'इस बेकार सॉफ्टवेयर को हटाएं', ECINet एप को लेकर शशि थरूर ने की चुनाव आयोग से मांग
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग के ECINet सॉफ्टवेयर को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। थरूर ने कहा कि चुनाव आयोग को प्रभावित नागरिकों और देश से माफी मांगनी चाहिए तथा कथित नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। उनकी प्रतिक्रिया एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें गोवा में मतदाता सूची से हटाए गए कुछ नामों को दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया में ECINet की केंद्रीकृत व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतों का दावा किया गया है। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं और वैधानिक अधिकारी कानून के अनुसार अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं।
लेखक
Vinay Mishra
ECINet को लेकर शशि थरूर ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के ECINet सॉफ्टवेयर को लेकर विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे वापस लेने की मांग की है। थरूर ने 24 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चुनाव आयोग को टैग करते हुए कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और प्रभावित नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ जरूरी मानवीय सुविधाओं तक उनकी पहुंच से भी जुड़ा है।
थरूर ने चुनाव आयोग से प्रभावित नागरिकों और देश से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने ECINet सॉफ्टवेयर को रद्द करने और कथित नुकसान की भरपाई करने की बात भी कही।
गोवा में मतदाता सूची को लेकर उठा विवाद
यह विवाद गोवा में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से जुड़े एक मामले के बाद सामने आया। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, गोवा के कुछ Electoral Registration Officers (EROs) ने जिन मतदाताओं को सूची में बने रहने के योग्य पाया, उनके नाम दोबारा जोड़ने की कोशिश की। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ECINet की केंद्रीकृत व्यवस्था के कारण स्थानीय अधिकारियों को इन बदलावों को सीधे करने में परेशानी हुई और आवश्यक अनुमति दिल्ली से नियंत्रित थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस मामले में चुनाव आयोग को कई बार संपर्क किया था। एक सूची में 97 मतदाताओं के मामलों का उल्लेख होने की बात भी सामने आई है।
मतदाता सूची और सरकारी योजनाओं का कनेक्शन
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है क्योंकि गोवा में मतदाता सूची में दर्ज होना कुछ राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की पात्रता से जुड़ा है। Moneycontrol के अनुसार, रिपोर्ट में गोवा मेडिक्लेम योजना का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत डायलिसिस, ट्रांसप्लांट और कुछ अन्य सुपर-स्पेशियलिटी उपचारों के लिए पात्रता राज्य के मतदाता होने से जुड़ी है।
इसी संदर्भ में थरूर ने दावा किया कि ECINet से जुड़ी कथित समस्या का असर केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसे नागरिक अधिकारों और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच से भी जोड़ते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की।
ECINet क्या है?
चुनाव आयोग ने ECINet को अपने विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप्स को एकीकृत करने वाली व्यवस्था के रूप में विकसित किया है। आयोग ने जनवरी 2026 में इसे लॉन्च किया था। इसका बीटा संस्करण नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान टेस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
ECINet का इस्तेमाल चुनाव से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ चुनाव अधिकारियों द्वारा मतदाता सूची और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं से संबंधित कार्यों के लिए भी किया जाता है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
ECINet को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने अपने हालिया स्पष्टीकरण में कहा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। आयोग के मुताबिक, IT सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस में सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि Electoral Registration Officers (EROs) और District Election Officers (DEOs) मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने जैसे मामलों में कानून के तहत दिए गए वैधानिक अधिकारों के अनुसार काम करते हैं।
SIR विवाद के बीच ECINet पर भी बहस तेज
ECINet का विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और SIR को लेकर भी बहस चल रही है। The Indian Express ने रिपोर्ट किया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनावी सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण और उससे जुड़े प्रशासनिक अधिकारों को लेकर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग सुझाव, टिप्पणियां और सवाल उठना सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
थरूर ने मांगी जवाबदेही
शशि थरूर ने अपने बयान में चुनाव आयोग से न केवल ECINet को वापस लेने की मांग की, बल्कि प्रभावित नागरिकों से माफी और कथित नुकसान की भरपाई की भी मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने ECINet की सुरक्षा व्यवस्था और वैधानिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
अब विवाद का एक प्रमुख सवाल यह है कि गोवा में मतदाता सूची से जुड़े मामलों में ECINet की केंद्रीकृत व्यवस्था ने वास्तव में किस स्तर तक स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया और इस संबंध में चुनाव आयोग आगे क्या स्पष्टीकरण या कदम उठाता है।
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