ध की सीमा तक नहीं पहुंचता। पाकिस्तान की चीन के साथ बढ़ती नौसैनिक साझेदारी, ग्वादर की रणनीतिक स्थिति और अरब सागर में बढ़ती गतिविधियों ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: अरब सागर एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते सामरिक तनाव के केंद्र में है। उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक पोत और पाकिस्तानी नौसेना के पोत PNS Hunain की टक्कर के बाद नई दिल्ली ने इस घटना को लेकर इस्लामाबाद के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। भारतीय पक्ष के अनुसार पाकिस्तानी पोत का संचालन असुरक्षित और गैर-पेशेवर था। घटना के बाद पाकिस्तान के राजनयिक प्रतिनिधि को भी तलब किया गया।
इस घटना ने सिर्फ समुद्री सुरक्षा पर सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में इस्तेमाल की जा रही कथित 'ग्रे-जोन रणनीति' को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, मौजूदा जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि नौसैनिक टक्कर चीन के निर्देश पर हुई थी। लेकिन पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रक्षा एवं समुद्री सहयोग को देखते हुए अरब सागर का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।
क्या होती है 'ग्रे-जोन' रणनीति?
'ग्रे-जोन' से आशय ऐसी गतिविधियों से है जो सामान्य शांति और खुले सैन्य संघर्ष के बीच की स्थिति में आती हैं। इनमें सैन्य दबाव, समुद्री गश्त, निगरानी, आर्थिक और कूटनीतिक दबाव, साइबर गतिविधियां या ऐसी कार्रवाइयां शामिल हो सकती हैं जिनसे प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बने, लेकिन स्थिति तत्काल पूर्ण युद्ध में न बदले।
समुद्री क्षेत्र में यह रणनीति विशेष रूप से जटिल हो जाती है, क्योंकि युद्धपोतों, तटरक्षक बल, अनुसंधान जहाजों, मछली पकड़ने वाले जहाजों और अन्य समुद्री संसाधनों की गतिविधियों के बीच अंतर करना कई बार मुश्किल हो सकता है। समुद्री-एशिया में ग्रे-जोन गतिविधियों पर किए गए रणनीतिक अध्ययनों में सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक साधनों के मिश्रण को इसका महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
चीन की रणनीति से पाकिस्तान को क्यों जोड़ा जा रहा है?
चीन लंबे समय से हिंद महासागर में अपनी समुद्री मौजूदगी बढ़ा रहा है। चीन की ग्रे-जोन रणनीतियों पर हुए अध्ययनों में कोस्ट गार्ड, समुद्री मिलिशिया, अनुसंधान और अन्य गैर-पारंपरिक समुद्री साधनों के इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है। इसका उद्देश्य कई मामलों में प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बढ़ाना और रणनीतिक स्थिति को धीरे-धीरे बदलना बताया गया है।
पाकिस्तान के साथ चीन का रक्षा सहयोग भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने अरब सागर में Sea Guardians जैसे संयुक्त समुद्री अभ्यास किए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान की नौसेना में चीनी मूल की तकनीक और प्लेटफॉर्म की भूमिका बढ़ी है।
इसी वजह से अरब सागर में पाकिस्तान की किसी असामान्य समुद्री गतिविधि को चीन की व्यापक हिंद महासागर रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, किसी विशिष्ट घटना को सीधे चीनी निर्देश या नियंत्रण से जोड़ने के लिए अलग और ठोस प्रमाण की जरूरत होगी।
ग्वादर पोर्ट क्यों है अहम?
पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह इस पूरे समीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ा है और अरब सागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है।
रणनीतिक विश्लेषणों में ग्वादर को चीन के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब है। इन समुद्री मार्गों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
इसका मतलब यह है कि ग्वादर केवल पाकिस्तान का एक बंदरगाह नहीं है, बल्कि भारत-चीन-पाकिस्तान के बीच व्यापक समुद्री रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में भी इसका महत्व है।
पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता भी बढ़ रही है
चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग का असर पाकिस्तान की नौसेना के आधुनिकीकरण में भी दिखाई देता है। 2026 में पाकिस्तान ने अपनी Hangor-class submarine कार्यक्रम से जुड़ी प्रगति को आगे बढ़ाया। पाकिस्तान ने आठ Hangor-class पनडुब्बियों की योजना बनाई है, जिनमें चीनी सहयोग महत्वपूर्ण है।
इससे पाकिस्तान को अरब सागर में पानी के भीतर निगरानी और समुद्री प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। भारत के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि अरब सागर भारत की पश्चिमी समुद्री सीमा और ऊर्जा एवं व्यापार मार्गों से सीधे जुड़ा हुआ है।
मौजूदा टक्कर को लेकर क्या सामने आया?
