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आम आदमी को लगेगा महंगाई का झटका! बफर स्टॉक का 30% प्याज सड़कर बर्बाद, बढ़ सकती है कीमत

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच सरकारी बफर स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, NCCF के करीब 1.2 लाख टन के बफर स्टॉक में लगभग 30% प्याज खराब हो चुका है, जबकि इस साल नुकसान 40% तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। सरकार ने कीमतों पर काबू पाने के लिए बफर स्टॉक जारी करने और ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाने का फैसला किया है।

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आम आदमी को लगेगा महंगाई का झटका! बफर स्टॉक का 30% प्याज सड़कर बर्बाद, बढ़ सकती है कीमत

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच सरकारी बफर स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, NCCF के करीब 1.2 लाख टन के बफर स्टॉक में लगभग 30% प्याज खराब हो चुका है, जबकि इस साल नुकसान 40% तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। सरकार ने कीमतों पर काबू पाने के लिए बफर स्टॉक जारी करने और ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाने का फैसला किया है।

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नई दिल्ली: रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाला प्याज एक बार फिर आम आदमी की जेब पर असर डाल सकता है। देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच अब सरकारी बफर स्टॉक का बड़ा हिस्सा खराब होने की खबर सामने आई है। इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने की सरकारी रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, NCCF के करीब 1.2 लाख टन प्याज के बफर स्टॉक में लगभग 30 फीसदी स्टॉक खराब हो चुका है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि इस साल नुकसान बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच सकता है।

1.2 लाख टन में 30% प्याज खराब

सरकारी बफर स्टॉक का उद्देश्य यही होता है कि जब बाजार में प्याज की आवक कम हो और कीमतें बढ़ने लगें, तब इस स्टॉक को बाजार में उतारकर कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।

लेकिन मौजूदा स्थिति में स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा खराब होने से सरकार के पास उपलब्ध इस्तेमाल योग्य प्याज की मात्रा कम हो सकती है। उच्च नमी और भंडारण व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को खराब होने की प्रमुख वजहों में बताया गया है।

नासिक में तो तस्वीर और भी चिंताजनक

महाराष्ट्र के लासलगांव में सरकारी स्टॉक की गुणवत्ता को लेकर जमीनी रिपोर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, वहां के एक Central Warehousing Corporation (CWC) गोदाम में रखे स्टॉक की ग्रेडिंग के दौरान बड़ी मात्रा में प्याज खराब पाया गया। निरीक्षण में करीब 60-70 फीसदी प्याज के खराब होने की बात सामने आई है। हालांकि यह आंकड़ा उस विशेष गोदाम के ग्राउंड आकलन से जुड़ा है और इसे पूरे राष्ट्रीय बफर स्टॉक पर लागू नहीं किया जा सकता।

कामगार अच्छे प्याज को खराब प्याज से अलग कर रहे हैं, ताकि इस्तेमाल योग्य स्टॉक को बाजार में भेजा जा सके।

प्याज के दाम कितने बढ़े?

इस बीच प्याज की कीमतों में पहले ही तेजी देखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बाजारों में प्याज की कीमत करीब 15 दिनों में 35 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

लासलगांव की थोक मंडी में भी 25 अगस्त को प्याज का भाव 4,250 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया था। कम आवक और कुछ प्रमुख उत्पादक इलाकों में मौसम से हुए नुकसान को कीमत बढ़ने की वजहों में गिना जा रहा है।

सरकार ने शुरू किया 'कांदा एक्सप्रेस'

कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र से प्याज को देश के प्रमुख उपभोक्ता बाजारों तक पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू करने की योजना बनाई।

लेकिन इस योजना को भी शुरुआती अड़चनों का सामना करना पड़ा। दिल्ली के लिए प्रस्तावित पांच ट्रेनों में से चार रद्द हो गईं, जबकि बची हुई ट्रेन करीब 26 घंटे की देरी से रवाना हुई। 840 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 450 मीट्रिक टन प्याज भेजा जा सका।

