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'क्या हमें 4th पार्टी के ऑडिट की जरूरत है?', सार्वजनिक परियोजनाओं को लेकर PM मोदी की सचिवों को फटकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। 53वीं PRAGATI बैठक में उन्होंने सवाल उठाया कि जब थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट की व्यवस्था मौजूद है, तो क्या अब '4th party audit' की जरूरत पड़ रही है। पीएम मोदी ने छह बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की, जिनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है और जो नौ राज्यों में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

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'क्या हमें 4th पार्टी के ऑडिट की जरूरत है?', सार्वजनिक परियोजनाओं को लेकर PM मोदी की सचिवों को फटकार

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों पर वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है। मंगलवार को हुई 53वीं PRAGATI बैठक में पीएम मोदी ने केंद्र के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों से सवाल किया कि अगर मौजूदा थर्ड-पार्टी ऑडिट के बावजूद परियोजनाओं की गुणवत्ता में कमियां सामने आ रही हैं, तो क्या अब 'फोर्थ-पार्टी ऑडिट' की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने ऐसी खामियों को 'अस्वीकार्य' बताया और कहा कि सरकारी परियोजनाओं में काम की रफ्तार जरूरी है, लेकिन उसके साथ गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।

थर्ड-पार्टी ऑडिट के बावजूद क्यों उठी 'फोर्थ पार्टी' की बात?

सरकारी निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता की जांच के लिए आमतौर पर थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन पीएम मोदी ने अधिकारियों के सामने सवाल रखा कि अगर इस व्यवस्था के बावजूद काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं, तो क्या मौजूदा निगरानी प्रणाली अपने उद्देश्य को पूरा कर रही है।

उन्होंने संकेत दिया कि केवल ऑडिट की औपचारिक प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है। गुणवत्ता की निगरानी जमीन पर और परियोजना के हर चरण में प्रभावी होनी चाहिए।

30 हजार करोड़ से ज्यादा की 6 परियोजनाओं की समीक्षा

PRAGATI बैठक में प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र की छह इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

पीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा कि बड़ी परियोजनाओं को केवल अलग-अलग हिस्सों, स्ट्रेच या पैकेज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इनके पूरे सिस्टम को एक साथ ध्यान में रखकर निगरानी और समीक्षा की जानी चाहिए।

'स्पीड के साथ क्वालिटी भी जरूरी'

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की कोशिश के साथ गुणवत्ता का स्तर भी ऊंचा रहना चाहिए।

उन्होंने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीक अपनाने और हर स्तर पर क्वालिटी एश्योरेंस तथा सुपरविजन को मजबूत करने का आह्वान किया।

यानी सरकार के लिए सिर्फ यह महत्वपूर्ण नहीं है कि कोई सड़क, रेलवे लाइन या बिजली परियोजना कितनी जल्दी पूरी हुई। यह भी उतना ही अहम है कि वह कितनी टिकाऊ और मानकों के अनुरूप बनी है।

बिजली परियोजना पर पीएम ने दिया 'बांध-नहर' का उदाहरण

बिजली क्षेत्र से जुड़ी एक परियोजना की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने पावर जनरेशन और ट्रांसमिशन के बीच तालमेल की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, अगर उसे लोगों और उद्योगों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त ट्रांसमिशन क्षमता उपलब्ध न हो। इसके लिए उन्होंने उदाहरण दिया कि नहरों के बिना बांध बनाने से वांछित परिणाम नहीं मिल सकता।

इसका सीधा संदेश था कि किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग तरीके से नहीं, बल्कि एक एकीकृत सिस्टम के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रोजेक्ट्स की निगरानी में नई तकनीक पर जोर

पीएम मोदी ने परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की बात कही। साथ ही, उन्होंने हर स्तर पर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत करने पर जोर दिया।

सरकार के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में छोटी-सी गुणवत्ता संबंधी खामी बाद में बड़े खर्च और मरम्मत की समस्या पैदा कर सकती है।

साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' पर भी हुई चर्चा

PRAGATI बैठक में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा नहीं हुई। साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री ने इन अपराधों की रोकथाम के लिए ट्रेनिंग, जागरूकता और शिक्षा को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने खास तौर पर बुजुर्गों, युवाओं और दूसरे संवेदनशील वर्गों के लिए लगातार और लक्षित जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।

गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस दौरान 20 राज्यों में साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने संबंधित अधिकारियों की नियमित क्षमता-वृद्धि यानी capacity building पर भी जोर दिया।

PM मोदी की बैठक के 5 बड़े संदेश

  1. गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं — परियोजनाओं की गति के साथ गुणवत्ता भी सुनिश्चित करनी होगी।

  2. थर्ड-पार्टी ऑडिट की प्रभावशीलता पर सवाल — अगर मौजूदा व्यवस्था कमियां नहीं पकड़ रही, तो निगरानी तंत्र में सुधार जरूरी है।

  3. इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग — बड़े प्रोजेक्ट्स को अलग-अलग हिस्सों के बजाय पूरे सिस्टम के रूप में देखा जाए।

  4. तकनीक का इस्तेमाल — क्वालिटी एश्योरेंस और सुपरविजन में आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए।

  5. प्रोजेक्ट के हर चरण पर निगरानी — खामी सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसे पहले ही रोकने की व्यवस्था हो।

'4th Party Audit' का मतलब क्या है?

यहां '4th party audit' कोई घोषित नई सरकारी ऑडिट व्यवस्था नहीं है। पीएम मोदी का सवाल मौजूदा थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट व्यवस्था की प्रभावशीलता पर चिंता जताने के संदर्भ में था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने व्यंग्यात्मक सवाल के तौर पर पूछा कि क्या अब चौथे स्तर की जांच की जरूरत पड़ रही है।

इसलिए इसे फिलहाल किसी नई औपचारिक सरकारी व्यवस्था की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

क्यों अहम है पीएम मोदी का यह संदेश?

भारत में सड़क, रेलवे, बिजली और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर सरकारी निवेश हो रहा है। ऐसे में किसी परियोजना की खराब गुणवत्ता का असर सिर्फ निर्माण एजेंसी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सार्वजनिक धन, सुरक्षा और परियोजना की लंबी अवधि की उपयोगिता पर पड़ता है।

पीएम मोदी का जोर इसी बात पर था कि परियोजनाएं केवल समय पर पूरी न हों, बल्कि मानकों के मुताबिक और टिकाऊ तरीके से पूरी हों।

एक नजर में

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निष्कर्ष

PM Modi ने सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को साफ संदेश दिया है—काम तेजी से हो, लेकिन गुणवत्ता की कीमत पर नहीं। 53वीं PRAGATI बैठक में छह बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान थर्ड-पार्टी ऑडिट की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए उनका '4th party audit' वाला तंज इसी चिंता को सामने लाता है।

अब फोकस सिर्फ परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, निगरानी और पूरे सिस्टम के एकीकृत क्रियान्वयन पर भी रहेगा।

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