16 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार भारतीय नौसेना के एक पोत और पाकिस्तानी नौसेना के PNS Hunain के बीच उत्तरी अरब सागर में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में टक्कर हुई। भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी पोत के संचालन को असुरक्षित और गैर-पेशेवर बताया तथा 1991 के भारत-पाकिस्तान समुद्री सैन्य आचरण समझौते का हवाला दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक घटना में PNS Hunain को मामूली नुकसान हुआ, जबकि भारतीय पोत परिचालन स्थिति में रहा। भारत ने इस मामले को राजनयिक स्तर पर भी उठाया है।
कुछ विश्लेषणों ने इस घटना को 'ग्रे-जोन' गतिविधियों के व्यापक संदर्भ में देखा है, लेकिन अभी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर इसे चीन की ओर से निर्देशित कार्रवाई कहना स्थापित तथ्य नहीं है।
भारत के लिए क्या मायने हैं?
अरब सागर में बढ़ती नौसैनिक गतिविधियां भारत के लिए समुद्री निगरानी और Maritime Domain Awareness को और महत्वपूर्ण बनाती हैं। भारतीय नौसेना की 2026 की समुद्री सुरक्षा रणनीति में भी 'ग्रे-जोन' गतिविधियों और समुद्री क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख किया गया है।
भारत के लिए चुनौती केवल पारंपरिक नौसैनिक शक्ति की नहीं है। समुद्री क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही, निगरानी, बंदरगाहों की रणनीतिक भूमिका, पनडुब्बी गतिविधियां और सैन्य अभ्यास—इन सभी को एक साथ देखकर स्थिति का आकलन करना जरूरी हो जाता है।
निष्कर्ष: अरब सागर में पाकिस्तान की गतिविधियों को चीन की व्यापक समुद्री रणनीति से जोड़कर देखने के पीछे पाकिस्तान-चीन की बढ़ती रक्षा साझेदारी और ग्वादर जैसे रणनीतिक केंद्र महत्वपूर्ण कारण हैं। लेकिन मौजूदा नौसैनिक टक्कर को सीधे चीन की 'चाल' बताने के लिए अभी अधिक ठोस सार्वजनिक प्रमाण की आवश्यकता है। फिलहाल यह घटना भारत-पाकिस्तान समुद्री संबंधों में बढ़ती संवेदनशीलता और हिंद महासागर में बदलते सामरिक समीकरण का संकेत जरूर देती है।
Keep reading
More in राष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रीय समाचार
'SIR प्रक्रिया पूरी तरह विफल, आयोग का प्रेस नोट सिर्फ डैमेज कंट्रोल'; जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 27 सितंबर को चु…
राष्ट्रीय समाचार
क्या पीएम मोदी जाएंगे पाकिस्तान? इस्लामाबाद में होने वाली SCO के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक में शामिल होगा भारत
भारत 28 से 30 सितंबर 2026 तक इस्लामाबाद में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक में हिस्सा लेगा। भारतीय राष्ट्र…
राष्ट्रीय समाचार
SIR विवाद: INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होंगे अखिलेश यादव, बताया कारण
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद के बीच 30 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित INDIA गठबंधन की बै…
राष्ट्रीय समाचार
आज बैंक खुले हैं या बंद? यूनियनों ने क्यों टाली 3 दिन की हड़ताल, पढ़ें इसके पीछे की कहानी
बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। 28 से 30 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल टाल दी गई है। रविवार देर रात इ…
राष्ट्रीय समाचार
निचली अदालतों में जजों के 7,300 से ज्यादा पद खाली, कर्नाटक में सबसे ज्यादा कमी
देश की जिला और अधीनस्थ अदालतों में 7,310 न्यायिक अधिकारियों के पद खाली हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा संसद में दी गई जानकारी के…
राष्ट्रीय समाचार
'निर्भया कांड से तुलना करने से खुद को नहीं रोक सकते', दिल्ली-NCR में रेप की घटनाओं पर SC ने लिया संज्ञान
दिल्ली-NCR में हाल में सामने आई यौन हिंसा की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया। जस्टिस जेबी पार्…