दिल्ली में 35 रुपये किलो बिकेगा सरकारी प्याज

आम लोगों को राहत देने के लिए केंद्र ने दिल्ली में बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने की घोषणा की है। यह बाजार की मौजूदा कीमतों से काफी कम है।

सरकार का मकसद है कि अतिरिक्त सप्लाई बाजार में आने से कीमतों पर दबाव कम हो और जमाखोरी या सट्टेबाजी की संभावनाओं पर भी अंकुश लगे।

क्या देश में प्याज की कमी है?

यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। केंद्र सरकार का कहना है कि देश में कुल प्याज उत्पादन और उपलब्धता फिलहाल चिंता का विषय नहीं है।

कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में प्याज उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख मीट्रिक टन के लगभग बराबर है। सरकार ने जुलाई में यह भी कहा था कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है।

यानी मौजूदा समस्या को केवल देशव्यापी उत्पादन की कमी से जोड़ना सही नहीं होगा। स्थानीय आवक, भंडारण में नुकसान, मौसम और बाजार की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।

बफर स्टॉक क्यों जरूरी है?

प्याज जल्दी खराब होने वाली फसल है। इसलिए सरकार इसे खरीदकर बफर स्टॉक बनाती है और कीमतों में असामान्य तेजी आने पर बाजार में उतारती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य है:

  • बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखना

  • कीमतों में अचानक उछाल रोकना

  • जमाखोरी पर अंकुश लगाना

  • किसानों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाना

  • त्योहारी और कम आवक वाले मौसम में सप्लाई बनाए रखना

लेकिन अगर स्टॉक का बड़ा हिस्सा भंडारण के दौरान खराब हो जाए, तो बफर स्टॉक की कीमत नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।

क्या प्याज और महंगा होगा?

संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्याज की कीमत निश्चित रूप से और बढ़ेगी।

अगर बाजार में आवक कम रही और इस्तेमाल योग्य सरकारी स्टॉक उम्मीद से कम निकला, तो कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है। दूसरी तरफ सरकार द्वारा बफर स्टॉक जारी करने और दूसरे राज्यों से सप्लाई बढ़ाने से तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

सरकार ने भी कहा है कि आने वाले महीनों में घरेलू मांग पूरी करने के लिए प्याज की सप्लाई पर्याप्त रहने की उम्मीद है।

आम आदमी के लिए क्या मायने?

मुद्दामौजूदा स्थितिबफर स्टॉककरीब 1.2 लाख टन में 30% खराब होने की रिपोर्टसंभावित नुकसानइस साल 40% तक पहुंचने की आशंकाकुछ बाजारों में कीमतकरीब ₹60-70/kgलासलगांव थोक भाव₹4,250/क्विंटल से ज्यादासरकारी बिक्रीदिल्ली में ₹35/kgविशेष ट्रेन‘कांदा एक्सप्रेस’मुख्य चिंताभंडारण और सप्लाई मैनेजमेंटसरकारी दावाघरेलू मांग के लिए कुल सप्लाई पर्याप्त

निष्कर्ष

प्याज की कीमतों में तेजी के बीच सरकारी बफर स्टॉक का खराब होना चिंता बढ़ाने वाली खबर है। करीब 1.2 लाख टन के NCCF स्टॉक में 30 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब कई शहरों में प्याज पहले ही महंगा हो चुका है।

हालांकि, केंद्र का कहना है कि देश में कुल प्याज उत्पादन और उपलब्धता पर्याप्त है। सरकार ने 35 रुपये किलो प्याज की बिक्री और ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसी पहल शुरू की है। अब यह देखना अहम होगा कि खराब स्टॉक की भरपाई कितनी जल्दी होती है और आने वाले हफ्तों में मंडियों में प्याज की आवक कैसी रहती है।

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